नोएडा। नोएडा में बिजली व्यवस्था को लेकर लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। इसी बीच आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय (दीपक शर्मा) ने यूपी पावर कॉरपोरेशन की नई कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विभाग की केंद्रीकरण (सेंट्रलाइजेशन) की नीति और कर्मचारियों की भारी कमी के कारण बिजली व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि नोएडा देश के सबसे बड़े औद्योगिक और हाई-टेक शहरों में से एक है। यहां बड़ी संख्या में उद्योग, आईटी कंपनियां, बहुमंजिला सोसायटियां और लाखों उपभोक्ता हैं। इसके बावजूद पूरे शहर के 108 बिजली उपकेंद्रों (सबस्टेशनों) की निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी केवल दो एक्सियन (XEN) को सौंप दी गई है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी केवल दो अधिकारियों के भरोसे छोड़ना व्यवहारिक नहीं है।
उन्होंने बताया कि पहले बिजली विभाग में विकेंद्रीकृत व्यवस्था लागू थी। उस समय जेई, एसडीओ और एक्सियन अपने-अपने क्षेत्र में मिलकर काम करते थे और स्थानीय स्तर पर बिजली से जुड़ी समस्याओं का जल्द समाधान हो जाता था। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद अधिकांश निर्णय और सेवाएं कुछ चुनिंदा कार्यालयों तक सीमित कर दी गई हैं, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
दिव्य कृष्णात्रेय के अनुसार, यदि किसी उपभोक्ता के बिजली बिल में गलती हो जाए तो उसे सुधारने के लिए पूरे नोएडा में केवल एक ही कार्यालय बनाया गया है, जो सेक्टर-18 में स्थित है। इसी तरह मीटर से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए भी लोगों को सेक्टर-18 स्थित कार्यालय जाना पड़ता है। वहीं नया बिजली कनेक्शन लेने के लिए उपभोक्ताओं को सेक्टर-16 या सेक्टर-20 के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि करोड़ों की आबादी वाले और तेजी से विकसित हो रहे नोएडा में इस तरह की व्यवस्था लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। छोटे-छोटे कामों के लिए नागरिकों को कई किलोमीटर दूर जाकर घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ता है, जबकि पहले स्थानीय स्तर पर ही अधिकांश समस्याओं का समाधान हो जाता था।
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष का कहना है कि बिजली विभाग पहले से ही कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। स्वीकृत पदों के मुकाबले विभाग में पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में मौजूदा कर्मचारियों और अधिकारियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा असर बिजली आपूर्ति, मेंटेनेंस और फॉल्ट ठीक करने की गति पर पड़ रहा है।
उन्होंने दावा किया कि इसी अव्यवस्था का असर रविवार को पूरे नोएडा में देखने को मिला, जब कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित रही और लोगों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा में किसी भी तरह की लापरवाही आम लोगों के साथ-साथ उद्योगों और व्यापार पर भी असर डालती है।
दिव्य कृष्णात्रेय ने यूपी सरकार और यूपी पावर कॉरपोरेशन से मांग की है कि नई केंद्रीकृत व्यवस्था की समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि विभाग में खाली पदों को जल्द भरा जाए, फील्ड स्टाफ की संख्या बढ़ाई जाए और पहले की तरह स्थानीय स्तर पर समस्याओं के समाधान की व्यवस्था फिर से लागू की जाए, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते बिजली विभाग की व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में नोएडा के लोगों को और अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने जनहित में बिजली सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की है।






