चार वर्ष से कम समय में खिलाड़ियों ने जीते 209 पदक, ‘सनराइज़ राइजिंग स्टार्स’ पहल से प्रतिभाओं को मिल रहा प्रशिक्षण और संसाधनों का सहारा
नोएडा। भारत में जमीनी स्तर पर बैडमिंटन को बढ़ावा देने और युवा खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने की दिशा में सनराइज़ शटलर्स बैडमिंटन अकादमी ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अकादमी ने चार वर्ष से भी कम समय में अपने खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के दम पर 209 पदक जीतकर अपनी मेहनत और प्रशिक्षण व्यवस्था का प्रभाव साबित किया है। इन पदकों में 14 अंतरराष्ट्रीय, 70 राष्ट्रीय और 125 राज्य स्तरीय पदक शामिल हैं।
सनराइज़ शटलर्स की इस उपलब्धि को भारत में बैडमिंटन के जमीनी स्तर पर विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अकादमी का उद्देश्य केवल खिलाड़ियों को खेल की तकनीक सिखाना ही नहीं, बल्कि उन्हें उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना और भविष्य के चैंपियन के रूप में विकसित करना है।
इस विशेष अवसर पर योनेक्स की प्रेसिडेंट एवं सीईओ सुश्री एलिसा योनेयामा, सनराइज़ स्पोर्ट्स इंडिया के प्रबंध निदेशक विक्रमादित्य धर, डायरेक्टर करण धर तथा नोएडा महानगर आरएसएस के डॉ. सुमित उपस्थित रहे। इन प्रमुख लोगों की मौजूदगी ने युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया और जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए साझा प्रतिबद्धता को मजबूत किया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘सनराइज़ राइजिंग स्टार्स’ पहल रही। इस पहल की शुरुआत विक्रमादित्य धर के नेतृत्व में की गई है। इसका उद्देश्य ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर देना है, जिनके सामने आर्थिक परिस्थितियां प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भागीदारी के रास्ते में बाधा बन सकती हैं।
‘सनराइज़ राइजिंग स्टार्स’ के तहत चयनित प्रतिभाओं को पेशेवर प्रशिक्षण, खेल उपकरण, आवास और विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। पहल के पीछे सोच यह है कि किसी खिलाड़ी की प्रतिभा केवल आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण आगे बढ़ने से न रुक जाए। खिलाड़ियों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
अकादमी से जुड़े लोगों का कहना है कि बैडमिंटन जैसे खेल में प्रतिभा के साथ-साथ निरंतर प्रशिक्षण, बेहतर उपकरण, फिटनेस, प्रतियोगिताओं का अनुभव और विशेषज्ञ मार्गदर्शन भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि युवा खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर पर ही ये सुविधाएं उपलब्ध हों तो वे अपनी क्षमता का बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
सनराइज़ शटलर्स बैडमिंटन अकादमी की स्थापना जनवरी 2021 में की गई थी। अकादमी की नींव डॉ. कुसुम सिंह, जयदीप सिंह, अतुल गोयल और अंकुर गर्ग ने रखी थी। स्थापना के बाद से अकादमी ने जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने और उन्हें प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने पर लगातार ध्यान दिया है।

चार वर्ष से भी कम समय में 209 पदकों की उपलब्धि अकादमी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की निरंतरता को दर्शाती है। 14 अंतरराष्ट्रीय पदक जहां खिलाड़ियों की वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता को दर्शाते हैं, वहीं 70 राष्ट्रीय और 125 राज्य स्तरीय पदक देश के विभिन्न स्तरों पर उनके प्रदर्शन की मजबूती को सामने रखते हैं।
इस उपलब्धि में खिलाड़ियों के साथ-साथ उनके प्रशिक्षकों, अभिभावकों और अकादमी से जुड़े पूरे सपोर्ट सिस्टम की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। युवा खिलाड़ियों को लगातार अभ्यास, अनुशासन और प्रतियोगिताओं के दबाव के बीच बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करना किसी भी खेल अकादमी के लिए बड़ी चुनौती होती है।
इस अवसर पर सनराइज़ स्पोर्ट्स इंडिया की वरिष्ठ सीएसआर अधिकारी एडवोकेट पायल सिंघल भी सामाजिक प्रभाव और समावेशी खेल विकास के क्षेत्र में अकादमी की सोच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनके नेतृत्व और सहयोग के माध्यम से जमीनी स्तर पर खेलों को अधिक समावेशी बनाने तथा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों तक अवसर पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सनराइज़ शटलर्स की पहल केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य ऐसे खेल वातावरण का निर्माण करना है, जहां युवा प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से ही बेहतर प्रशिक्षण और उचित अवसर मिल सकें। इससे उन खिलाड़ियों को भी आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है, जो प्रतिभावान होने के बावजूद संसाधनों की कमी के कारण बड़े मंच तक नहीं पहुंच पाते।
भारत में बैडमिंटन ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। ऐसे में जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें सही दिशा में प्रशिक्षित करना भविष्य के चैंपियन तैयार करने के लिए बेहद जरूरी है। सनराइज़ शटलर्स द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
अकादमी की उपलब्धि को योनेक्स, सनराइज़ स्पोर्ट्स इंडिया और सनराइज़ शटलर्स की साझा प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है। इन संस्थाओं का उद्देश्य भारत की अगली पीढ़ी के बैडमिंटन खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और प्रतियोगिताओं का अनुभव उपलब्ध कराना है, ताकि वे राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का प्रतिनिधित्व कर सकें।
सनराइज़ शटलर्स की यह यात्रा इस बात का उदाहरण है कि यदि युवा खिलाड़ियों को सही समय पर प्रशिक्षण, सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो वे कम समय में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। 209 पदकों की उपलब्धि ने अकादमी को जमीनी स्तर पर बैडमिंटन विकास के क्षेत्र में एक नई पहचान दी है।
आने वाले समय में ‘सनराइज़ राइजिंग स्टार्स’ जैसी पहलों से और अधिक युवा प्रतिभाओं को अवसर मिलने की उम्मीद है। आर्थिक बाधाओं से परे खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने का यह प्रयास भारतीय बैडमिंटन के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। सनराइज़ शटलर्स का लक्ष्य स्पष्ट है—जमीनी स्तर से प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें तराशना और उन्हें बड़े मंच तक पहुंचाने के लिए हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराना।






