शिक्षकों के सम्मान समारोह में सीएम केजरीवाल ने कहा, हमारा सपना है कि देश की शिक्षा व्यवस्था इतनी बेहतरीन कर दें कि दुनिया भर के बच्चे भारत पढ़ने आए
पहले नालंदा विश्वविद्यालय में दुनिया भर के स्टूडेंट्स पढ़ने आते थे, अंग्रेजों ने आकर सब तहस-नहस कर दिया
आज यूक्रेन जैसे छोटे से देश में भारत के बच्चे मेडिकल की पढ़ाई करने जाते हैं
जब हमारी सरकार बनी थी, तब हमारा लक्ष्य था कि सरकारी स्कूलों को ठीक करना है, हमने 25 फीसद शिक्षा बजट कर दिया
पहले सरकारी स्कूलों के टीचर्स के बारे में ग़लत धारणा थी, आज वही 60 हजार टीचर्स ने शिक्षा क्रांति लाकर दिखा दिया
दिल्ली के सरकारी स्कूलों से 1300 बच्चों ने जेईई और नीट क्लीयर किया, इसके लिए सबने अपने टीचर की तारीफ की
अगर शिक्षा बच्चों को रोजगार पाने के लिए तैयार न कर पाए, तो बेकार है
हमने सरकारी स्कूलों में 12वीं में बिजनेस ब्लॉस्टर्स प्रोग्राम शुरू किया है और इसके नतीजे बहुत अच्छे हैं
प्राइवेट स्कूल भी बिजनेस ब्लॉस्टर्स प्रोग्राम शुरू करके देखें, ये बच्चों को नौकरी की बजाय बिजनेस के लिए प्रेरित करता है
Eros Times: अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने शिक्षा को हमेशा से प्राथमिकता दी है हमारा देश दुनिया में नंबर-1 तभी बनेगा, जब हम हर तबके के बच्चे को विश्वस्तरीय शिक्षा देंगे त्यागराज स्टेडियम में सीएम अरविंद केजरीवाल ने शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार से किया सम्मानित एमसीडी के 14, प्राइवेट के 13, एनडीएमसी स्कूल के एक शिक्षक व एक प्रिंसिपल को किया गया सम्मानित शिक्षक दिवस के अवसर पर सीएम अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के 123 शिक्षकों राज्य शिक्षक पुरस्कार 2023 से सम्मानित किया। 14 कटेगरी में इन शिक्षकों सर्टिफिकेट, 25 हजार रुपए, पदक और शॉल देकर सम्मानित किया गया। त्यागराज स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमारा सपना है कि देश की शिक्षा व्यवस्था को इतना अच्छा कर देंगे कि दुनिया भर के बच्चे भारत में पढ़ने आएंगे। पहले नालंदा विश्वविद्यालय में दुनिया भर के स्टूडेंट्स पढ़ने आते थे, लेकिन अंग्रेजों ने आकर शिक्षा व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया। आज यूक्रेन जैसे छोटे से देश में हमारे देश के बच्चे मेडिकल की पढ़ाई करने जाते हैं। जबकि हमारा देश सदियों तक शिक्षा का केंद्र रहा है। हमें भारत को दोबारा शिक्षा का केंद्र बनाना है। इस अवसर शिक्षा मंत्री आतिशी समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
हमारी संस्कृति में शिक्षक को भगवान से भी ऊपर का दर्जा दिया गया है

