दिल्ली में शुरू होगी एप आधारित प्रीमियम बस सेवा, सीएम ने प्रीमियम बस एग्रीगेटर स्कीम को दी मंजूरी

केजरीवाल सरकार की ऐतिहासिक पहल, देश में पहली बार दिल्ली में शुरू होगी एप आधारित प्रीमियम बस सेवा, सीएम ने प्रीमियम बस एग्रीगेटर स्कीम को दी मंजूरी

एप आधारित प्रीमियम बस सेवा शुरू होने से सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ेगा, तो वायु प्रदूषण भी कम होगा

पूरी तरह से वातानुकूलित ये बसें वाई-फाई, जीपीएस, सीसीटीवी की सुविधा से लैस और बहुत ही आरामदायक होंगी

घर बैठे एप से अपनी सीट बुक कर सकेंगे, बस में टिकट नहीं मिलेगा और खड़े होकर सफर की अनुमति नहीं होगी

Eros Times: सीएनजी बस तीन साल से अधिक पुरानी नहीं होंगी, एक जनवरी 2025 के बाद केवल इलेक्ट्रिक बस ही बेड़े में शामिल की जाएंगी लाइसेंसी ऑपरेटर के लिए बेड़े में 25 बस शामिल करना अनिवार्य होगा, जिनमें कम से कम 9 सीट होनी जरूरी है ऑपरेटर ही बस का रूट और किराया तय करेगा, जो डीटीसी बसों के किराए से कम नहीं होना चाहिए हमारी सरकार ने मई 2016 में प्रीमियम बस स्कीम को मंजूरी दी, लेकिन तत्कालीन एलजी नजीब जंग ने मंजूरी देने से इन्कार कर दिया जून 2016 में भाजपा नेता बिजेंद्र गुप्ता ने एसीबी से स्कीम में भ्रष्टाचार होने की शिकायत की, लेकिन जांच में कुछ नहीं निकला 2017-19 तक ट्रांसपोर्ट विभाग ने आपत्ति लगा दी कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ये स्कीम नहीं लाई जा सकती अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने एक्ट में संशोधन किया, इसके बाद स्कीम लाने का रास्ता साफ हो पाया 18 अगस्त 2022 से 8 मई 2023 तक पब्लिक कमेंट्स और कानूनी पुनरीक्षण के बाद स्कीम को मंजूरी देकर एलजी साहब के पास भेज रहे हैं विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस लग्जरी बसों में सफर करने का सपना देख रहे दिल्ली के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। केजरीवाल सरकार के कड़े प्रयासों की बदौलत दिल्ली में एप आधारित प्रीमियम बस सेवा शुरू होने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। शुक्रवार को ट्रांसपोर्ट सेक्टर में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए सीएम अरविंद केजरीवाल ने प्रीमियम बस एग्रीगेटर स्कीम 2023 को अपनी मंजूरी दे दी। सीएम ने कहा कि प्रीमियम बस सेवा शुरू होने से सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ेगा और इससे वायु प्रदूषण में भी कमी आएगी। पूरी तरह से वातानुकूलित ये बसें वाई-फाई, जीपीएस, सीसीटीवी की सुविधा से लैस होंगी, जिसमें सफर करना बहुत ही आरामदायक होगा। प्रीमियम बसों के लिए एग्रीगेटर स्कीम लाने वाला दिल्ली देश का पहला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में सरकार बनने के बाद से ही हम ट्रैफिक और वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से प्रीमियम बस एग्रीगेटर्स स्कीम लाने की कोशिश कर रहे थे। 8 साल के लंबे संघर्ष के बाद अब ऐसा लग रहा है कि ये स्कीम जल्द ही आ जाएगी।

मिडिल व अपर मिडिल क्लास को निजी वाहन के बजाय लग्जरी बसों में सफर करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए ये स्कीम लाई जा रही है

अरविंद केजरीवाल ने स्कीम के बारे में बताते हुए कहा कि दिल्ली जब मेट्रो आई थी, तब बहुत सारे मिडिल और अपर मिडिल क्लास के लोगों ने अपनी गाड़ियां छोड़कर मेट्रो से सफर करना शुरू कर दिया। लेकिन धीरे-धीरे मेट्रो में भीड़ बढ़ने लगी, तो लोग दोबारा अपने निजी वाहन पर आ गए। अब दिल्ली में बसों की संख्या भी काफी ज्यादा बढ़ गई है। बसों में अब बहुत ज्यादा भीड़ नहीं होती है। वहीं, अक्सर देखने में आता है कि बसों में अधिकतर लोअर मिडिल क्लास और इकोनॉमिक क्लास के लोग यात्रा करते हैं। मिडिल और अपर मिडिल क्लास को अपने निजी वाहनों छोड़कर बसों में सफर करने के लिए प्रेरित करने के लिए ये स्कीम लाई जा रही है। इसके तहत प्रीमियम बसों (लग्जरी बसें) के एग्रीगेटर्स को लाइसेंस दिए जाएंगे। एक लाइसेंस होल्डर कम से कम 25 लग्जरी बसें लेकर आएगा, जो दिल्ली की सड़कों पर चलेंगी। 

