ब्लू व्हेल की मौजूदगी चिंता का सबब, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई करते कहा है कि यह एक राष्ट्रीय समस्या

दिल्ली/EROS TIMES: ब्लू व्हेल गेम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा है कि यह एक राष्ट्रीय समस्या है और इसे लेकर कदम उठाए जाएं। कोर्ट ने दूरदर्शन और अन्य प्राइवेट चैनलों से कहा कि वे इस गेम को लेकर जागरूकता कार्यक्रम बनाएं और प्राइम टाइम में दिखाएं। तमिलनाडु के एक 73 वर्षीय व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्र ने कहा कि हम नहीं जानते सरकार क्या और कैसे करेगी मगर यह खतरनाक खेल रुकना चाहिए। हालांकि, केंद्र सरकार ने अदालत से कहा कि उसने इसे लेकर एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई है, जो इस मामले को देखेगी और तीन हफ्तों में रिपोर्ट सौंपेगी। इस याचिका में ब्लू व्हेल चैलेंज गेम पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया गया है, जिसे भारत सहित दुनिया भर में कई बच्चों की कथित मौत से जोड़ा जा रहा है। इस गेम को लेकर कोर्ट की सख्ती पहली बार सामने नहीं आई है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी गत 22 अगस्त को ऐसी ही एक याचिका पर फेसबुक, गूगल और याहू से जवाब मांगा था। देखा जाए, तो सुप्रीम कोर्ट का रुख सही है। यह खेल तेजी से बच्चों को अपनी गिरफ्त में लेता जा रहा है। आए दिन हम गेम से जुड़ी खबरें भी सुनते रहते हैं। बावजूद इसके आज तक इस पर रोक की कारगर व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
तकनीक ने जहां हमारे जीवन को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है, वहीं इसने चिंताजनक समस्याएं भी पैदा की है। इंटरनेट के प्रसार के साथ ऑनलाइन गेम का विस्तार हुआ, पर इसके कई खेल अब मनोरंजन करने की जगह जानलेवा होने लगे हैं। रूस से शुरू हुआ ब्लू-व्हेल चैलेंज अब भारतीय किशोरों के लिए घातक हो चुका है। ऑनलाइन गेम के कहर से बच्चों व किशोरों को बचाने की बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है। ब्लू व्हेल के जबरदस्त खतरे हैं। पहला यह है कि बच्चे अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठते हैं। दूसरा, अगर बच्चे अवसाद में हैं, तो वे इस तरह के गेम से भाग नहीं सकते और इसके जाल में फंसते चले जाते हैं। इस गेम से जुड़ा तीसरा खतरा यह है कि अधिकांश बच्चों को यह पता ही नहीं होता है कि वे छत से नीचे कूद रहे हैं और जाने-अनजाने अपना भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। वहीं, माता-पिता भी इस बात से अनभिज्ञ हैं कि उन्हें बच्चों को सही राह दिखाने के लिए क्या करना चाहिए। इन परिस्थितियों से बचाव के लिए बच्चों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक बनाने और माता-पिता को सजग बनाए जाने की आवश्यकता है। साथ ही ऑनलाइन उपलब्ध होने वाले इस तरह के डेटा को लेकर केंद्र सरकार को नियामक बनाने की आवश्यकता है। अब जितने भी सर्विस प्रोवाइडर हैं, केंद्र सरकार को उन पर सख्ती करने की जरूरत है।
सरकार को सर्विस प्रोवाइडरों को यह निर्देश देना होगा कि वे इस बात को सुनिश्चित करें कि उनके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल दुरुपयोग को बढ़ावा देने के लिए नहीं होगा। बच्चों को जागरूक करने के लिए स्कूलों को लगातार उन्हें इस तरह के खतरे के बारे में बताते रहने की जरूरत है। यह ऐसे उपाय हैं, जिनसे हम खतरे को टाल सकते हैं। रूस में बने इस सुसाइड गेम ने दुनियाभर में लगभग 300 जानें ली हैं और अब भारत में भी इसका असर दिखने लगा है। इन बच्चों के परिजनों की मानें तो बच्चे तनाव अथवा निराशा का शिकार नहीं थे। हालांकि, इस गेम को बनाने वाला फिलिप बुदेकिन तो अब सलाखों के पीछे है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट पर इस तरह के कई ग्रुप हैं, जो बच्चों को इस जाल में फंसा सकते हैं। इसी के चलते इंस्टाग्राम ने इसके खिलाफ वार्निग जारी की है। ब्रिटेन के स्कूलों में इसे लेकर जागरूकता फैलाई जा रही है। गूगल प्लेस्टोर, एप्पल स्टोर और विंडोज इस तरह के किसी खेल को अपने प्लेटफॉर्म पर नहीं आने देते। लेकिन ये किसी दूसरे लिंक के साथ भी आपके फोन या कम्प्यूटर पर आ सकता है इसलिए इससे सावधान रहना जरूरी है। रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता इंटरनेट पर इस गेम को सर्च करने में सबसे आगे है। इस तरह की घटनाएं समाज के लिए एक बहुत बड़ा सांस्कृतिक खतरा हैं। यह स्पष्ट है कि हिंसा की उत्पत्ति प्रौद्योगिकी का परिणाम है और आज के दौर में हिंसा/आक्रामकता को मनोरंजन का एक अनिवार्य अंग मान लिया गया है। यहां यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि प्रौद्यगिकी ‘विकास के लिए’ है या ‘विनाश के लिए’?
ग्लोबल गेम्स मार्केट की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में वीडियो गेम का बाजार 110 अरब डॉलर का है। पिछले साल की तुलना में यह आंकड़ा लगभग आठ प्रतिशत ज्यादा है। दुनिया में 2.2 अरब लोग इंटरनेट गेम्स खेलते हैं, जिसमें एशिया की हिस्सेदारी 47 प्रतिशत से ज्यादा है। अकेले चीन में ही गेमिंग का बाजार 27 अरब डॉलर से ज्यादा का है। भारत में भी तेजी से बढ़ती स्मार्टफोन की तादाद मोबाइल फोन पर वीडियो गेम्स खेलने वालों की संख्या बढ़ा रही है। साल 2015 में मोबाइल गेमर्स की संख्या 19.8 करोड़ थी। उम्मीद जताई जा रही है कि 2020 तक यह आंकड़ा 62 करोड़ को पार कर जाएगा। भारतीयों में स्मार्टफोन धारकों की बड़ी संख्या युवाओं की है। इसलिए जरूरी है कि बच्चों के हाथ में फोन देने से पहले हम उन्हें उसके नुकसान भी बताएं। ब्लू व्हेल गेम से बचाव से ही खतरे को टाला जा सकता है।