त्यागराज स्टेडियम के आयोजित शिक्षक दिवस समारोह में सीएम अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली समेत देश दुनिया के सभी शिक्षकों को बधाई दी। इस दौरान सीएम ने अपने-अपने फील्ड में अच्छा प्रदर्शन करने पर पुरस्कृत हुए टीचर्स और प्रींसिपल्स के काम की सराहना की और कहा कि हमारी संस्कृति में शिक्षक को भगवान से भी ऊपर का दर्जा दिया गया है। उन्होंने ने कहा कि जब दिल्ली में हमारी सरकार बनीं थी, तब हमारे मन में ये तो था कि स्कूलों को सही करना है और शिक्षा को अच्छा करना है। गरीबों के बच्चे सरकारी स्कूलों में जाते हैं, उनको अच्छी शिक्षा नहीं मिलती है, उसे भी ठीक करना है। उस समय हमारे पास राजनीतिक इच्छा शक्ति बहुत थी, लेकिन रास्ता साफ नहीं था। इसलिए सरकार में आने के बाद पहले साल में ही हमनें शिक्षा पर खूब पैसा खर्च लगा दिया। हम लोगों ने अपने बजट का 25 फीसद हिस्सा स्कूलो पर खर्च कर दिया।
पहले की सरकारों में शिक्षा अंतिम प्राथमिकता होती थी, हमने इसे पहली प्राथमिकता बना दी
सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि बजट का 25 फीसद हिस्सा खर्च करना तो आसान काम था। लेकिन जब हमारी सरकार बनीं थी, उस वक्त सरकारी स्कूलों के टीचरों को लेकर समाज में बहुत गलत धारणा बनी हुई थी कि सरकारी शिक्षक तो पढ़ाते नहीं है। आज यही दिल्ली के 60 हजार टीचर्स हैं, जिन्होंने सात साल में देश के अंदर क्रांति करके दिखा दी। ऐसा नहीं है कि हमने 60 हजार शिक्षकों को निकाल कर दूसरे टीचरों को रखा। हमने टीचर्स को सम्मान और इज्जत देना शुरु किया। इससे शिक्षकों को महसूस हुआ कि अब कोई सरकार आई है जो शिक्षा पर कुछ करना चाहती है। इससे पहले किसी भी सरकार के लिए सरकारी स्कूल अंतिम प्राथमिकता होती थी और हमने शिक्षा को पहली प्राथमिकता बना दी। जब सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल्स फिनलैंड, सिंगापुर जैसे देशों और आईआईएम में जाकर ट्रेनिंग करने लगे तो ये सभी लोग काफी उर्जा के साथ वापस आए। जब स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर का बदलने लगा तो इन्हीं टीचर्स ने कमाल करके दिखा दिया।
टीचर-बच्चों का रिश्ता बहुत पवित्र होता है, हम अपने टीचर्स को कभी नहीं भूलते हैं
सीएम अरविंद केजरीवाल ने अपने शिक्षकों को याद करते हुए कहा कि टीचर और स्टूडेंट्स का रिश्ता बिल्कुल अलग किस्म का होता है। इस साल दिल्ली सरकार के स्कूलों से लगभग 1300 बच्चों ने जेईई और नीट के इग्जाम क्लीयर किए। मैंने उन सभी बच्चों के माता पिता, टीचर्स और प्रिंसिपल्स से मुलाकात की और सभी बच्चों ने अपनी सफलता के पीछे अपने टीचरों का हाथ बताया। कई शिक्षकों ने इन बच्चों की आर्थिक रूप से भी मदद तक की। टीचर और बच्चों का रिश्ता काफी पवित्र होता है। हम अपने टीचर्स को कभी नहीं भूलते हैं।
अंग्रेजों के आने से पहले तक हमारा एक शानदार एजुकेशन सिस्टम हुआ करता था
सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि समाज वही आगे बढ़ता है, जिसमें सबसे ज्यादा रुतबा और इज्जत टीचर्स को दी जाती है। हमारे देश में काफी समय तक, हमारे समाज में सबसे ज्यादा इज्जत टीचर्स को दी जाती थी। अंग्रेजों के आने से पहले तक हमारा एक शानदार एजुकेशन सिस्टम हुआ करता था। गांव-गाव में स्कूल हुआ करता था, जिसमें हर तबके के बच्चे एक साथ पढ़ा करते थे। भारत में उस वक्त स्कूलों की संख्या इंग्लैण्ड से भी ज्यादा थी। 1830 में मैकाले ने आकर पूरा शिक्षा सिस्टम ही तहस-नहस कर दिया। नालंदा विश्वविद्यालय हमारे देश की शान हुआ करता था।, जहां पूरे एशिया से बच्चे पढ़ने आते थे। अभी रूस और यूक्रेन युद्ध में हमारे देश के काफी बच्चे वहां फंस गए थे। ये बच्चे मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए यूक्रेन गए थे। यह जानकर मुझे काफी तकलीफ हुई कि इंडिया जैसे महान देश के बच्चे यूक्रेन जैसे छोटे से देश में मेडिकल की पढ़ाई करने जा रहे हैं, जबकि पूरी दुनिया से बच्चे हमारे देश में आने चाहिए।
हमारा देश सदियों तक शिक्षा का केंद्र रहा है, अब हमें दोबारा इसे शिक्षा का केंद्र बनाना है

सीएम अरविंद केजरीवाल ने बताया कि जिस साल मैं आईआईटी में था, तो मेरे साथ के लगभग 80 से 90 प्रतिशत बच्चे अमेरिका पढ़ने चले गए। उन्होंने कहा कि मेरा सपना है कि हमारे देश का एजुकेशन सिस्टम इतना शानदार बनाया जाना चाहिए कि अमेरिका के बच्चे पढ़ने के लिए भारत आएं। हमारा देश सदियों तक शिक्षा का केंद्र रहा है। हमें भारत को दोबारा शिक्षा का केंद्र बनाना है। हमारा ये सपना तब पूरा होगा, जब दुनिया भर से बच्चे मेडिकल, इंजीनियरिंग और रिसर्च के लिए भारत आए। भारत में हमें दुनिया का नंबर शिक्षा का केंद्र तैयार करना है।
शिक्षा को जॉब ऑरिएंटेड कैसे बनाएं, अब हमें इस दिशा में सोचने की जरूरत है
अंत में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर शिक्षा हमें रोजगार के लिए तैयार न कर पाए तो उस शिक्षा का कोई फायदा नहीं है। फिर तो वह शिक्षा केवल रटने वाली हुई। अभी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में हमने 12वीं क्लास के लिए बिजनेस ब्लास्टर्स प्रोग्राम शुरु किया है। इसके काफी बेहतर नतीजे सामने आ रहे हैं। दिल्ली में अभी कई प्राइवेट व अन्य स्कूल हैं, जहां पर अभी ये प्रोग्राम नहीं चल रहा है। मेरी सभी स्कूलों से गुजारिश है कि ये स्कूल भी अपने यहां बिजनेस ब्लास्टर्स प्रोग्रम शुरू करके देंखे। यह प्रोग्राम बच्चों को नौकरी करने के बजाय बिजनेस करने के लिए प्रेरित करता है। अगर सभी लोग नौकरी ढूंढने लगेंगे तो इतनी नौकरी कहां से आएगी। हम सबको अब इस दिशा में सोचने की जरूरत है कि हम सब कैसे एजुकेशन को जॉब ऑरिएंटेड बनाएं।
हर एक बच्चे की जिंदगी में शिक्षक की बहुत बड़ी भूमिका होती है
इस अवसर पर मौजूद शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा कि हम शिक्षकों को साल में सिर्फ़ एक दिन नहीं, बल्कि 365 दिन सम्मान करते है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में हमने हमेशा से शिक्षा को प्राथमिकता दी है। एक बच्चे की ज़िन्दगी में टीचर की बहुत बड़ी भूमिका होती है। जब एक बच्चा 3-4 साल की उम्र में पहली बार स्कूल में आता है तो शिक्षक उसके लिए भगवान से कम नहीं होते है। जब हम छोटे बच्चे से बात करते है और उनसे उनसे पूछते हैं कि बड़े होकर क्या बनना चाहते हो, तब उनका एक ही उत्तर आता है कि शिक्षक बनना चाहते हैं। टीचर का इतना महत्व है कि जब बच्चा स्कूल से अपने घर आता है तो टीचर बनने कि एक्टिंग करता है।
