रामपुर। शहीदान-ए-करबला के चेहलुम के मौके पर रामपुर का ऐतिहासिक जुलूस-ए-अलम मुबारक पूरे एहतराम, अकीदत और अज़मत के साथ बरामद हुआ। हजारों अज़ादारों की मौजूदगी में निकले इस जुलूस ने शहर को ग़म-ए-हुसैन (अ.स.) के रंग में रंग दिया। जगह-जगह नौहाख्वानी, सीनाज़नी और इमाम हुसैन (अ.स.) की याद में मातम का सिलसिला चलता रहा, जबकि “या हुसैन” की सदाओं से पूरा माहौल गूंज उठा।
जुलूस की शुरुआत मकबरा जनाब-ए-आलिया और इमामबाड़ा मोहम्मद ज़फर अली बेग (लाल क़ब्र) से हुई। इसके बाद जुलूस मोती मस्जिद, राजद्वारा, नवाब गेट, स्टार चौराहा होते हुए इमामबाड़ा कोठी खास बाग पहुंचा। यहां से ज़रीह-ए-इमाम हुसैन (अ.स.) और इमामबाड़ा मंझले साहब की मुकद्दस ज़रीह भी जुलूस में शामिल हुईं। इस रूहानी मंज़र ने अज़ादारों के जज़्बात को और भी गहरा कर दिया।
सोगवार माहौल में नौहाख्वानी और सीनाज़नी करते हुए जुलूस सीआरपी कैंपस से गुजरकर करबला आगापुर पहुंचा। यहां बड़ी संख्या में अज़ादारों ने पारंपरिक मातम कर शहीदान-ए-करबला की बारगाह में अपनी अकीदत पेश की। पूरे क्षेत्र में “या हुसैन” की सदाएं गूंजती रहीं और ग़म-ए-हुसैन का माहौल देखने को मिला।
जुलूस के समापन के बाद अंजुमन सिपाह-ए-हुसैनी, रामपुर की ओर से परंपरा को कायम रखते हुए 30वीं मजलिस-ए-चेहलुम (शोहदा-ए-करबला) का आयोजन किया गया। मजलिस को संबोधित करते हुए अजमेर (राजस्थान) से तशरीफ लाए मौलाना सैयद गुलज़ार हुसैन जाफरी ने करबला के पैगाम, सब्र, कुर्बानी और हक़ की राह में डटे रहने की अहमियत पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफादार साथियों की कुर्बानियां इंसानियत के लिए हमेशा मशाल-ए-राह रहेंगी।
मजलिस के बाद अंजुमन सिपाह-ए-हुसैनी की ओर से शबीह-ए-ताबूत (18 बनी हाशिम अ.स.) बरामद किए गए। ताबूतों का मंज़र देखते ही अज़ादारों की आंखें नम हो गईं और पूरा माहौल ग़म और अकीदत से भर उठा। इस भावपूर्ण दृश्य की मंजरकशी मशहूर शायर शहज़ादा गुलरेज़ ने अपने असरदार अंदाज़ में पेश की।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में मशहूर नौहाख्वां राशिद हिलाल और उनके हमनवा ने अलविदाई नौहा पेश किया। उनके दर्दभरे कलाम ने मौजूद अज़ादारों को भावुक कर दिया और हर आंख अश्कबार हो गई।
मजलिस में हसीन अफ़ज़ल ज़ैदी, मौलाना मूसा रज़ा, नसीम मियां ज़ैदी, असद अब्बास, शाहिद ज़ैदी, कायम मेहदी, शान ज़ैदी, इब्ने अली शानू, शावेज़ ज़ैदी, नासिर हुसैन नक़वी, बाबर ज़ैदी, ज़फर अब्बास, हुमायूं ज़ैदी, हसीन मियां, मोहम्मद अली, अली हैदर, प्रिंस ज़ैदी, बाबर रिज़वी, जॉन ज़ैदी, तस्लीम मियां, वसीम ज़ैदी, बिट्टन ज़ैदी, ज़मा ज़ैदी, सैफी नदीम ज़ैदी, मून ज़ैदी और ज़ैन ज़ैदी सहित बड़ी संख्या में मोमिनीन और अज़ादार शामिल हुए।
करबला आगापुर में मोमिनीन की ओर से अज़ादारों के लिए लंगर, पानी, चाय और शरबत की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई, जिसकी सभी ने सराहना की। पूरे आयोजन के दौरान अकीदत, इख़्लास, भाईचारे और ग़म-ए-हुसैन (अ.स.) का माहौल बना रहा। चेहलुम के इस ऐतिहासिक आयोजन ने एक बार फिर करबला के संदेश—सत्य, न्याय, सब्र और कुर्बानी—को जीवंत करते हुए समाज में इंसानियत और आपसी सौहार्द का संदेश दिया।






