अथर्ववेद के प्रथम सूक्त वाचस्पति पर गोष्ठी सम्पन्न

वैज्ञानिक दृष्टिकोण सोच व कर्म की आवश्कता
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद् के तत्वावधान में अथर्ववेद के प्रथम सूक्त वाचस्पति पर गोष्ठी का आयोजन किया गया।यह कोरोना काल से 520 वाँ वेबिनार था।
EROS TIMES: वैदिक विद्वान अतुल  सहगल ने अथर्ववेद में विज्ञान की चर्चा की और यह कहा कि विज्ञान हर वस्तु और क्रिया का व्यवस्थित ज्ञान है पूर्ण ज्ञान है और शुद्ध ज्ञान है और इस विज्ञान के स्रोत वेद ही हैं। मानव जीवन को श्रेष्ठ ढंग से जीने के लिए वैज्ञानिक सोच वैज्ञानिक दृष्टिकोण और विज्ञान सम्मत कर्म करने की आवश्यकता है।यह मन्त्र विज्ञान प्रधान ग्रन्थ अथर्ववेद की खिड़़की के समान उस ग्रन्थ के मुख्य विषय की झलक देता है। मन्त्र का भावार्थ प्रस्तुत करते हुए मानव शरीर के 21 जड़़ तत्वों की विवेचना की और कहा कि इस मन्त्र में अनेक प्रार्थनायें समाहित हैं।वे सब ईश्वर से इन 21 तत्वों का ज्ञान व बल की कामना करती हैं।यदि हमारी इन्द्रियां पूर्ण बल से कार्य करेंगी व ज्ञान के आधार पर ठीक दिशा में कार्यरत्त होंगी तो हमारी उन्नति होगी।यह तभी होगा जब मन और बुद्धि सही प्रकार से कार्य करें व मन पर बुद्धि की पूरी पकड़ हो और बुद्धि सत्यज्ञान को ग्रहण करती हुई अपना कार्य करे।ऐसा होने से हम अपने दैनिक जीवन में पापकर्म से बचे रहेंगे।हम परोपकार व प्राणी हित की भावना से भरे रहेंगे व अपनी शक्ति बल और सामर्थ्य का पूरा उपयोग करते हुए पूरा दिन पुण्य पुनीत और सृजनात्मक कर्म करेंगे। वक्ता ने अन्तःकरण के सूक्ष्म तत्वों — मन, बुद्धि चित्त और अहंकार की चर्चा की और बताया कि किस प्रकार सृष्टि निर्माण की प्रक्रिया में यह उत्पन्न हुए।प्रकृति के तीन गुणों की भी यथोचित विवेचना की और समझाया कि किस प्रकार इनके सही सम्मिश्रण से जीवन व्यवस्थित और सुचारु रूप से चलता है व मनुष्य उन्नति करता है। इस मन्त्र का वैज्ञानिक अध्यात्मिक और व्यवहारिक रूप प्रस्तुत किया।इन तथ्यों की जानकारी के बाद मनुष्य इस महत्वपूर्ण मंत्र की शक्ति से परिचित हो इससे लाभ उठाना प्रारम्भ कर देता है।अथर्ववेद विज्ञान का वेद है।यह ग्रन्थ पदार्थ और अध्यात्म विज्ञान का ग्रन्थ है और इसका यह मन्त्र विज्ञान द्वारा शारीरिक और आत्मिक उन्नति की प्रार्थना करता है।इस मन्त्र द्वारा प्रार्थना कर्त्ता मनुष्य को दयालु व कल्याणकारी ईश्वर उचित फल दे के उसका उद्धार करता है।
मुख्य अतिथि विद्या सागर वर्मा (पूर्व राजदूत कजाखस्तान) व अध्यक्ष डॉ. सुषमा आर्य ने भी विषय की संपुष्टि की।
गायिका प्रवीना ठक्कर रविन्द्र गुप्ता जनक अरोड़ा कृष्णा पाहुजा कुसुम भंडारी आदि के भजन हुए।
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