दिल्ली में ऐतिहासिक इमारतें समय के साथ देश के विकास का प्रतीक

1947 के विभाजन पर भारत का दूसरा संग्रहालय अम्बेडकर विश्वविद्यालय के दारा शिकोह लाइब्रेरी में हुआ तैयार; कला,संस्कृति व भाषा मंत्री आतिशी ने उद्घाटन कर जनता को समर्पित किया

हज़ारों परिवारों की तरह मेरे परिवार ने भी विभाजन की जिस विभीषिका को झेल शून्य से शुरुआत की उनके संघर्ष की कहानी को बयॉं करता ये संग्रहालय

विभाजन हम सभी के लिए एक सीख कि नफ़रत के ताने बाने से समाज को तोड़ने में बहुत कम समय लगता है लेकिन उन घावों को भरने में दशकों का समय लग जाता है

संग्रहालय विभाजन और उसके बाद दिल्ली में आए बदलावों के बारे में लोगों को वाक़िफ़ करेगा

संग्रहालय के साथ-साथ पूरी ऐतिहासिक इमारत को कल्चरल हब के रूप में किया गया है विकसित,समय-समय पर सरकार यहाँ विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करेगी

अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने देश के इतिहास को बेहतर ढंग से समझने में लोगों की मदद के लिए ऐतिहासिक इमारतों के जीर्णोद्धार को प्राथमिकता दी है

दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतें समय के साथ देश के विकास का प्रतीक हैं

विभाजन के प्रत्येक पहलुओं को समझाने के लिए संग्रहालय में बनाई गई हैं 7 गैलरियाँ

संग्रहालय में वर्चुअल रियलिटी के साथ विभाजन के प्रसंगों को जान पायेंगे विज़िटर्स

Eros Times: अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी में विभिन्न ऐतिहासिक इमारतों को संरक्षित करने की दिशा में तेज़ी से काम कर रही है। भारतीय इतिहास के इन खूबसूरत प्रतीकों में से एक कश्मीरी गेट स्थित “दारा शिकोह लाइब्रेरी” है जिसे केजरीवाल सरकार द्वारा “विभाजन संग्रहालय” और कल्चरल हब में परिवर्तित किया गया है। गुरुवार को कला,संस्कृति व भाषा मंत्री आतिशी ने इसका उद्घाटन कर इसे जनता को समर्पित किया।

इस मौक़े आतिशी ने कहा कि,“दिल्ली में ऐतिहासिक इमारतें समय के साथ देश के विकास का प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने देश को बेहतर ढंग से समझने में मदद करने के लिए ऐतिहासिक इमारतों के जीर्णोद्धार को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि विभाजन के संग्रहालय को स्थापित करने के लिए दारा शिकोह लाइब्रेरी की बिल्डिंग से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती थी। यह 1947 के विभाजन की यादों से जुड़ा लोक संग्रहालय होगा, जिसने दिल्ली को भी नाटकीय रूप से बदल दिया था।और इसके बाद राजधानी में कई कालोनियाँ स्थापित हुई जिसमें लाजपत नगर, सीआर पार्क, और पंजाबी बाग आदि जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यह भारत में विभाजन पर बनाया जाने वाला दूसरा और दिल्ली में पहला ऐसा संग्रहालय है।

कला संस्कृति व भाषा मंत्री आतिशी ने कहा कि आमतौर पर संग्रहालय केवल ऐतिहासिक महत्व के क्षणों को प्रदर्शित करते हैं, लेकिन इस संग्रहालय में, हमने एक” गैलरी ऑफ होप “जोड़ी है, जो दशकों बाद पाकिस्तान में अपनी प्राचीन संपत्तियों को फिर से देखने वाले लोगों की तस्वीरों और अनुभवों को प्रदर्शित करेगी। ये तस्वीरें खुद विभाजन की विभीषिका झेलने वाले लोगों द्वारा संग्रहालय को दान की गई हैं।

मंत्री आतिशी ने कहा कि ये संग्रहालय सिर्फ ऐतिहासिक घटनाओं की यादों को नहीं दर्शाता है बल्कि  हम सभी को यह सिखाता है कि हम आज की जिंदगी में इतिहास को खुद से जोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि मै कालका जी से विधायक हूं और वहां के अधिकांश परिवार ऐसे है जिन्होंने विभाजन के द्वंश को झेला है | विभाजन हम सभी के लिए एक सीख है कि नफ़रत के ताने बाने से समाज को तोड़ने में बहुत कम समय लगता है लेकिन उन घावों को भरने में कई दशकों का समय लग जाता है।

