शिक्षा मंत्री आतिशी ने दिल्ली सरकार के 1000 से अधिक स्कूलों के स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड के नवनिर्वाचित सभी जनरल सेक्रेटरी के साथ लीडरशिप पर की चर्चा
20 स्कूलों में चले पायलट फेज की सफलता के बाद केजरीवाल सरकार के 1000 से ज़्यादा स्कूलों में हुआ स्कूल एडवाइजरी बोर्ड का गठन
’स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड’ द्वारा अपने स्कूलों में भविष्य के लीडर्स तैयार कर रही है केजरीवाल सरकार
स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड के मात्र 1 साल के अनुभव के बाद हमारे छात्रों के आत्मविश्वास ने दिखा दिया कि वो किसी से कम नहीं
Eros Times: सरकारी स्कूलों में स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड की कल्पना शायद ही किसी ने की होगी लेकिन हर छात्र को सीखने के सर्वोतम अवसर और विश्वस्तरीय शिक्षा देने के विजन के साथ दिल्ली सरकार के स्कूलों में यह संभव हो पाया ये कार्यक्रम14 सालों की स्कूली शिक्षा के बावजूद, छात्र अक्सर वास्तविक जीवन की चुनौतियों को हल करने में संघर्ष करते हैं; एसएबी छात्रों को इन चुनौतियों से निपटने के अवसर दे रहा है छात्रों ने बताया- एडवाइजरी बोर्ड की अनूठी पहल ने बढ़ाया उनका आत्मविश्वास, प्रोफेशनल डेवलपमेंट के साथ लीडरशिप और मैनेजमेंट स्किल भी विकसित हुई छात्रों ने कहा-एडवाइजरी बोर्ड ने हमें हमारी क्षमताओं का एहसास करवाया,हर ज़रूरी स्किल डेवलप करने में मदद की जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में मददगार मुझे विश्वास कि यदि हमारे छात्रों को स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड जैसे शानदार एक्सपोज़र मिलते रहे तो भारत को दुनिया का नंबर 1 बनने से कोई नहीं रोक सकता छात्रों ने कहा – एसएबी ने हमें भरोसा दिया कि स्कूल में निर्णय लेने की प्रक्रिया में हमारे विचार भी महत्वपूर्ण,इससे बढ़ा हमारा आत्मविश्वास शिक्षकों ने कहा – हमारी आशंकाओं के परे स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड ने किया शानदार प्रदर्शन, स्कूल की हर एक्टिविटी में दिखाया समर्पण और ओनरशिप केजरीवाल सरकार के स्कूलों में छात्रों के नेतृत्व कौशल को बढाने और विभिन्न भूमिकाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘छात्र सलाहकार बोर्ड’ की शुरुआत की गई|

पायलट फेज में इसे 20 स्कूलों में शुरू किया गया जिसके शानदार नतीजे देखने को मिले| पायलट फेज की सफलता के बाद इसे केजरीवाल सरकार के सभी स्कूलों में लागू किया है और छात्रों द्वारा स्टूडेंट्स एडवाइजरी बोर्ड के सेक्रेटरी जनरल और सदस्यों का चुनाव किया गया है।सोमवार को शिक्षा मंत्री आतिशी ने त्यागराज स्टेडियम में दिल्ली सरकार के स्कूलों के स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड (एसएबी) के नवनिर्वाचित सेक्रेटरी जनरल से मुलाक़ात की और उनके साथ नेतृत्व कौशलों पर चर्चा की। बातचीत के दौरान, स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी ने अपने अनुभव और स्कूल की बेहतरी के साथ-साथ एसएबी द्वारा किए गए विभिन्न काम और उनके प्रभाव को भी शिक्षा मंत्री के साथ साझा किया। उन्होंने शिक्षा मंत्री के साथ एसएबी की गठन प्रक्रिया को भी साझा किया और बताया कि इससे उन्हें लीडरशिप, संचार, क्रिटिकल थिंकिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग के स्किल्स विकसित करने में भी मदद मिली है। छात्रों ने प्रदर्शनी के माध्यम से स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड के सदस्यों के चयन से लेकर स्कूल के विभिन्न मुद्दों में उनकी भागीदारी को भी प्रदर्शित किया।
