नोएडा। नोएडा बार एसोसिएशन, सेक्टर-33 ने स्पष्ट किया है कि ई-पंजीकरण व्यवस्था के विरोध में चल रही अधिवक्ताओं की हड़ताल अभी समाप्त नहीं हुई है और पूर्ववत जारी रहेगी। एसोसिएशन ने कुछ समाचार पत्रों में प्रकाशित “अधिवक्ताओं के कल से काम पर लौटने की उम्मीद” शीर्षक वाली खबरों को भ्रामक बताते हुए उनका खंडन किया है।
शनिवार को निबंधन विभाग के एआईजी अरुण शर्मा के साथ हुई वार्ता के बाद कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह संकेत दिया गया था कि अधिवक्ता जल्द ही काम पर लौट सकते हैं। हालांकि नोएडा बार एसोसिएशन का कहना है कि वार्ता के दौरान किसी भी मुद्दे पर अंतिम सहमति नहीं बनी है और जब तक सरकार की ओर से लिखित शासनादेश जारी नहीं किया जाता, तब तक किसी भी मौखिक आश्वासन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
एसोसिएशन के उपाध्यक्ष कुँवर बिलाल बर्नी ने जारी बयान में कहा कि संगठन के संरक्षक एन.के. शर्मा ने केवल यह कहा था कि सोमवार को कार्यकारिणी की बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी। इसे हड़ताल समाप्त करने के निर्णय के रूप में प्रस्तुत करना पूरी तरह गलत है।
बार एसोसिएशन ने दोहराया कि उनका आंदोलन केवल पहली बार आवंटित संपत्तियों की ई-रजिस्ट्री तक सीमित नहीं है। अधिवक्ताओं की मुख्य मांग है कि प्राधिकरण द्वारा लागू की गई ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए और पंजीकरण का कार्य पूर्व की तरह निबंधन विभाग के माध्यम से ही संपादित किया जाए।
इसके अलावा संगठन ने दस्तावेज लेखकों, स्टाम्प विक्रेताओं और आम वादकारी जनता के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार से लिखित गारंटी की मांग भी की है। एसोसिएशन का कहना है कि जब तक इन सभी मांगों को लिखित रूप में स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक काम पर लौटने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
नोएडा बार एसोसिएशन ने अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टाम्प विक्रेताओं और आम जनता से अफवाहों से सावधान रहने की अपील भी की है। संगठन का आरोप है कि प्रशासन और सरकार आंदोलन को कमजोर करने के लिए भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। बयान में कहा गया कि मीडिया में प्रकाशित ऐसी खबरें आंदोलन की एकजुटता को प्रभावित करने की कोशिश का हिस्सा हो सकती हैं।
एसोसिएशन के अनुसार, वर्तमान आंदोलन को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की विभिन्न बार एसोसिएशनों का व्यापक समर्थन प्राप्त हो रहा है। हाई कोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अनुज कुमार शर्मा, गाजियाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक वर्मा तथा गौतमबुद्धनगर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप भाटी ने भी आंदोलन के प्रति समर्थन जताया है।
बार एसोसिएशन का दावा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जनपदों और तहसीलों की बार एसोसिएशन भी इस मुद्दे पर उनके साथ खड़ी हैं। संगठन का मानना है कि यह संघर्ष अब केवल नोएडा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रदेशभर के अधिवक्ताओं और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोगों का मुद्दा बन चुका है।
कुँवर बिलाल बर्नी ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों को लिखित रूप में स्वीकार नहीं करती, तब तक हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी। उन्होंने बताया कि परिसर में पूर्ण कलमबंदी जारी रहेगी और कोई भी अधिवक्ता, बैनामा लेखक, स्टाम्प विक्रेता अथवा अन्य सहयोगी कार्य नहीं करेगा।
उन्होंने आंदोलन में शामिल सभी लोगों से संयम बनाए रखने और एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि यह संघर्ष भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों और पेशे की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, यदि वर्तमान समय में अधिवक्ता समुदाय अपनी मांगों पर समझौता करता है तो इसका प्रभाव आने वाले वर्षों तक महसूस किया जाएगा।
नोएडा बार एसोसिएशन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ई-पंजीकरण व्यवस्था के खिलाफ उनका आंदोलन अभी जारी है और सरकार की ओर से ठोस एवं लिखित आश्वासन मिलने तक इसमें किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।





