एमिटी विश्वविद्यालय में सिग्नल प्रोसेसिंग एंड इंटिग्रेटेड नेटवर्क पर 11वें अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

इसरो के चेयरमैन डा एस सोमनाथ ने किया  ऑनलाइन उद्घाटन

Eros Times: देश विदेश के छात्रों, उद्यमिेयों, शोधार्थियों, वैज्ञानिकों को सिग्नल प्रोसेसिंग एंव इंटिग्रेटेड नेटवर्क पर अपने विचारों को प्रकट करने और इस क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकास की जानकारी प्रदान करने के लिए मंच प्रदान करने हेतु एमिटी स्कूल ऑफ इंजीनियिरिंग एंड टेक्नोलॉजी के इलेक्ट्रोनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग द्वारा सिग्नल प्रोसेसिंग एंव इंटिग्रेटेड नेटवर्क 11वें अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन (एसपीआईएन 2024) का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का शुभारंभ इसरों के चेयरमैन और अंतरिक्ष विभाग के चेयरमैन डा एस सोमनाथ (ऑनलाइन), एमिटी शिक्षण समूह के सस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चौहान, संचार मंत्रालय के टेलीकम्यूनिकेशन विभाग के टेलीकॉम इंजीनियरिंग सेंटर के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (टेलीकॉम सुरक्षा) बिनय कुमार सिंह, एमिटी विश्वविद्यालय के चांसलर डा अतुल चौहान, यूएसए के जनरल ऑटोमिक ग्लोबल कोरपोरेशन के चीफ एक्जीक्यूटिव डा विवेक लाल, यूएसए के नासा एमेस रिसर्च सेंटर, कंप्यूटर वैज्ञानिक डा जॉन एम जेनकिन्स, एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला, एमिटी सांइस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती द्वारा किया गया। इस अवसर पर एरिक्सन इंडिया के इंडिया हेड – नेटवर्क और एमडी नितिन बंसल और सहस्त्र इलेक्ट्रोनिक प्राइवेट लिमिटेड के कोरपोरेट स्ट्रैटजी के निदेशक जार्ज पॉल को प्रोफेसरशिप की मानद उपाधि प्रदान की।

सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए इसरो के चेयरमैन और अंतरिक्ष विभाग के चेयरमैन डा एस सोमनाथ (ऑनलाइन) ने कहा कि एमिटी छात्रों में शिक्षा के साथ साथ अनुसंधान और नवाचार के गुण को विकसित कर रहा है। सिग्नल प्रोसेसिंग भौतिक मापदंडों की परिवर्तनशीलता का सबसे आवश्यक घटक है। हम लंबे समय से स्पेस सेंटर में कार्य कर रहे है और रिमोट सेसिंग क्राफ्ट की रीढ़ बनी हुई है। अंतरिक्ष यान डिटेक्टरों के माध्यम से संकेतो के माध्यम पृथ्वी की तस्वीर लेता है और उसकी विश्वसनीयता को खोए बिना उन्हे छवियों में बदलने के लिए प्रक्रिया को करता है। इस क्षेत्र में बड़ी प्रगति हुई है हांलाकि अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। सेंसिग सिग्नल प्रोसेसिंग कर एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा जो एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया है और यह भविष्य के प्रयासों की जानकारी देता है। सिंग्नल प्रोसेसिंग और कनेक्टेड नेटवर्क की एक बड़ी श्रृखंला हमें सिग्नल कैपचरिंग और उच्च आवृत्ति संचालन की गतिविधियों का संचालन करने में सक्षम बनाती है हांलांकि इस डोमेन को विकसित करने में विशेषज्ञता विकसित की गई है तथापि हमें क्षमताओं को बढ़ाने और मजबूत करने सहित प्रक्रिया को तेज करने की आवश्यकता है। डा सोमनाथ ने कहा कि नेटवर्क हमारे लिए कई प्रणालियों के माध्यम से कृषि, आईओटी, सिग्नल इंटेलिजेंस आदि क्षेत्रों में कार्य करने लिए महत्वपूर्ण है। छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए डा सोमनाथ ने कहा कि चंद्रयान 2 की असफलता से हमने बहुत कुछ सीखा और उस दौरान आने वाली खामियों को सुधार कर, पूरी तैयारी के साथ चंद्रयान 3 से सफलता हासिल की।

