नोएडा। अखिल भारतीय गुर्जर महासभा की ओर से सोमवार को नोएडा के सेक्टर-61 में “राष्ट्र की राजनीति और गुर्जर समाज का समावेश” विषय पर एक विचार गोष्ठी एवं पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, गुर्जर समाज की राजनीतिक भागीदारी, सामाजिक सशक्तिकरण, शिक्षा, युवाओं की भूमिका तथा राष्ट्र निर्माण में समाज के योगदान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर महासभा के पदाधिकारियों ने राष्ट्रीय स्तर पर गुर्जर समाज को सम्मानजनक राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री हरिश्चंद्र भाटी ने कहा कि गुर्जर समाज ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर देश की सुरक्षा, कृषि, सामाजिक विकास और राष्ट्र निर्माण तक हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके बावजूद आजादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी समाज को राष्ट्रीय राजनीति और सत्ता के केंद्र में उसके योगदान के अनुरूप स्थान नहीं मिल पाया है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दल चुनाव के समय गुर्जर समाज का समर्थन तो मांगते हैं, लेकिन सरकार बनने के बाद समाज को सत्ता और संगठन में अपेक्षित भागीदारी देने से पीछे हट जाते हैं। उनका कहना था कि अब समय आ गया है कि इस स्थिति में बदलाव लाया जाए और समाज को उसके अधिकारों के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने केंद्र सरकार से आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में गुर्जर समाज के प्रतिनिधि को कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की मांग की।
हरिश्चंद्र भाटी ने कहा कि समाज अपने अधिकारों और सम्मानजनक राजनीतिक भागीदारी के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करेगा। इसी उद्देश्य से आगामी 31 अक्टूबर, सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती के अवसर पर दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में “गुर्जर समाज स्वाभिमान रैली” आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस रैली में देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी गुर्जर समाज के लोगों के शामिल होने की संभावना है। उनका दावा है कि यह रैली समाज की एकता, जागरूकता और लोकतांत्रिक शक्ति का बड़ा प्रदर्शन होगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित रैली किसी एक राजनीतिक दल के विरोध में नहीं होगी। इसका उद्देश्य सभी राजनीतिक दलों को यह संदेश देना है कि गुर्जर समाज अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं रहेगा, बल्कि अपने सम्मानजनक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक भागीदारी के लिए संगठित होकर आवाज उठाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर समाज को उसकी जनसंख्या, योगदान और क्षमता के अनुरूप अवसर मिलना चाहिए।
महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सविन्द्र भाटी ने कहा कि गुर्जर समाज अब केवल चुनावी वादों पर भरोसा नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जो भी राजनीतिक दल समाज को संगठन और चुनावी राजनीति में उचित स्थान देगा तथा नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपेगा, समाज उसी का समर्थन करेगा। उन्होंने बताया कि इस उद्देश्य को लेकर महासभा देशभर में व्यापक जनजागरण अभियान चलाएगी, जिससे समाज के लोगों को राजनीतिक रूप से जागरूक और संगठित किया जा सके।
गोष्ठी के दौरान शिक्षा, सामाजिक समावेश, युवाओं के नेतृत्व विकास, संगठन की मजबूती और समाज के सर्वांगीण विकास जैसे विषयों पर भी गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति शिक्षा, संगठन और जागरूकता से ही संभव है। इसलिए युवाओं को शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में समावेशी राजनीति तभी मजबूत हो सकती है, जब सभी वर्गों और समुदायों को समान अवसर तथा सम्मानजनक प्रतिनिधित्व प्राप्त हो। समाज के विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय विकास में भी सभी समुदायों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय सचिव अरुण भाटी, राष्ट्रीय सचिव धीरेंद्र वर्मा, उत्तर प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सुनील भाटी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने एकजुट होकर समाज के राजनीतिक सशक्तिकरण, शिक्षा के विस्तार और संगठन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।
पत्रकार वार्ता के माध्यम से महासभा ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि गुर्जर समाज अब राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भागीदारी और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व के मुद्दे को लोकतांत्रिक ढंग से राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगा। आगामी 31 अक्टूबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित “गुर्जर समाज स्वाभिमान रैली” को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।






