नई दिल्ली, 1 अगस्त 2026। राजधानी दिल्ली की अदबी फिज़ाओं में शुक्रवार की शाम शायरी, ग़ज़लों और साहित्य के नाम रही। जनता की खोज मीडिया ग्रुप, फनकार कल्चर ग्रुप और अखिल भारतीय उर्दू-हिन्दी एकता अंजुमन के संयुक्त तत्वावधान में निर्माण विहार स्थित एस.एस.एस. स्टूडियो में “एक शाम असर देहलवी असर के नाम” शीर्षक से भव्य ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन मेरठ के प्रसिद्ध शायर असर देहलवी असर के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में किया गया, जिसमें देशभर से आए नामचीन शायरों, कवियों और साहित्य प्रेमियों ने हिस्सा लिया।
इस अवसर पर शायरी की महफ़िल के साथ-साथ असर देहलवी की ग़ज़लों के संग्रह “आग़ाज़” का विधिवत विमोचन भी किया गया। पुस्तक विमोचन के दौरान साहित्यकारों ने असर देहलवी की रचनाओं को उर्दू अदब की एक महत्वपूर्ण धरोहर बताते हुए उनकी साहित्यिक सेवाओं को याद किया।
मुशायरे की सदारत देश के वरिष्ठ शायर जनाब खुर्रम नूर ने की, जबकि कार्यक्रम के संयोजक एहतराम सिद्दीकी ने सभी मेहमानों और शायरों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन उर्दू और हिन्दी साहित्य के बीच आपसी भाईचारे, मोहब्बत और गंगा-जमुनी तहज़ीब को मजबूत करने का एक छोटा-सा प्रयास है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में खुमार देहलवी मौजूद रहे। वहीं मेहमान-ए-ज़ी-वकार डॉ. वसीम राशिद, विशिष्ट अतिथि साहित्य चंचल साधक तथा किरण सिंह ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। मुशायरे की निज़ामत अखिल भारतीय उर्दू-हिन्दी एकता अंजुमन के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध शायर असलम बेताब ने अपने ख़ास अंदाज़ में की, जिसकी श्रोताओं ने खूब सराहना की।
मुशायरे में देशभर से आए शायरों ने अपने बेहतरीन कलाम पेश कर देर रात तक समां बांधे रखा। मंच पर खुमार देहलवी, फहीम, सरफराज देहलवी, ताबिश खैराबादी, हाशिम देहलवी, सैयद गुफरान, अशोक साहिब, अनस फैज़ी, आरिफ देहलवी, दर्द देहलवी, हश्मत भारद्वाज, वफ़ा आज़मी, नुरुज़ ज़मा शादान हसन, पवन तोमर, सुरेश चौरसिया, जावेद अब्बासी, अरसान, गोल्डी ‘ग़ज़ब’, सुरेंदर सिफ़र और रंजन शर्मा सहित अनेक शायरों ने अपनी ग़ज़लों और नज़्मों से श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।
महिला शायराओं की प्रस्तुतियों ने भी महफ़िल में चार चाँद लगा दिए। किरण सिंह, हुमा देहलवी, सबीना सरताज, अनिका एम और रोज़ी खान ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुशायरे के दौरान कई अशआर पर लगातार तालियों की गूंज सुनाई दी। असलम बेताब का शेर—
“ख़्वाबों की जागीर के आगे बैठ गए,
हम तेरी तस्वीर के आगे बैठ गए।”
वहीं असर देहलवी असर का यह शेर—
“तंग बस्ती से तुम निकल आओ,
इससे पहले कि शाम हो जाए।”
ने श्रोताओं का दिल जीत लिया। एहतराम सिद्दीकी, जावेद अब्बासी और आरिफ देहलवी के कलाम को भी भरपूर सराहना मिली।
कार्यक्रम के अंत में आयोजक एहतराम सिद्दीकी ने कहा कि यह मुशायरा केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि उर्दू और हिन्दी भाषाओं के साझा सांस्कृतिक रिश्ते का उत्सव है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने और देश की साझा विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है। देर रात तक चले इस मुशायरे में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों ने भाग लेकर आयोजन को सफल बनाया।






