नई दिल्ली। भारत मंडपम के हाल नंबर 5 में स्थित प्रभात प्रकाशन के स्टॉल पर साहित्य और सामाजिक चेतना का एक ऐतिहासिक, प्रेरक और विचारोत्तेजक दृश्य देखने को मिला। विश्व पुस्तक मेले के इस विशेष आयोजन में साहित्य केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक बदलाव, मानवीय मूल्यों और नागरिक जिम्मेदारी की सशक्त अभिव्यक्ति बनकर सामने आया। कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की उपस्थिति और उनकी चर्चित बेस्टसेलर पुस्तकों पर हुई गहन और सार्थक चर्चा रही। स्वयं कैलाश सत्यार्थी प्रभात प्रकाशन के स्टॉल पर मौजूद रहे, जिससे पाठकों, लेखकों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं में विशेष उत्साह और प्रेरणा का माहौल दिखाई दिया।
इस अवसर पर कैलाश सत्यार्थी की प्रमुख पुस्तकों—“सपनों की उड़ान”, “आजाद बचपन की ओर”, “बदलाव के बोल” और “सभ्यता का संकट और समाधान”—पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि ये पुस्तकें केवल वैचारिक लेखन नहीं हैं, बल्कि दशकों लंबे संघर्ष, अनुभव और सामाजिक आंदोलनों का जीवंत दस्तावेज हैं। इन कृतियों के माध्यम से बाल अधिकार, शिक्षा, बाल श्रम उन्मूलन, मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को बेहद संवेदनशील और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
कैलाश सत्यार्थी ने संवाद के दौरान कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति का सबसे बड़ा पैमाना बच्चों का सुरक्षित, शिक्षित और आज़ाद बचपन है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों से उनका बचपन छीन लिया जाए, तो सभ्यता का आधार ही कमजोर हो जाता है। सत्यार्थी ने यह भी स्पष्ट किया कि समाज में स्थायी परिवर्तन तभी संभव है, जब आम लोग सामूहिक रूप से अन्याय, शोषण और असमानता के खिलाफ आवाज़ उठाएं। उनके विचारों ने विशेष रूप से युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गहराई से प्रभावित किया।

कार्यक्रम के दौरान पाठकों को कैलाश सत्यार्थी से सीधे संवाद करने और उनकी पुस्तकों से जुड़ी प्रेरणादायक बातों को सुनने का अवसर भी मिला। प्रभात प्रकाशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि सत्यार्थी की पुस्तकें लगातार पाठकों के बीच लोकप्रिय रही हैं और शिक्षा, समाजशास्त्र व सामाजिक कार्य के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभा रही हैं।
इसी आयोजन में लेखक सचिन कुमार जैन की नई पुस्तक “भारत में सामाजिक नागरिक पहल का ऐतिहासिक सफरनामा” का भी विधिवत विमोचन किया गया। इस अवसर पर प्रभात प्रकाशन की संपादक पूजा सिंह, लेखक सचिन जैन, निदेशक प्रभात कुमार और पीयूष कुमार मौजूद रहे। यह पुस्तक भारत में नागरिक आंदोलनों, जनभागीदारी और सामाजिक पहलों के ऐतिहासिक विकास को विस्तार से रेखांकित करती है। इसमें बताया गया है कि किस प्रकार आम नागरिकों की संगठित पहल ने लोकतंत्र को मजबूत किया और समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव रखी।
प्रभात प्रकाशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि कैलाश सत्यार्थी जैसे वैश्विक विचारक और सचिन जैन जैसे शोधपरक लेखक का एक ही मंच पर होना सामाजिक साहित्य की ताकत को दर्शाता है। कार्यक्रम के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने भी प्रभात प्रकाशन के स्टॉल पर पहुंचकर पुस्तकों में गहरी रुचि दिखाई और सामाजिक सरोकारों से जुड़े साहित्य की सराहना की।

कुल मिलाकर, यह आयोजन केवल पुस्तक विमोचन या साहित्यिक चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज, साहित्य और सामाजिक परिवर्तन को जोड़ने वाला एक सशक्त मंच साबित हुआ। कैलाश सत्यार्थी की विचारधारा इस पूरे कार्यक्रम का केंद्र बिंदु रही, जिसने यह संदेश दिया कि किताबें केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि समाज को बेहतर बनाने के लिए होती हैं।