अपने परिवार द्वारा झेले गए विभाजन की विभीषिका को साझा करते हुए मंत्री आतिशी ने कहा कि मेरे नानाजी लाहौर में सर्विसेज़ में कार्यरत थे। विभाजन के दौरान उन्हें 15 अगस्त तक लाहौर में ही रहना था। तब उन्होंने मेरी माँ को और उनके भाई बहन को भारत में बरोड़ा शहर में शिफ्ट करवा दिया। और ख़ुद वहाँ रुके इस दौरान 12 अगस्त को उन्होंने परिवार के बाक़ी लोगों को ट्रेन से भारत भेजने का प्रयास किया लेकिन शहर में हुए दंगों को देख उन्होंने ये विचार बदल दिया। और जिस ट्रेन से वे लोग जाने वाले थे बताया जाता है कि उस ट्रेन में कोई भी जीवित नहीं रहा।

विभाजन के दौरान लोगों को अपना घर बार छोड़ना पड़ा, सभी को शून्य से शुरुआत करनी पड़ी। उन्होंने इस अनुभव के माध्यम से उदाहरण दिया कि विभाजन एक ऐसी प्रक्रिया थी जो लोगों को विभाजित करके अपने परिवार के साथियों से अलग कर देती थी। यह दुखभरी घटना उन लाखों  परिवार की ज़िंदगी पर गहरा प्रभाव डाला 

उन्होंने कहा कि आज जिस दौर में हम अपनी जिन्दगी जी रहे है हम सब के लिए बहुत बड़ी सीख है कि जिस तरह 1947 के समय कुछ लोगो की गन्दी राजनीति ने समाज के अंदर नफ़रत को पैदा कर दिया और उस राजनीति से हमारे देश के ताना बाना टूट गया | उन्होंने कहा कि हम सभी के लिए सोचने की बात है कि आज हम जो फैसले ले रहे है हम अपने देश में किस प्रकार की राजनीति को स्थान दे रहे है वह सिर्फ आज के फ़ैसले नहीं है बल्कि इस  फैसले से आने वाले 100 साल तक हमारे देश के ताने बाने बन सकते है |

इस मौक़े पर मंत्री आतिशी ने कला और संस्कृति टीम को बधाई दी और कहा कि शायद यह ऐसा कोई म्यूजियम हो सकता है जो भारत में इतने विभिन्न इतिहास के स्मृतियों को एकत्रित करता है।

उल्लेखनीय है कि संग्रहालय में  रेल कोच (जैसा कि वे आजादी के दौरान थे), प्राचीन हवेलियों और शरणार्थी शिविरों की प्रतिकृतियों को भी बनाया गया है। विज़िटर्स को उस समय का अनुभव प्रदान करने के लिए विभाजन से जूझने वाले लोगों ने संग्रहालय को कपड़े, शरणार्थी शिविरों से सामान, किताबें, पत्र, बर्तन, ट्राफियां आदि जैसे विभिन्न सामान दान किए हैं। इसमें सिंध को समर्पित एक विशेष गैलरी भी है। संग्रहालय में वर्चुअल रियलिटी द्वारा भी विज़िटर्स विभाजन से जुड़े पहलुओं भी वाक़िफ़ हो सकते है।

दारा शिकोह लाइब्रेरी के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को श्रद्धांजलि देने वाले संग्रहालय के साथ-साथ इस इमारत को इमारत को क्यूरेटेड कल्चरल हब के रूप में भी परिवर्तित किया गया है। यह शहर और इससे जुड़े व्यक्तियों के विभिन्न पहलुओं पर कथाओं और प्रदर्शनियों को प्रदर्शित करता है। संग्रहालय में एक कैफेटेरिया, एक स्मारिका दुकान जिसमें एक छोटा पुस्तकालय और एक रीडिंग एरिया जैसी सुविधाएं भी शामिल है।

संग्रहालय में मौजूद है 7 गैलरी

1. विभाजन और स्वतंत्रता की ओर

2. माइग्रेशन

3. रिफ़्यूजी

4. रिबिल्डिंग होम

5. इन दा माइंड ऑफ़ आर्टिस्ट

6. रिबिल्डिंग रिलेशन

7. गैलरी ऑफ़ होप एंड करेज

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