शिक्षा मंत्री आतिशी ने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन में पेश किया दिल्ली का एजुकेशन मॉडल
पिछले 8 सालों में दिल्ली की शिक्षा प्रणाली में आए बदलाव ने छात्रों और शिक्षकों में केजरीवाल सरकार के स्कूलों को लेकर स्वामित्व और गर्व की भावना विकसित की
दिल्ली के एजुकेशन मॉडल में बदलाव इस बात का उदाहरण कि यदि सरकारों में सुधार के लिए दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो बदलाव निश्चित है
Eros Times: शिक्षा मंत्री आतिशी ने भविष्य में शिक्षा संबंधित साझेदारी पर चर्चा करने के लिए कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन के टॉप लीडरशिप के साथ की मुलाकात यूके शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल, यहाँ के एजुकेशन मॉडल से सीखकर एमसीडी के स्कूलों को बनायेंगे विश्वस्तरीय पिछले 3 सालों में 4 लाख से ज़्यादा बच्चों ने प्राइवेट स्कूलों को छोड़कर दिल्ली सरकार के स्कूलों में लिया दाख़िला पंजाब भी दिल्ली के नक्शेकदम पर, पिछले एक साल में 1 लाख से ज़्यादा बच्चों ने दिखाया सरकारी स्कूलों पर भरोसा, प्राइवेट स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों में हुए शामिल दिल्ली सरकार के स्कूलों में आया बदलाव, शिक्षा को लेकर केजरीवाल सरकार के दृढ़ संकल्प और प्राथमिकता का प्रमाण शिक्षा मंत्री आतिशी ने अपने ब्रिटेन विजिट के दौरान कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ़ एजुकेशन के समक्ष दिल्ली के शिक्षा मॉडल की उपलब्धियों को साझा किया। अरविंद केजरीवाल सरकार में पिछले 8 सालों में दिल्ली मॉडल ऑफ़ एजुकेशन की उपलब्धियों को साझा करते हुए शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा कि,”दिल्ली के एजुकेशन मॉडल में आए परिवर्तन इस इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि यदि सरकारों में मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो परिवर्तन निश्चित रूप से संभव है।
बता दें कि शिक्षा मंत्री आतिशी दिल्ली के शिक्षा सचिव व एमसीडी के शिक्षा निदेशक सहित एससीईआरटी के वरिष्ठ फैकल्टी के साथ यूके के दौरे पर है। जहां वे यूके के टॉप संस्थानों के साथ संभावित भविष्य की साझेदारी के लिए चर्चा कर रहे है। ताकि वहाँ के मॉडल को अब दिल्ली में एमसीडी के स्कूलों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए अपनाया जा सके।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में फैकल्टी को संबोधित करते हुए, शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा कि, “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच अक्सर आर्थिक असमानताओं पर टिकी होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में एक बच्चे का भविष्य उसकी सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के साथ पूर्व निर्धारित माना जाता है। यदि बच्चा संपन्न परिवार से होता है तो वो टॉप प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा लेता है। उसके पास उच्च शिक्षा और करियर में आगे बढ़ने के विकल्प होते है। जबकि जो बच्चे कमजोर आर्थिक सामाजिक पृष्ठभूमि से आते है, अक्सर उनके पास सीमित विकल्प होते है। नतीजतन, वंचित पृष्ठभूमि के माता-पिता अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने के लिए मजबूर होते हैं जहां छात्रों को अच्छी शिक्षा नहीं मिलती और वे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं।
उचित शैक्षिक अवसरों की कमी के कारण वे छोटे-मोटे काम करने लगते हैं। और यही कारण है कि भारत भर के सरकारी स्कूलों में जाने वाले छात्रों के बीच लगभग 50% ड्रॉपआउट दर है।
शिक्षा मंत्री आतिशी ने साझा किया कि, 2015 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद जब हमने दिल्ली के सरकारी स्कूलों को देखा तो उनकी स्थिति बदहाल थी। स्कूलों में बुनियादी सुविधाएँ तक मौजूद नहीं थी और बच्चे बेहद ही दयनीय वातावरण में पढ़ने को मजबूर थे, और अपने आपको दूसरे दर्जे का नागरिक मानते थे। यही कारण है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में हमने शिक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाया।
हमने स्कूलों को शानदार बनाना शुरू कर दिया और छात्रों तथा शिक्षकों को हर ज़रूरी सुविधाएँ मुहैया करवाई।

