Eros Times: एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी लाॅ स्कूल, एमिटी स्कूल ऑफ इंजिनियरिंग एंड टेक्नोलाॅजी और एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ ऑरगेनिक एग्रीकल्चर द्वारा ‘‘ राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम’’ पर परिचर्चा सत्र का आयोजन आई टू ब्लाक सभागार, एमिटी परिसर में किया गया। इस परिचर्चा सत्र में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टीस राजेश टंडन, दिल्ली उच्च न्यायालय बार कोर्ट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एडवोकेट जतन सिंह, बिहार के नरकटियागंज से विधायक श्रीमती रश्मी वर्मा, दिल्ली विश्वविद्यालय के जेएमसी की हिंदी विभाग प्रमुख डा अमिता तिवारी, सर्वोच्च न्यायालय के एडवोकेट अभिनव देशवाल और एमिटी लाॅ स्कूल के चेयरमैन डा डी के बंद्योपाध्याय ने अपने विचार रखे। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टीस राजेश टंडन ने कहा कि 1950 में लागू किये संविधान में संविधान निर्माता बाबासाहेब अम्बेडकर जी ने देश की अखंडता और प्रभुता को अक्षुण्ण रखने के लिए महत्वपूर्ण बिंदु रखे थे

जिसमें आर्टिकल 51 ए के अंर्तगत स्वतंत्रता हेतु हमारे राष्ट्रीय संघर्ष को प्रेरित करने वाले आदर्शो को संजोना व उनका पालन करना और अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए उसकी रक्षा करना है। आप युवाओं का कर्तव्य बनता है कि देश का विकास करने और उसे आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग करें। दिल्ली उच्च न्यायालय बार कोर्ट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एडवोकेट जतन सिंह ने कहा कि आज हम देश की आजादी का उत्सव मना रहे है लेकिन इस आजादी को दिलाने वाले नायकांे के प्रति हमें सदैव कृतज्ञ रहना चाहिए। उन्होनें कहा कि 1857 के गदर के साथ प्रारंभ हुई इस लड़ाई में लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और ना जाने कितनों ने अपना सर्वस्व न्यौछाावर कर दिया जिसके बाद हमेंआजादी मिली। युवाओं को सदैव उनके बलिदानों को याद करते हुए उनके दिखाये गये मार्ग पर चलना चाहिए।बिहार के नरकटियागंज से विधायक श्रीमती रश्मी वर्मा ने कहा कि आजादी की जब जब बात चली है तब तब बिहार के चंपारण का भी अवश्यक ज्रिक हुआ। चंपारण और यहां के लोगों ने स्वंतत्रता के होम में आहूति दी है। महान स्वंतत्रता सेनानियों की बदौलत आज हम यह उत्सव मना पा रहे है हमें सदैव उनके दिखाये गये पथ पर निर्भिक होकर आगे ब-सजय़ना चाहिए।दिल्ली विश्वविद्यालय के जेएमसी काॅलेज की हिंदी विभाग प्रमुख डा अमिता तिवारी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण है। स्वाधीनता आंदोलन में महिलाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसमें रानी लक्ष्मीबाई, -हजयलकारी बाई, सुचेता कृपलानी और दुर्गा भाभी सहित जाने कितनी ही महिलाओं ने आजादी के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे ब-सजय़ी।

उन्होनें छात्रों से कहा कि स्वंतत्रता संग्राम में हिस्सा लेने वाले के विचारो की सार्थकता तभी है जब उसे हम अपने आचरण में सजयाले। सर्वोच्च न्यायालय के एडवोकेट अभिनव देशवाल ने कहा कि हम आजाद देश में पैदा हुये है इसलिए इसके लिए दी गई कुर्बानी को नही सम-हजय पायेगें। हमें सभी स्वंतत्रता सेनानीयों के ऋणी रहेगें और इस प्रकार के कार्यक्रमों से उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते है। एमिटी लाॅ स्कूल के चेयरमैन डा डी के बंद्योपाध्याय ने अतिथियांे का स्वागत करते हुए कहा कि हजारों लाखों की संख्या में बलिदानियों ने अपने जीवन का उत्सर्ग किया तब जाकर हमें यह आजादी मिली है। अब आप युवाओं की जिम्मेदारी बनती है कि आप राष्ट्र निर्माण मे योगदान दे और आजादी को बरकरार रखे। हमारा देश
कभी सोने की चिडियां कहा जाता था, हमें आज संकल्प लेना है इसे फिर से सोने की चिड़िया बनायेगे।इस अवसर पर एमिटी स्कूल ऑफ इंजिनियरिंग एंड टेक्नोलाॅजी के निदेशक डा मनोज पांडेय, एमिटी लाॅ स्कूल के संयुक्त प्रमुख डाआदित्य तोमर, डा शेफाली रायजादा और डा अरविंद पी भानू ने अपने विचार रखे।






