नोएडा, 21 जून। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने किसानों की आशंकाओं और चिंताओं को सार्वजनिक करते हुए केंद्र सरकार से कृषि क्षेत्र के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। रविवार को सेक्टर-29 स्थित नोएडा मीडिया क्लब में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान भाकियू नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक पत्र जारी किया, जिसमें व्यापार समझौते से जुड़े संभावित प्रभावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
प्रेसवार्ता में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत और राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से संबंधित विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और सार्वजनिक सूचनाओं के आधार पर किसानों में असमंजस और चिंता का माहौल है। उनका कहना था कि यदि समझौते के तहत कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी की जाती है और अमेरिकी कृषि एवं खाद्य उत्पादों के लिए भारतीय बाजार को अधिक खोला जाता है, तो इसका सीधा असर देश के किसानों की आय और आजीविका पर पड़ेगा।
चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि अमेरिका अपने किसानों को भारी मात्रा में कृषि सब्सिडी उपलब्ध कराता है, जबकि भारतीय किसान सीमित संसाधनों और बढ़ती लागत के बीच खेती करने को मजबूर हैं। ऐसी स्थिति में अमेरिकी सब्सिडी प्राप्त कृषि उत्पादों के साथ भारतीय किसानों को प्रतिस्पर्धा करने के लिए मजबूर करना न्यायसंगत नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि बड़े पैमाने पर सस्ते अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में प्रवेश करते हैं तो देश के किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने में कठिनाई होगी।
उन्होंने विशेष रूप से डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में आयात बढ़ने से लाखों पशुपालकों, छोटे किसानों और ग्रामीण परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। भाकियू नेताओं का मानना है कि कृषि केवल आर्थिक गतिविधि नहीं बल्कि करोड़ों भारतीय परिवारों के जीवन और रोजगार का आधार है, इसलिए किसी भी व्यापारिक समझौते में किसानों के हित सर्वोपरि होने चाहिए।
प्रेसवार्ता के दौरान राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मंच पर अमेरिका लंबे समय से भारत की एमएसपी व्यवस्था पर सवाल उठाता रहा है। ऐसे में किसानों को आशंका है कि व्यापार वार्ताओं के दौरान एमएसपी से संबंधित किसी प्रकार का दबाव भारत पर बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर एमएसपी व्यवस्था को कमजोर करने या उसमें बदलाव करने की कोशिश की गई तो इसका प्रतिकूल प्रभाव करोड़ों धान और गेहूं उत्पादक किसानों पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से स्पष्ट रूप से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि एमएसपी व्यवस्था को किसी भी प्रकार से प्रभावित न होने दिया जाए।
भाकियू नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं के दौरान किसानों, मछुआरों, डेयरी उत्पादकों, पोल्ट्री क्षेत्र से जुड़े लोगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए जिससे देश की कृषि व्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और किसानों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।
चौधरी राकेश टिकैत और चौधरी युद्धवीर सिंह ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन हमेशा किसानों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रही है और आगे भी किसानों की आवाज को सरकार तक पहुंचाने का काम करती रहेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार किसानों की चिंताओं को गंभीरता से लेगी और व्यापार समझौते से जुड़े सभी निर्णयों में कृषि क्षेत्र के हितों को प्राथमिकता देगी।
प्रेसवार्ता में सुभाष चौधरी, परविन्दर अवाना, रविन्द्र भगत, अनिल अवाना, महेश खटाना, सुधीर भाटी, विकास गुर्जर, संदीप अवाना, प्रमोद टाइगर, राजा चौधरी, प्रशांत चौधरी, लक्की पांडे, अमित अवाना, नरेन्द्र भाटी, नितिराज बैसोया, धीरज भाटी, आजाद चौधरी, समीर चौधरी और तसलीम चौधरी सहित भारतीय किसान यूनियन के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।





