एमिटी विश्वविद्यालय में नीति और रणनीति के माध्यम से दृष्टीकोण’’ पर परिचर्चा सत्र का आयोजन

Eros Times: नोएडा एमिटी विश्वविद्यालय में भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा स्थापित टेक्नोलॉजी इनेबलिंग सेंटर, सैटेलाइट सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च और एमिटी के डायरेक्टोरेट ऑफ इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर द्वारा ‘‘भारतीय विश्वविद्यालय पारिस्थितिकी तंत्र में ट्रांसलेशनल अनुसंधान व व्यवसायिकरण – नीति और रणनीति के माध्यम से एक समाधान दृष्टीकोण’’ पर परिचर्चा सत्र का आयोजन आई टू ब्लाक सभागार में किया गया। इस परिचर्चा सत्र कार्यक्रम का शुभारंभ भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और ट्रांसफर की प्रमुख डा अनिता अग्रवाल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के नीति समन्वय और कार्यक्रम प्रबंधन एवं वैज्ञानिक – ई डा रबिंद्रा के पाणीग्रही और एमिटी साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती द्वारा किया गया।

परिचर्चा सत्र कार्यक्रम का शुभारंभ भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और ट्रांसफर की प्रमुख डा अनिता अग्रवाल ने कहा कि टेक्नोलॉजी इनेबलिंग सेंटरों का उददेश्य विश्वविद्यालयों में प्रौद्योगिकी विकास के लिए पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने के साथ अन्य संस्थानों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और उद्योग के साथ नेटवर्क हेतु मंच प्रदान करना है। केंद्रों का मुख्य उददेश्य एक सक्षम इको सिस्टम प्रक्रिया और समर्थन प्रणाली प्रदान करना है। प्रौद्योगिकी सक्षम केंद्रों के लिए एक रूपरेखा विकसित करना आवश्यक है, समाजिक तैयारी और उद्योग किसी भी तकनीक को उद्योग मे स्थानांतरित करने से पहले तत्परता भी महत्वपूर्ण है ताकि उद्योग इसे स्वीकार और अपना सकें। सहायक विश्वविद्यालय पारिस्थितिकी तंत्र बनाना आवश्यक और सरकार को सिफारिशें दी जानी चाहिए जो कार्यक्रमों को डिजाइन करने मे मदद कर सकें।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के नीति समन्वय और कार्यक्रम प्रबंधन एवं वैज्ञानिक – ई डा रबिंद्रा के पाणीग्रही ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति के केंद्र स्थापित करके प्रौद्योगिकी सक्षम केंद्रों के लिए नीतियां तैयार कर रहा है जो शोधकर्ताओं को पूर्ण समर्थन प्रदान करेगा।

एमिटी साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती ने अतिथियों को स्वागत करते हुए कहा कि आज भारतीय विश्वविद्यालय नवाचार में नये आयाम स्थापित कर रही हैं। विश्वविद्यालयों को ट्रांसलेशनल अनुसंधान पर ध्यान केन्द्रीत करने की आवश्यकता है जिससे कम लागत में बेहतरीन परिणाम प्राप्त हो सके। उन्होने कहा कि विश्वविद्यालय में इस प्रकार के पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण से भारत, नवाचार में अग्रणी स्थान पर होगा। एमिटी मे ंहम युवा मस्तिष्कों को अनुसंधान व नवचार के लिए प्रेरित करते है।

इस कार्यक्रम के अंर्तगत ‘‘भारतीय विश्वविद्यालय पारिस्थितिकी तंत्र में ट्रांसलेशनल अनुसंधान व व्यवसायिकरण – नीति और रणनीति के माध्यम से एक समाधान दृष्टीकोण’’ विषय पर आयोजित प्रथम परिचर्चा सत्र में आईआईटी कानपुर के प्रो नलिनाक्ष एस व्यास, ने कहा कि अनुसंधान व शोध के लिए अधिक निवेश की आवकेश्यकता है। इसके अतिरिक्त क्षमता निर्माण, स्वायत्ता, उर्ध्वाधर विकास और डिजाइन निर्माण की क्षमता को विकसित करना होगा।

आंध्रा विश्वविद्यालय के डीपीआईआईटी आईपीआर चेयर डॉ एच पुरूषोत्तम ने कहा कि विश्वविद्यालय में नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना होगा जिससे अधिक से अधिक युवा अनुसंधान व शोध के लिए आगे आये। नेतृत्व व प्रबंधन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होती है, समूह का निर्माण व निवेश भी महत्वपूर्ण है जिससें संरचनाओं का विकास होगा। सबसे अधिक अनुसंधान व विकास नीति को विकसित करना होगा।

इस अवसर पर चंडीगढ की पंजाब विश्वविद्यालय में डीएसटी – टीईसी के मेंटर प्रो रूपिंदर तिवारी और आईआईटी दिल्ली के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के प्रबंध निदेशक डॉ अनिल वली ने भी अपने विचार रखे। परिचर्चा सत्र की अध्यक्षता एमिटी साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती ने की।

इसी विषय पर नीति पर ध्यान केन्दीत करते हुए एक अन्य परिचर्चा सत्र का आयोजन किया गया जिसमें एग्रीइनोवेट इंडिया लिमिटेड की सीईओ डा सुधा मैसूर, डीआडीओ के डीआईआईटीएम के निदेशक डा अरूण चौधरी और फिक्की के उप महासचिव श्री निरंकार सक्सेना ने अपने विचार रखे। इस परिचर्चा सत्र की अध्यक्षता एमिटी फॉउडेशन फॉर साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन एलायंस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा ए के सिंह ने की।

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