शिक्षा मंत्री लंदन में दिल्ली में शिक्षा मॉडल का बखान करके लोगों को भ्रमित कर रही है जबकि वास्तविकता में शिक्षा व्यवस्था बदहाल हो चुकी है।
राजधानी में चरमराई ट्रैफिक व्यवस्था के कारण लोग घंटो जाम में बेबस महसूस कर रहे है, केजरीवाल सरकार के पास कोई योजना नही।
Eros Times: दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कम्युनिकेशन विभाग के चेयरमैन एवं पूर्व विधायक अनिल भारद्वाज ने प्रदेश कार्यालय राजीव भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी लंदन जाकर दिल्ली के शिक्षा मॉडल का बखान करती है परंतु 9 वर्षों में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने की दिशा में एक कदम भी नही उठाया है। जिसका उदाहरण नीट परीक्षा के वर्तमान नतीजों में 39000 हजार छात्रों में से दिल्ली के सरकारी स्कूलों के सिर्फ 1000 छात्र ही पास हुए है, जबकि 38000 छात्र प्राइवेट स्कूल के हैं।
संवाददाता सम्मेलन में अनिल भारद्वाज के साथ कम्युनिकेशन विभाग के वाइस चेयरमैन अनुज आत्रेय भी मौजूद थे।
अनिल भारद्वाज ने कहा कि 2014 के अनुपात में इस साल सरकारी स्कूलों में 10वी कक्षा के परिणाम में 13 प्रतिशत की कमी आई है। 2014 में जहा परिणाम 98.81 प्रतिशत था वहीं 2023 में यह घटकर 85.84 प्रतिशत रह गया है। आम आदमी पार्टी की सरकार की बदहाल शिक्षा मॉडल का ही नतीजा है कि जहां 2014 में दसवीं के छात्र 1,80,203 थे वह 2019 में घटकर 1,66167 रह गए। वहीं बाहरवीं के छात्रों में लगभग 36000 की कमी आई है। 1030 सरकारी स्कूलों में घटते परिणामों का मुख्य कारण इनमें 58 प्रतिशत प्रिंसिपल, 33-34 प्रतिशत अध्यापक और 40-42 प्रतिशत वाईस प्रींसिपलों की कमी है। यही नही जिन 22000 गेस्ट टीचरों के कंधो पर शिक्षा व्यवस्था टिकी है उनको 2014 में पक्का करने का वादा करने के बावजूद केजरीवाल सरकार अभी तक पक्का नही किया है। केजरीवाल सरकार की कुनीति के कारण सम्मान के योग्य टीचर आज दिहाड़ी मजदूर बनकर रहे गये है।
अनिल भारद्वाज ने कहा कि 2015 में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में 500 स्कूल, 20 नए कालेज और विश्वविद्यालय बनाने का वादा किया था परंतु 9 वर्षों में कुछ भवनों का निर्माण और क्लास रुमों में रंगरोगन करके भ्रमित करने वाला प्रचार किया कि शिक्षा मॉडल का बेहतर बनाया है। उन्होंने कहा कि आईपी यूनिवर्सिटी के ईस्ट कैम्प के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल में क्रेडिट लेने की होड़ को पूरी दिल्ली ने देखा था, जिसकी आधारशिला 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए की थी, जिसको बनाने में 10 वर्ष लग गए। उन्होंने कहा कि अधिकारों की लड़ाई लड़ने की बजाय मुख्यमंत्री केजरीवाल को शिक्षा में सुधार के लिए गंभीरता से काम करना चाहिए।
अनिल भारद्वाज ने कहा कि पिछले 6-8 महीनों से दिल्ली की ट्रेफिक व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है उसकी पूरी जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की है क्योंकि केजरीवाल के पास ट्रेफिक व्यवस्था सुधारने के लिए कोई योजना ही नही है जिसके कारण दिल्ली की बदहाल सड़कों पर घंटो-घंटो जाम लगता है, जिसे लोग अपने को बेबस महसूस करते है। उन्होंने कहा कि ट्रेफिक व्यवस्था की बदहाली के लिए सड़कों की बदहाल हालत, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का कमजोर होना, निजी वाहनों की बढ़ोतरी सबसे बड़ा कारण है। 2014 में जहां डीटीसी बेड़े में 7000 बसे थी वह 3500 के लगभग रह गई, जबकि केजरीवाल ने डीटीसी बसों को दुगना करने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि सरकार सड़कों पर इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए फलाई ओवर बनाने का काम पूरी तरह बिना योजना के चल रहा है, जिसकी वजह से सड़कों पर ट्रेफिक बदहाल है और लोग जामों से लगातार परेशान हो रहे है।
अनिल भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस के 15 सालों के शासन में चुनौतियों का सामना करके दिल्ली का चहुॅमुखी विकास किया और सैंकड़ां फलाई ओवर, आर.यू. बी., अंडरपास, फुटओवर ब्रिज, सैंकड़ों किलोमीटर की व्यवस्थित सड़कों को निर्माण और दिल्ली सहित एनसीआर में सैंकड़ों कि0मी0 का मेट्रो नेटवर्क बढ़ाया। उन्होंने 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन के समय लोगों को शंका थी कि स्टेडियम व खेल आयोजन स्थलों के नजदीक ट्रेफिक परेशानी से जूझना पड़ेगा लेकिन बिना किसी परेशानी के हमारी सरकार ने सभी एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करके ट्रेफिक व्यवस्था को सुचारु रुप से चलाया, जो एक उदाहरण साबित हुआ।
भारद्वाज ने कहा कि हमारा मानना है केजरीवाल सरकार एजेंसियों पर आरोप प्रत्यारोप न करके अपनी जिम्मेदारी निभाए कि सभी एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करके दिल्ली में ट्रेफिक व्यवस्था को व्यवस्थित करे। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े प्रचार की घोषणा करने वाले दिल्ली के प्रवासी मुख्यमंत्री अपनी राजनैतिक अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए दिल्ली की बदहाल व्यवस्था को नजर अंदाज करके राज्य दर राज्य घूम रहे है। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर शोर मचाने वाले मुख्यमंत्री की पहली जिम्मेदारी दिल्ली को विकसित और व्यवस्थित करने की है।
अनिल भारद्वाज ने कहा कि मुखर्जी नगर में लगी आग को बुझाने के लिए भारी ट्रेफिक जाम के चलते फायर ब्रिगेड की गाड़ियां देर से पहुची और आग पर नियंत्रण पाने में देरी हुई व प्राईवेट कैम्पस में पढ़ने वाले कुछ छात्र भगदड़ के कारण जख्मी हो गए, जिसके लिए दिल्ली के घुमन्तु मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि दिल्ली कांग्रेस छात्रों के शीघ्र स्वस्थ्य होने के कामना करती है और दिल्ली सरकार से आग्रह करती है कि झूठे शिक्षा मॉडल का बखान करना बंद करे, क्योंकि जिस कैम्पस में छात्र क्लॉस ले रहे थे उसे क्षमता से अधिक छात्र मौजूद थे।