  • Related Posts

    पंजाबी समाज की एकता, विरासत और नई पीढ़ी के भविष्य को लेकर नोएडा में बड़ा आयोजन

    सामाजिक एकता, संस्कृति और विरासत को मजबूत करने का लिया जाएगा संकल्प, जनप्रतिनिधियों समेत समाज के कई दिग्गज होंगे शामिल नोएडा। पंजाबी समाज की एकता, सामाजिक शक्ति, सांस्कृतिक विरासत और…

    फेलिक्स हॉस्पिटल और नोएडा लोक मंच के सहयोग से लगा मेगा स्वास्थ्य शिविर, सैकड़ों लोगों ने कराया नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण

    नोएडा। लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और जरूरतमंदों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से रविवार को सेक्टर-12 स्थित नोएडा लोकमंच दवा बैंक एवं फ्री हेल्थ सेंटर…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    पंजाबी समाज की एकता, विरासत और नई पीढ़ी के भविष्य को लेकर नोएडा में बड़ा आयोजन

    • By admin
    • August 11, 2026
    • 5 views
    पंजाबी समाज की एकता, विरासत और नई पीढ़ी के भविष्य को लेकर नोएडा में बड़ा आयोजन

    फेलिक्स हॉस्पिटल और नोएडा लोक मंच के सहयोग से लगा मेगा स्वास्थ्य शिविर, सैकड़ों लोगों ने कराया नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण

    • By admin
    • August 9, 2026
    • 18 views
    फेलिक्स हॉस्पिटल और नोएडा लोक मंच के सहयोग से लगा मेगा स्वास्थ्य शिविर, सैकड़ों लोगों ने कराया नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण

    नोएडा पंजाबी एकता समिति की मासिक बैठक संपन्न, पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र मेहता का इस्तीफा स्वीकार; वार्षिक कार्यक्रमों और समाजसेवा के विस्तार पर मंथन

    • By admin
    • August 9, 2026
    • 41 views
    नोएडा पंजाबी एकता समिति की मासिक बैठक संपन्न, पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र मेहता का इस्तीफा स्वीकार; वार्षिक कार्यक्रमों और समाजसेवा के विस्तार पर मंथन

    श्रावण में शैलेन्द्र शर्मा उर्फ शालू पंडित के रात्रि भोज में जुटीं कई दिग्गज हस्तियां

    • By admin
    • August 9, 2026
    • 21 views
    श्रावण में शैलेन्द्र शर्मा उर्फ शालू पंडित के रात्रि भोज में जुटीं कई दिग्गज हस्तियां

    जलवायु संरक्षण में राष्ट्रीय पहचान: वाईएसएस फाउंडेशन के निदेशक सचिन गुप्ता को मिला ‘राष्ट्रीय जलवायु नेतृत्व सम्मान 2026’

    • By admin
    • August 8, 2026
    • 8 views
    जलवायु संरक्षण में राष्ट्रीय पहचान: वाईएसएस फाउंडेशन के निदेशक सचिन गुप्ता को मिला ‘राष्ट्रीय जलवायु नेतृत्व सम्मान 2026’

    सिर्फ ₹30 में 24 घंटे ऑनलाइन डॉक्टर की सलाह, नोएडा लोक मंच ने शुरू की नई हेल्थ सर्विस

    • By admin
    • August 7, 2026
    • 26 views
    सिर्फ ₹30 में 24 घंटे ऑनलाइन डॉक्टर की सलाह, नोएडा लोक मंच ने शुरू की नई हेल्थ सर्विस