स्कीम के तहत संचालित बसों के चलने और गंतव्य तक पहुंचने का समय निर्धारित होगा

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि ये लग्जरी बसें पूरी तरह से वातानुकूलित होंगी। बस में कम से कम 9 सीट होनी चाहिए। इन बसों में वाईफाई, जीपीएस, सीसीटीवी होगा। इन बसों में खड़े होकर सफर करने की अनुमति नहीं होगी, हर एक को सीट मिलेगी। इन बसों में सीट डिजिटली बुक करानी होगी। एप पर जाकर कोई भी इन बसों में अपने लिए सीट बुक कर सकेगा। किराए का भुगतान केवल डिजिटल माध्यम से ही हो सकेगा। बस के अंदर टिकट नहीं मिलेगा। ये बस काफी आरामदेह और सुविधाजनक होगी। बस के चलने और गंतव्य तक पहुंचने का एक निश्चित समय होगा। हमें उम्मीद है कि इस स्कीम को शुरू होने के बाद बहुत सारे लोग अपने निजी वाहन छोड़कर इन लग्जरी बसों से सफर करेंगे। इससे दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर होगी और वायु प्रदूषण भी कम होगा।

स्कीम में शामिल होने वाली इलेक्ट्रिक बसों पर लाइसेंस फीस नहीं ली जाएगी

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि इस स्कीम के अंतर्गत दिल्ली की सड़कों पर चलने वाली सीएनजी बसें तीन साल से अधिक पुरानी नहीं होगी। एक जनवरी 2025 के बाद जो नई बसें इस स्कीम में शामिल की जाएंगी, वो केवल इलेक्ट्रिक बसें होंगी। लाइसेंस लेने वाले एग्रीगेटर्स के बेड़े में कम से कम 25 बसें होनी आवश्यक है। इस स्कीम में शामिल होने वाली इलेक्ट्रिक बसों पर लाइसेंस फीस नहीं ली जाएगी। इससे इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा मिलेगा और अधिक से अधिक ई-बसें आ सकेगी।

अरविंद केजरीवाल से प्रीमियम बस स्कीम की पॉलिसी की खासियत बताते हुए कहा कि इन बसों का रूट दिल्ली सरकार तय नहीं करेगी, बल्कि बस ऑपरेटर तय करेंगे। जहां उसको लगता है कि अधिक सवारी मिल सकती हैं, उन एरिया में बसें ज्यादा चलेंगी। इससे ट्रैफिक कम होगा। रूट तय करने के बाद बस ऑपरेटर के लिए दिल्ली सरकार को सूचित करना अनिवार्य होगा। इन बसों का किराया भी बस ऑपरेटर ही तय करेगा। इसमें एक शर्त ये होगी कि दिल्ली सरकार के डीटीसी और एसी बसों का जो सबसे ज्यादा किराया है, उससे कम नहीं होना चाहिए, उससे ज्यादा हो सकता है। क्योंकि ये लग्जरी बसें हैं, इसलिए कम नहीं होना चाहिए। कम होने से ये डीटीसी बसों से मुकाबला करने लग जाएंगी। 

2016 में प्रीमियम बस एग्रीगेटर स्कीम लाने का सिलसिला चालू हुआ था

अरविंद केजरीवाल ने प्रीमियम बस एग्रीगेटर स्कीम लाने के पीछे के संघर्ष को भी बताया। उन्होंने बताया कि 2016 में प्रीमियम बस सेवा शुरू करने का सिलसिला चालू हुआ था। मई 2016 में दिल्ली सरकार ने प्रीमियम बस स्कीम को लाने का अप्रूवल दे दिया। लेकिन तत्कालीन एलजी नजीब जंग ने स्कीम को अपनी मंजूरी देने से मना कर दिया। इसके बाद जून 2016 में भाजपा के बिजेंद्र गुप्ता ने एंटी करप्शन ब्रांच में शिकायत की कि भ्रष्टाचार हो गया, जबकि ये स्कीम अभी आई नहीं थी। स्कीम आई नहीं थी और भ्रष्टाचार का होने का आरोप लगा दिया गया। इसके बाद भी इसकी पूरी जांच हुई और हर मामले की तरह इसमें भी कुछ नहीं निकला। 