पिछले 8 सालों में हमने हर बच्चे को बेहतरीन शिक्षा देने का प्रयास किया है और इसके नतीजे भी दिख रहे हैं
शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षक जब क्लास में इंग्लिश, मैथ, फिजिक्स पढ़ाने जाते हैं तो वे सिर्फ एक विषय नहीं पढ़ा रहे होते हैं, बल्कि उनके क्लास में देश का भविष्य बैठा हुआ है और वो देश का भविष्य हमारे देश को कैसे आगे लेकर जाएगा, ये सब चीज सिर्फ़ एक शिक्षक पर निर्भर करता हैे। हमारा देश आगे बढ़ें हम सबका सपना है लेकिन हमारा देश दुनिया में नंबर.1 तभी बनेगा, जब हम अपने देश के हर तबके के बच्चे को विश्वस्तरीय शिक्षा देंगे। पिछले 8 सालों में दिल्ली में हमने यही प्रयास किया है कि हर बच्चे को बेहतरीन शिक्षा दे सकें और इसके नतीजे भी देख रहे हैं कि पिछले कई सालों से सरकारी स्कूल के रिजल्ट प्राइवेट स्कूल से भी बेहतर आ रहे हैं।
हम दिल्ली सरकार के स्कूलों की तरह ही एमसीडी के स्कूलों को भी बदलने का प्रयास कर रहे हैं
शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा कि हमने अनेक राज्यों में देखा गया है कि माता पिता अपने बच्चों का सरकारी स्कूल से नाम कटवा कर प्राइवेट स्कूल में एडमिशन करवा देते हैं, लेकिन दिल्ली एक इकलौता राज्य है, जहां पिछले कुछ सालों में 4 लाख बच्चों ने प्राइवेट स्कूल से नाम कटवा कर सरकारी स्कूल में दाखिला लिया है। जबकि एक समय ऐसा था, जब प्राइवेट स्कूल में एडमिशन के लिए लोगों को सिफ़ारिश करनी पड़ती थीं, आज दिल्ली सरकार के स्कूल ऑफ़ स्पेशलाइज़ एक्सीलेंस में 4 हज़ार सीट के लिए 90 हजार फॉर्म आते हैं। मुझे ख़ुशी है कि दिल्ली के लोगों ने भी एमसीडी स्कूलों के बदलाव के लिए हमें मौक़ा दिया। हमारा प्रयास रहेगा कि जैसे हमने 8 सालों में दिल्ली के सरकारी स्कूलों को बदला है, वैसे ही एमसीडी स्कूलों को भी बदलेंगे।
अरविंद केजरीवाल ने शिक्षकों को किया सम्मानित

इस दौरान सीएम अरविंद केजरीवाल ने खुद कई शिक्षकों को सम्मानित किया। एमसीडी की असिस्टेंट टीचर नीतू, स्नेह लता, प्रिंसिपल सुजाता गुप्ता, असिस्टेंट टीचर प्रीति शर्मा, असिस्टेंट टीचर उमंग ढींगरा, उषा खत्री, असिस्टेंट टीचर साइमा खान, असिस्टेंट टीचर देवेंद्र, असिस्टेंट टीचर संगीता गुलाटी, असिस्टेंट टीचर बिजेंद्र यादव, असिस्टेंट टीचर निरुपमा शर्मा को सम्मानित किया। इसके अलावा, दिल्ली सरकार के स्कूल में तैनात लेक्चरार नरेश कुमार, लेक्चरार अंकित कुमार श्रीवास्तव, ईवीजीसी उपासना खत्री, लाइब्रेरियन विपिन यादव, मेंटर टीचर नील कमल मिश्रा, टीजीटी अदिति भसीन, पीजीटी रजिया सुल्ताना, टीजीटी भानु प्रताव अवस्थी, पीजीटी प्रवीण कुमार, पीईटी आशीष तोमर, पीईटी अंजली नेगी समेत अन्य शिक्षको को सम्मानित किया गया। इसके अलावा शिक्षा मंत्री ने कुछ शिक्षकों को पुरस्कृत किया।
