नोएडा, नटराजांजलि डांस अकादमी का वार्षिक समारोह इंडस वैली पब्लिक स्कूल, नोएडा के आकृति ऑडिटोरियम में भव्यता, कला और भारतीय शास्त्रीय परंपरा के अद्भुत संगम के साथ संपन्न हुआ। भरतनाट्यम की मनोहारी प्रस्तुतियों, भावपूर्ण अभिनय और आध्यात्मिक संदेश से सजी इस सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया।
कार्यक्रम में अकादमी के विद्यार्थियों ने भरतनाट्यम की विभिन्न प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा, अनुशासन और वर्षों की साधना का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। मंच पर विद्यार्थियों की भाव-भंगिमाओं, लय, ताल और नृत्य की शास्त्रीय बारीकियों ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। पूरे कार्यक्रम के दौरान ऑडिटोरियम भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय कला की गरिमा से सराबोर नजर आया।
नटराजांजलि डांस अकादमी की संस्थापक एवं गुरु श्रीमती इप्शिता भट्टाचार्य के मार्गदर्शन में संस्था पिछले 12 वर्षों से अधिक समय से नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में भरतनाट्यम के प्रचार-प्रसार और प्रशिक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही है। अकादमी में विभिन्न आयु वर्ग के विद्यार्थियों को भरतनाट्यम की विधिवत शिक्षा दी जाती है। संस्था का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को नृत्य सिखाना नहीं, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, परंपरा, अनुशासन और आध्यात्मिक भावबोध से भी जोड़ना है।
समारोह का मुख्य आकर्षण नृत्य-नाटिका ‘द पपेट मास्टर’ रही। इस विशेष प्रस्तुति के माध्यम से मानव जीवन में विभिन्न भावनाओं और मानसिक अवस्थाओं के प्रभाव को बेहद कलात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया। नृत्य और अभिनय के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया गया कि किस प्रकार मनुष्य कभी अपनी भावनाओं, इच्छाओं और मोह-माया के नियंत्रण में आ जाता है और जीवन के वास्तविक उद्देश्य से दूर होता चला जाता है।
‘द पपेट मास्टर’ की प्रस्तुति केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें एक गहरा आध्यात्मिक संदेश भी देखने को मिला। नृत्य-नाटिका ने मनुष्य की उस आंतरिक यात्रा को दर्शाया, जिसमें वह धीरे-धीरे आत्मबोध और ज्ञान की ओर बढ़ता है और अंततः परमात्मा से जुड़ने की दिशा में अग्रसर होता है। विद्यार्थियों ने नृत्य, अभिनय, भावाभिव्यक्ति और संगीत के माध्यम से इस विचार को मंच पर प्रभावशाली ढंग से जीवंत किया।

कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों को काफी सराहा। विशेष रूप से ‘द पपेट मास्टर’ ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया और प्रस्तुति के आध्यात्मिक संदेश ने कार्यक्रम को एक अलग आयाम प्रदान किया। मंच पर विद्यार्थियों की सामूहिक प्रस्तुति में उनकी मेहनत, गुरु के प्रति समर्पण और शास्त्रीय नृत्य के प्रति लगाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
समारोह में कई प्रतिष्ठित अतिथियों और कला एवं संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े गुरुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने वालों में श्रीमती विमला बाथम, भारतीय व्यवसायी, पूर्व भाजपा विधायक एवं वर्तमान अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग शामिल रहीं। उनके साथ गुरु श्री आर.वी. त्यागराजन एवं श्रीमती राजेश्वरी त्यागराजन, संस्थापक निदेशक, थ्यागराजा सेंटर फॉर म्यूजिक एंड डांस, नोएडा; गुरु सदानंद बिस्वास, संस्थापक एवं महासचिव, कथक धरोहर (NGO); गुरु संगीता कुलश्रेष्ठ, संस्थापक निदेशक, नृत्यांजलि इंस्टीट्यूट ऑफ भरतनाट्यम, नोएडा; तथा गुरु श्रीमती सुमिता दत्ता रॉय एवं श्री संदीप रॉय, संस्थापक एवं निदेशक, श्रीनृत्यांजलि – ए सेंटर ऑफ ग्लोबल इंडियन आर्ट एंड कल्चर (Regd.) भी मौजूद रहे।
सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए नटराजांजलि डांस अकादमी की संस्थापक एवं गुरु श्रीमती इप्शिता भट्टाचार्य को बधाई दी। अतिथियों ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य केवल एक कला नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसी संस्थाएं नई पीढ़ी को इस समृद्ध परंपरा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
समारोह के दौरान यह संदेश भी उभरकर सामने आया कि भारतीय शास्त्रीय कलाओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं। आधुनिक दौर में जहां युवा विभिन्न डिजिटल माध्यमों और आधुनिक मनोरंजन की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, वहीं शास्त्रीय नृत्य जैसी परंपराओं से उनका जुड़ाव भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
नटराजांजलि डांस अकादमी की 12 वर्षों से अधिक की यात्रा इसी दिशा में एक निरंतर प्रयास के रूप में सामने आती है। अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विद्यार्थी न केवल मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य की तकनीक, भाव, अनुशासन और परंपरा को भी सीख रहे हैं।
गुरु और शिष्य की परंपरा भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक रही है। इस समारोह में भी गुरु श्रीमती इप्शिता भट्टाचार्य के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने इस परंपरा की झलक दिखाई। विद्यार्थियों की प्रस्तुति में तालमेल, भावाभिव्यक्ति और मंच अनुशासन उनकी नियमित साधना और प्रशिक्षण को दर्शा रहे थे।
समारोह का समापन कला, संस्कृति, साधना और आध्यात्मिकता के सुंदर समन्वय के साथ हुआ। कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित किया कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य आज भी दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने और सामाजिक एवं आध्यात्मिक संदेशों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता रखता है।
नटराजांजलि डांस अकादमी का यह वार्षिक समारोह विद्यार्थियों के लिए अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच होने के साथ-साथ भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी बना। ‘द पपेट मास्टर’ जैसी प्रस्तुति ने कला के माध्यम से आत्मबोध, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देते हुए कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
कुल मिलाकर, नटराजांजलि डांस अकादमी का वार्षिक समारोह भरतनाट्यम की शास्त्रीय गरिमा, विद्यार्थियों की साधना और भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा का शानदार उत्सव बनकर सामने आया। कार्यक्रम में कला के साथ आध्यात्मिकता का जो समन्वय देखने को मिला, उसने दर्शकों को न केवल मंत्रमुग्ध किया, बल्कि उन्हें आत्मचिंतन का अवसर भी दिया।