इस मौक़े पर शिक्षा मंत्री आतिशी ने नवनिर्वाचित एसएबी सदस्यों को बधाई देते हुए कहा, “केजरीवाल सरकार पिछले आठ सालों से अपने स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्धता से काम कर रही है। और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का विज़न है कि दिल्ली के हर बच्चे सबसे शानदार शिक्षा मिले चाहे वो किसी भी तबके से क्यों न हो। हमने इस दिशा में काम किया और इसकी बदौलत आज दिल्ली सरकार के स्कूलों में बहुत से सकारात्मक बदलाव देखे जा सकते हैं, इसमें स्कूल के बुनियादी ढांचे में सुधार, टीचर ट्रेनिंग और छात्रों के लिए नए अवसरों का तैयार करना शामिल है।
उन्होंने आगे कहा कि इन सब के नतीजतन, हमारे बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार हुआ, वो देश के टॉप उच्च शिक्षा संस्थानों में एडमिशन पाने लगे। और अब स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड जैसे कार्यक्रम के माध्यम से हम छात्रों में आत्मविश्वास के साथ-साथ लीडरशिप के गुण भी विकसित कर रहे है। उन्होंने आगे कहा कि आज इन छात्र लीडर्स के अस्त्मविश्वास को देखकर मुझे यक़ीन हो गया है कि इन्ही में से कई बच्चे भविष्य के लीडर्स बनेंगे और अपनी मेहनत,प्रतिभा और उत्साह के दम पर भारत को दुनिया का नंबर.1 देश बनायेंगे।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि, दिल्ली सरकार के स्कूलों में ऐसे स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड की कल्पना शायद ही किसी ने की होगी, लेकिन हर छात्र को विश्वस्तरीय शिक्षा देने और सीखने के सर्वोत्तम अवसर देने के विजन के साथ दिल्ली सरकार के स्कूलों में यह संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि छात्र सलाहकार बोर्डों के माध्यम से, हमारा उद्देश्य छात्रों की लीडरशिप स्किल को बढ़ाने के लिए एक मंच तैयार करना है। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने छात्रों को जिम्मेदारी, विभिन्न मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता और टीम मैनेजमेंट जैसे महत्वपूर्ण स्किल डेवलप करने का मौका दिया है जो भविष्य में आगे बढ़ने की दिशा में उके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा| उन्होंने कहा कि छात्र सलाहकार बोर्ड छात्र नेतृत्व को बढ़ावा देने और स्कूल की गतिविधियों में छात्रों की भागीदारी को बढाने की दिशा में एक सफल पहल साबित हुई है।
शिक्षा मंत्री ने साझा करते हुए, “राजनीति में आने से पहले, मैंने एक शिक्षक के रूप में काम किया और अनुभव किया कि एक छात्र स्कूल में 14 साल तक पढ़ाई करता है, लेकिन अक्सर उसने जो सीखा उसे वास्तविक जीवन की चुनौतियों को हल करने में संघर्ष करता है। ऐसे में स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड छात्रों को इन चुनौतियों को पहचानने करने और समाधान खोजने का मौक़ा देता है। उन्होंने कहा कि,अगर हम अपने सभी छात्रों को इस तरह आगे बढ़ने के मौक़े देंगे तो भारत को दुनिया में नंबर 1 देश बनने से कोई नहीं रोक सकता है।
केजरीवाल सरकार के स्कूलों में स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड क्या है?
