आईएमएस लॉ कॉलेज में आयोजित पाँच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) के दूसरे दिन “कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी उपयोग के साथ मानवीय नेतृत्व : भविष्य अब भी मनुष्यों का है” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 13 से 17 जुलाई 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश के शिक्षाविद, विधि विशेषज्ञ और शोधार्थी भाग ले रहे हैं।
इस सत्र के मुख्य वक्ता डॉ. मार्को साविक रहे, जो अमेरिकन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के वाइस प्रेसिडेंट हैं। उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को मानव बुद्धिमत्ता का प्रतिस्थापन नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि इसे मानव क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाने वाले सहयोगी उपकरण के रूप में देखा जाना चाहिए।
डॉ. साविक ने कहा कि तकनीक-प्रधान होते जा रहे वर्तमान दौर में सहानुभूति, रचनात्मकता, नैतिक निर्णय क्षमता, समालोचनात्मक चिंतन और उत्तरदायी नेतृत्व जैसे मानवीय गुणों का महत्व कभी कम नहीं होगा। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे एआई आधारित उपकरणों का उपयोग सोच-समझकर और जिम्मेदारी के साथ करें, ताकि शिक्षण और अधिगम की मानवीय संवेदनशीलता, संवाद तथा मूल्यों को बनाए रखते हुए तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा सके।
उन्होंने कहा कि भविष्य उन्हीं संस्थानों और पेशेवरों का होगा, जो तकनीक को अपनाने के साथ-साथ मानवीय नेतृत्व और नैतिक मूल्यों को भी समान महत्व देंगे। डॉ. साविक ने प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि एआई को केवल तकनीकी उपकरण के रूप में देखने के बजाय उसका उपयोग सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों के साथ किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में डॉ. गोविंद प्रसाद गोयल ने कहा कि वर्तमान समय में विधि शिक्षा को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य उभरती तकनीकों के साथ समन्वित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शिक्षकों को वैश्विक परिप्रेक्ष्य, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और एआई आधारित नवाचारों से परिचित कराते हैं।
डॉ. गोयल ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल शिक्षकों के ज्ञान और कौशल को समृद्ध करते हैं, बल्कि विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और व्यावहारिक विधि शिक्षा प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक और विधि शिक्षा का समन्वय आने वाले समय में विधिक पेशे की दिशा तय करेगा।
विभागाध्यक्ष डॉ. अंजुम हसन ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य विधि शिक्षकों और शोधार्थियों को समकालीन तकनीकी तथा विधिक परिवर्तनों से अवगत कराना है। उन्होंने बताया कि यह एफडीपी शिक्षण, अनुसंधान और विधिक अभ्यास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी और उत्तरदायी उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि एआई आधारित तकनीकें विधि अनुसंधान, केस विश्लेषण, कानूनी दस्तावेज तैयार करने और न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकती हैं, लेकिन इनके उपयोग के दौरान नैतिकता और मानवीय मूल्यों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों और शोधार्थियों ने भी एआई और मानवीय नेतृत्व के संबंध में अपने विचार साझा किए। प्रतिभागियों ने माना कि एआई शिक्षा और विधि क्षेत्र में नई संभावनाएं लेकर आया है, लेकिन मानवीय संवेदनशीलता, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व के बिना तकनीक का उपयोग अधूरा रहेगा।
एफडीपी के दूसरे दिन हुए इस व्याख्यान ने प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर दिया कि भविष्य की शिक्षा प्रणाली में तकनीक और मानवीय नेतृत्व का संतुलन कितना महत्वपूर्ण होगा। कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि आगामी सत्रों में भी एआई, विधि शिक्षा और नवाचार से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिए जाएंगे।
आईएमएस लॉ कॉलेज द्वारा आयोजित यह फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शिक्षकों और शोधार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।






