नई दिल्ली में आयोजित “राष्ट्रीय ज्योतिष महाकुंभ – एस्ट्रो सांस्कृतिक महोत्सव” ने देशभर के ज्योतिष विद्वानों, विशेषज्ञों और आध्यात्मिक मार्गदर्शकों को एक मंच पर लाकर एक ऐतिहासिक अध्याय रच दिया। कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम में परंपरा और आधुनिकता के संगम की अनूठी झलक देखने को मिली।

🔭 विज्ञान और परंपरा का संतुलन जरूरी: हर्ष मल्होत्रा
केंद्रीय राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा ने अपने संबोधन में कहा कि ज्योतिष केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आज के आधुनिक युग में विज्ञान और परंपरा को साथ लेकर चलना समय की मांग है।
उन्होंने कहा कि यदि ज्योतिष विद्या का उपयोग सकारात्मक सोच और सही दिशा देने के लिए किया जाए, तो यह समाज के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध हो सकती है।
🏛️ 21वीं सदी में भी प्रासंगिक है ज्योतिष: विजेंद्र गुप्ता
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि ज्योतिष विद्या मानव अस्तित्व और ब्रहांड के बीच गहरे संबंध को दर्शाती है।
उन्होंने बताया कि तेज़ी से बदलते इस युग में, जहां संवाद और तकनीक ने जीवन को गति दी है, वहां पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित और प्रोत्साहित करना समाज की जिम्मेदारी है।
उनके अनुसार, ऐसे आयोजन सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
📜 वेदों से जुड़ी महत्वपूर्ण विद्या: अश्वनी चौबे
पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने ज्योतिष को भारतीय संस्कृति और वेदों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण विद्या बताया।
उन्होंने कहा कि यह शास्त्र सदियों से मानव जीवन को दिशा देता आया है और इसका उपयोग हमेशा सकारात्मक और जनकल्याण के लिए होना चाहिए।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि आधुनिक समाज में इसकी भूमिका और अधिक जिम्मेदारी के साथ निभाई जानी चाहिए।
🌟 देशभर के दिग्गज ज्योतिषियों का संगम
इस भव्य महाकुंभ में देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कुनाल वास्तु केंद्र एवं रिसर्च के संस्थापक कुनाल कुमार और “एस्ट्रोज एआई” के सीईओ प्रतीक पाण्डेय ने ज्योतिष और तकनीक के मेल को नई दिशा देने पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से ज्योतिष ज्ञान को आम लोगों तक सरल और सटीक तरीके से पहुंचाया जा सकता है।
🔮 ज्योतिष के रहस्यों से उठा पर्दा
कार्यक्रम में कई प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों ने अपने अनुभव और ज्ञान साझा किए। इनमें डॉ. वाई. राखी, जी.डी. वशिष्ठ, अजय भाम्बी, विवेक त्रिपाठी, अनिल वत्स, डॉ. नीति शर्मा और सारथी त्रिशला चतुर्वेदी शामिल रहे।
इन विशेषज्ञों ने ज्योतिष के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए बताया कि यह केवल भविष्यवाणी का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर दिशा देने का एक सशक्त साधन भी है।
🤝 आयोजन का सफल समापन
कार्यक्रम के अंत में आयोजक प्रदीप श्रीवास्तव और फजले गुफरान ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि इस महोत्सव का उद्देश्य ज्योतिष को एक सकारात्मक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समाज में स्थापित करना है, जिसमें वे सफल रहे।
📌 निष्कर्ष
“राष्ट्रीय ज्योतिष महाकुंभ” केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और आधुनिक तकनीक के संगम का प्रतीक बनकर उभरा।
इस मंच ने यह संदेश दिया कि यदि प्राचीन ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ा जाए, तो यह समाज के विकास और मानव कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।