एमिटी शिक्षण समूह के सस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चौहान ने संबोधित ने घोषणा करते हुए कहा कि बहुत शीघ्र ही एमिटी, अंतरिक्ष के क्षेत्र में सबसे बड़ा आकदमिक सहयोगी बनेगा। यह अंतरिक्ष के क्षेत्र में सबसे बड़ी निजी और सरकारी भागीदारी होगी। डा चौहान ने कहा कि हम छात्रों को उद्योगों व क्षेत्रों की आवश्यकता के हिसाब से तैयार करते है जिससे वे पहले दिन से ही परिणाम प्रदान करें। इस प्रकार के सम्मेलनों से छात्रों को आप जैसे विशेषज्ञों से मिलने का अवसर एवं अनुसंधान की प्रेरणा प्राप्त होती है। डा चौहान ने कहा कि संस्कारों और मूल्यों के साथ प्राप्त शिक्षा के साथ आप जीवन में हर सफलता हासिल कर सकते है।

संचार मंत्रालय के टेलीकम्यूनिकेशन विभाग के टेलीकॉम इंजीनियरिंग सेंटर के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (टेलीकॉम सुरक्षा) बिनय कुमार सिंह ने कहा कि एमिटी द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में शामिल होकर स्वंय को गौरवांवित महसूस कर रहा हूं। उन्होनें छात्रों से कहा कि सदैव सर्तक रहे और सर्तक का अर्थ हमेशा तर्क के साथ विचार करें जिससे आप जीवन में कभी धोखा नही खायेगें। एमिटी के सम्मेलन के मंथन से निकले अमृत से आप अवश्य लांभावित होगे।

एमिटी विश्वविद्यालय के चांसलर डा अतुल चौहान ने कहा कि हम छात्रों की सर्वागीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है इसी क्रम में इस प्रकार के सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। डा चौहान ने कहा कि डा सोमनाथ का व्यापक दृष्टिकोण केवल इसरों तक सीमित नही है बल्कि पूरे देश में व्याप्त है। चंद्रयान और आदित्य की सफलता के उपरांत आज देश को पूरे विश्व मे ना केवल अंतरिक्ष के क्षेत्र में बल्कि विज्ञान एंव तकनीकी के क्षेत्र में अग्रणी पायदान पर देखा जा रहा है।

यूएसए के जनरल ऑटोमिक ग्लोबल कोरपोरेशन के चीफ एक्जीक्यूटिव डा विवेक लाल ने कहा कि आज भारत और यूएसए, प्रौद्योगिकी विकास के कई क्षेत्रों में मिलकर कार्य कर रहे है। नवाचार किसी भी देश की रीढ़ की हड्डी होती है। डाटा डावरस डिफेंस टेक्नोलॉजी से रक्षा मंचों पर बड़ा परिवर्तन आया है। डा लाल ने कहा कि कृषि, इलेक्ट्रोनिक वारफेयर और बिग डाटा पर सर्वाधिक ध्यान केन्द्रीत करने की आवश्यकता है। विश्व में आनेवाला समय ओपन इनोवेशन का है।

यूएसए के नासा एमेस रिसर्च सेंटर, कंप्यूटर वैज्ञानिक डा जॉन एम जेनकिन्स ने कहा कि चंद्रयान की सफलता ने भारत को अंतरिक्ष में नये मुकाम पर पहुंचा दिया है और हमें बेहतर भविष्य के लिए आपसी सहभागीता को विकसित करना चाहिए। डा जेनकिन्स ने कहा कि वर्तमान समय में सिग्नल प्रोसेसिंग पर आयोजित इस प्रकार के सम्मेलन छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो उनके व्यवसायिक जीवन में लाभप्रद साबित होगे।

एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला ने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन हम सभी के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने, अनुसंधान एंव नवाचार के नये मार्ग ,खोलने के लिए सहायक होतें। विकसित भारत के लिए छात्रों को राष्ट्र निर्माण हेतु तैयार करना हमारी प्राथमिकता है।

एमिटी स्कूल ऑफ इंजीनियिरिंग एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक डा मनोज पांडेय ने स्वागत करते हुए कहा कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में लगभग 35 विशेषज्ञ जानकारी प्रदान करेगें। इस सम्मेलन में रशिया, यूके, पोलैंड, यूएस, न्यूजीलैंड आदि सहित देश के प्रख्यात संस्थानो डीआरडीओ, इसरो, आईआईटी, आदि से प्रतिभागी व वैज्ञानिक शिरकत कर रहे है।

इस अवसर पर अतिथियों द्वारा सम्मेलन आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया गया और एमिटी स्कूल ऑफ इंजीनियिरिंग एंड टेक्नोलॉजी के पूर्व छात्रों ने भी अपने विचार साझा किये। कार्यक्रम में एमिटी स्कूल ऑफ इंजीनियिरिंग एंड टेक्नोलॉजी के इलेक्ट्रोनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख डा जे क राय, प्रो अश्विनी दुबे उपस्थित थे।

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