शिक्षकों को 14 कटेगरी में किया गया पुरस्कृत
दिल्ली सरकार का शिक्षा विभाग हर साल शिक्षक दिवस के मौके पर 5 सितंबर को राज्य शिक्षक पुरस्कार का आयोजन करता है। इसी कड़ी में मंगलवार को दिल्ली सरकार की ओर से राज्य शिक्षक पुरस्कार 2023 का आयोजन किया गया। इस पुरस्कार को प्राप्त करने के लिए डीओई, एमसीडी, एनडीएमसी, सहायता प्राप्त और प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों व प्राचार्यों द्वारा ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। मंगलवार को टीचर-प्रिंसिपल समेत अन्य कटेगरी में 118 लोगों को पुरस्कृत किया गया। इसके अलावा पांच पुरस्कार एससीईआरटी व डीआईईटी के शिक्षकों व प्रशिक्षकों को भी मिला। इस तरह कुल 123 लोगों को सम्मानित किया गया। ये पुरस्कार एससीईआरटी, डीआईईटी सहित 14 कैटेगरीज़ में दिए गए। इस बार एमसीडी के 14, निजी स्कूलों के 13 और एनडीएमसी स्कूलों के एक शिक्षक व एक प्रिंसिपल को यह पुरस्कार मिला।
हर साल शिक्षक दिवस पर दो स्पेशल अवॉर्ड्स ‘फेस ऑफ डीओई’ दिए जाते हैं। इस बार इस अवॉर्ड से एसकेवी एंड्रयूज गंज की ड्राइंग टीचर सीमा तोमर और फीजिकल एजुकेशन टीचर शिशुपाल सिंह पुरस्कृत किया गया।
शिक्षा मंत्री ने स्पेशल अवॉर्ड्स से इन शिक्षकों को किया सम्मानित
राकेश कुमार
ये अंबेडकर स्कूल ऑफ स्पेशलाइज्ड एक्सीलेंस/स्कूल ऑफ एक्सीलेंस सेक्टर 17, रोहिणी के हेड हैं। इस साल इनके स्कूल से 8 बच्चों ने जेईई (एडवांस्ड) पेपर पास किया, जो किसी भी दिल्ली के सरकारी स्कूल में सबसे ज्यादा है। साथ ही, इनके स्कूल से 42 बच्चे नीट ेइग्जाम में क्वालीफाइड हुए हैं। इसके अलावा, इस स्कूल से अब तक 100 से अधिक बच्चों ने 175 किताबें पब्लिश की हैं।
इंदु बत्रा-
ये एमसीडी प्राइमरी स्कूल, एंड्रूज गंज में प्रिंसिपल हैं। यह सही मायनों में एक स्कूल की अच्छी लीडर साबित हुई हैं। इन्होंने अपने स्कूल को एक अच्छी दिशा और अपने बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने में कभी भी संसाधनों की कमी को रास्ते की रुकावट नहीं बनने दिया। इन्होंने गैर-सरकारी संगठनों की मदद से अपने स्कूल में 18 कंप्यूटर सिस्टम के साथ एक कंप्यूटर लैब स्थापित किया। इन्होंने अपने स्कूल का रखरखाव काफी अच्छे तरीके से किया है। यहां के टीचर्स पढ़ाई में हमेशा नए मेथड्स को अपनाने के लिए तैयार रहते हैं।
इस बार के प्रमुख आकर्षण
इस साल स्कूलों में बच्चों की ज्यादा से ज्यादा उपस्थिति को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। सत्र 2022-23 में सबसे ज्यादा औसत उपस्थिति दर्ज करने वाले स्कूलों की सराहना की जा रही है। इस साल गर्ल्स सेकेंडरी फेज तीन, मयूर विहार के सरकारी स्कूल ने सबसे अधिक 73 फीसद उपस्थिति दर्ज की, जिसके लिए इसकी विशेष रूप से सराहना की गई। अगले साल से बच्चों की उपस्थिति के लिए एक अलग केटेगरी में अवॉर्ड दिए जाएंगे।