दिल्ली सरकार के स्कूलों में स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड (एसएबी) को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है जहां स्कूलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में छात्रों और उनके विचारों को शामिल किया जाता है। छात्र सलाहकार बोर्ड का उद्देश्य विभिन्न स्कूल एक्टिविटीज को डिज़ाइन करने, मैनेजमेंट करने और उन्हें क्रियान्वित करने की दिशा में छात्रों की भूमिका बढ़ाना है| इस कार्यक्रम से छात्रों में जिम्मेदारी की भावना लाने, मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता, नेतृत्व और टीम प्रबंधन जैसे कौशल विकसित करने में मदद मिली है और छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ा है। बोर्ड ने छात्रों को अपनी राय और विचार व्यक्त करने के लिए एक मंच भी प्रदान किया है|
इस अनूठी पहल ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाने का काम किया। साथ ही इससे उनका प्रोफेशनल डेवलपमेंट हुआ व लीडरशिप स्किल, टाइम मैनेजमेंट जैसी स्किल भी विकसित हुई। इस कार्यक्रण ने छात्रों को उनकी क्षमताओं का एहसास करवाया, ख़ुद को समझने में मदद की। और वो हर स्किल डेवलप करने में मदद की जो उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आने वाली चुनौतियों को दूर करने का काम करेगा।
दिल्ली सरकार के स्कूलों में स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड कैसे काम करते हैं?

ग्रेड 7, 8, 9 और 11 के छात्र चयन प्रक्रिया में भाग लेते हैं, प्रत्येक सेक्शन से दो छात्रों को चुना जाता है।
– एसएबी सदस्यों के चयन के लिए एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन किया जाता है, जिसमें उम्मीदवार छात्र प्रतिनिधियों के रूप में वोट मांगते हैं। एसएबी सदस्यों का चयन करने के लिए शिक्षकों की मदद से एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आयोजित किया जाता है।
– एक बार एसएबी पूल बन जाने के बाद, 11वीं कक्षा से दो सेक्रेटरी जनरल को बोर्ड का नेतृत्व करने के लिए चुना जाता है।
छात्रों और शिक्षकों ने स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड के अनुभव के बारे में क्या कहा?
“शुरुआत में, हमें इस बात की चिंता थी कि क्या छात्र, स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड के लिए हमारी अपेक्षाओं को पूरा कर पाएंगे। लेकिन छात्र न केवल हमारी अपेक्षाओं पर खरे उतरे, बल्कि उससे भी बेहतर प्रदर्शन किया है। और ओनरशिप की भावना दिखाई है।
-राकेश कुमार, प्रिंसिपल, एसओई, सेक्टर 17, रोहिणी
“एसएवी में छात्रों को शुरुआत में चुनौतियों का सामना करना पड़ा। नवनिर्वाचित सदस्यों की आशंका थी कि क्या उनके साथी उनकी बातों की स्वीकार करेंगे। लेकिन विभिन्न ऐक्टिविटियों के प्रबंधन में उनकी सफलता ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया।
नमिता गुप्ता, शिक्षिका, सर्वोदय विद्यालय, सेक्टर 8, रोहिणी
“स्टूडेंट एडवाइजरी बोर्ड का हिस्सा होने से मैंने जाना कि स्कूल में डिसिशन मेकिंग में मेरे विचार भी मायने रखते है, और मेरे विचार हमारे स्कूल को और बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इस प्रोग्राम से मुझे नेतृत्व और कम्युनिकेशन स्किल्स विकसित करने में मदद मिली।”
गौरी, शहीद हेमुकलानी सर्वोदय विद्यालय, लाजपत नगर
“एसएबी ने मुझे चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से अवगत कराया, जो हमारे स्कूल के माहौल को प्रभावित करने की दिशा में मेरा पहला कदम था। मैंने चुनाव लड़ा और एक ईमानदार रूप से वादे किए और आकर्षक डिबेट के माध्यम से साथी छात्रों को मेरे चयन के संभावित लाभों के बारे में बताया। इससे मुझे आत्मविश्वास मिला।
-मुस्कान, एएसओएसई, सेक्टर 22, द्वारका