हमने राज्य के कुल बजट का 25% शिक्षा को आवंटित किया। जो देश में किसी भी राज्य से अधिक था। शिक्षा पर सरकार के यह निवेश स्कूलों के बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण सुधार लाने में मददगार बनी। एक तब का दिन था और एक आज का दिन है जहां दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे सम्मान और गौरवान्वित महसूस करते है। दिल्ली सरकार के स्कूलों में शानदार वर्ल्ड क्लास बिल्डिंग, अत्याधुनिक सुविधाएं और यहां तक कि छात्रों की एथलेटिक प्रतिभा को निखारने के लिए सेमी ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल और एस्ट्रो टर्फ सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल के बुनियादी ढांचे भी शामिल हैं।
शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा, “अपने शिक्षकों के प्रोफेशनल डेवलपमेंट व उन्हें प्रेरित करने में भी केजरीवाल सरकार पीछे नहीं रही। हमने अपने शिक्षकों को हमने दुनिया भर के प्रसिद्ध संस्थानों, जैसे कि आईआईएम अहमदाबाद, और यूके, फ़िनलैंड और सिंगापुर आदि के विश्व-विख्यात संस्थानों में भेजकर उन्हें वर्ल्ड क्लास एक्सपोज़र दिया। उन्हें शिक्षा में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से अवगत कराया। इससे हमारे शिक्षक सशक्त और प्रेरित हुए तथा उनमें अपने स्कूलों के प्रति समर्पण का भाव जगा जिससे दिल्ली की शिक्षा क्रांति ने नई ऊँचाइयों को छुआ।
शिक्षा मंत्री ने साझा करते हुए कहा कि, दिल्ली सरकार अपने स्कूलों में पैरेंट्स को सक्रिय रूप से सीखने की प्रक्रिया में शामिल करती है और स्कूल तथा पैरेंट्स के बीच के गैप को भरने का काम करती है। इस दिशा में हमने मेगा पेरेंट्स-टीचर मीटिंग्स (मेगा पीटीएम) की शुरुआत की। जिसने पैरेंट्स को शिक्षकों के साथ सीधे बातचीत करने कका मौक़ा दिया। साथ ही स्कूल प्रबंधन समिति(एसएमसी) के सदस्य के रूप में पैरेंट्स दिल्ली सरकार के स्कूलों में कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने और विभिन्न पहलों के सफल कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा रहे है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि, इन परिवर्तनकारी प्रयासों के परिणाम आज पूरे विश्व के सामने है। दिल्ली सरकार के स्कूल पिछले कई सालों से लगातार बोर्ड परीक्षाओं में निजी स्कूलों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। हर साल हमारे स्कूलों से 1,000 से अधिक छात्र जेईई और नीट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाएँ क्वालीफाई करते हैं और देश भर के टॉप इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थानों में दाख़िला लेते हैं।
उन्होंने साझा किया कि सरकार ने स्टेम, 21st सेंचुरी हाई एंड स्किल्स, परफार्मिंग एंड विज़ुअल आर्ट्स, ह्युमैनिटिज सहित विभिन्न डोमेन के लिए स्कूल ऑफ़ स्पेशलाइज्ड एक्सीलेंस की शुरुआत की है। और इस साल केवल 4,400 सीटों के लिए लगभग 92,000 आवेदन आए जो दिल्ली के पैरेंट्स में केजरीवाल सरकार के स्कूलों के लिए बढ़ते विश्वास को दिखाता है।
शिक्षा मंत्री आतिशी ने साझा किया कि सरकार ने शिक्षा के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया और विभिन्न माइंडसेट करिकुलम की शुरुआत की। पिछले चार वर्षों में इसने हैप्पीनेस करिकुलम, एंत्ररेन्योरशिप माइंडसेट करिकुलम और देशभक्ति पाठ्यक्रम लॉन्च किया। एंत्रप्रेन्योरशिप माइंडसेट करिकुलम के माध्यम से, छात्रों को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का समाधान खोजने, नवाचार को बढ़ावा देने और उद्यमशीलता की भावना पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। सरकार ने एंटरप्रेन्योरशिप करिकुलम के हिस्से के रूप में बिजनेस ब्लास्टर्स प्रोग्राम भी शुरू किया,और छात्रों को अपने स्टार्ट अप के लिए 2000 रुपये प्रति छात्र के सीड मनी दी ताकि वे अपने बिजनेस आइडियाज को हकीकत में बदल सकें। इन पहलों की उल्लेखनीय सफलता ने कई स्टूडेंट बेस्ड स्टार्टअप को जन्म दिया है, और हमारे स्कूलों से नौकरी माँगने वालों की जगह नौकरी देने वालों की फ़ौज तैयार हो रही है।
दिल्ली के शिक्षा मॉडल को पंजाब ने हाल ही में अपनाना शुरू किया है और केवल एक साल में, राज्य भर के करीब 100,000 छात्र निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों में चले गए हैं। उन्होंने कहा, “दिल्ली और अब पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव इस बात का उदाहरण है कि अगर सरकारें बदलाव लाना चाहती हैं तो बदलाव निश्चित रूप से संभव है।”
मंत्री आतिशी ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा प्रणालियों के बदलाव के लिए न केवल सुलभ, उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा की आवश्यकता है, बल्कि कक्षाओं के भीतर जो पढ़ाया जाता है उसमें भी बड़े बदलाव की आवश्यकता है। और दिल्ली की शिक्षा क्रांति ने इसे संभव कर दिखाया है।