हमें उम्मीद है कि एलजी साहब जल्द ही स्कीम को अपनी मंजूरी दे देंगे

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि 2017 से 2019 के बीच में ट्रांसपोर्ट विभाग ने आपत्ति लगाई कि मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत ये स्कीम नहीं लाई जा सकती। अगस्त 2019 में भारत सरकार ने मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन किया और उस संशोधन के तहत बस एग्रीगेटर्स स्कीम लाई जा सकती थी। 2020-21 में कोरोना महामारी आ गई थी। इसके बाद 2022 में हमने इस पूरी स्कीम को दोबारा ड्रॉफ्ट किया। 18 अगस्त 2022 को जनता के सुझाव के लिए डाला गया। 8 सितंबर तक लोगों के सुझावों पर अमल करते हुए 8 मई को मुख्यमंत्री द्वारा अपनी मंजूरी दी गई और 25 मई को एलजी साहब से मंजूरी मिली। सीएम ने बताया कि एलजी से स्कीम का ड्रॉफ्ट मंजूर होकर आया तो 29 मई को एक बार फिर इसे लोगों के कमेंट्स के लिए डाला गया। अब लोगो के जितने कमेंट्स आए हैं और 27 जुलाई ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा किए गए स्टेकहोल्डर कंसल्टेंट में आए कमेंट आए, उनको शामिल किया गया। एलजी साहब द्वारा मंजूरी की गई स्कीम में बहुत मामूली बदलाव थे। इन बदलावों को शामिल करते हुए मैंने इस स्कीम आज अपनी मंजूरी दे दी है। अब इसे एलजी साहब के पास भेजा जा रहा है। मुझे उम्मीद है कि एलजी साहब जल्द ही इसे मंजूरी दे देंगे।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली पूरे देश का पहला शहर होगा, जहां पर प्रीमियम बस एग्रीगेटर स्कीम आ रही है। मेरा मानना है कि इससे दिल्ली के लोगों को बहुत सुविधा मिलेगी। दिल्ली में ट्रैफिक भी कम होगा। दिल्लीवालो को अब विश्वस्तरीय ट्रांसपोर्ट सुविधा भी मिलेगी और प्रदूषण भी कम होगा। एलजी साहब से मंजूरी मिलने के 90 दिन के अंदर स्कीम लागू हो जाएगी। 

प्रीमियम बस स्कीम 2023 की खास बातें

प्रीमियम बसों के लिए एग्रीगेटर स्कीम तैयार करने वाला दिल्ली देश का पहला राज्य है। प्रीमियम बस का अर्थ है एक लक्जरी सार्वजनिक बस, जिसमें कम से कम 09 यात्रियों की बैठने की क्षमता हो और पूरी तरह वातानुकूलित हो। इसमें रिक्लाइनिंग सीटों के साथ- साथ वाई-फाई, जीपीएस और सीसीटीवी की सुविधा होगी। 

स्कीम लाने का उद्देश्य

– दिल्ली में लोगों को अपने निजी वाहनों से प्रीमियम बसों में ट्रांसफर करने के लिए प्रोत्साहित करना, जिससे सार्वजनिक परिवहन में एक आदर्श बदलाव आएगा।

– ये प्रीमियम बसें सार्वजनिक परिवहन के तहत अधिक सुविधा, विश्वसनीयता और आराम प्रदान करेंगी।

– ये बसें सड़क पर वाहनों को कम करने में अहम भूमिका निभाएंगी, जिससे शहर में भीड़भाड़ और वायु प्रदूषण को कम करने में मदद करेंगी।

लाइसेंस प्राप्त करने का पात्रता मानदंड

1 – संचालन की निम्नलिखित के साथ-साथ सार्वजनिक/साझा परिवहन में वाहनों के संचालन व प्रबंधन का न्यूनतम 3 वर्ष का अनुभव होना चाहिए।

ए- प्रत्येक वर्ष न्यूनतम 100 यात्री बसों का बेड़ा या

बी- प्रत्येक वर्ष न्यूनतम 1000 यात्री कारों का बेड़ा

सी- यात्री कारों और बसों का मिश्रित बेड़ा हो, जिसमें 100 बसों का न्यूनतम बेड़ा जहां 10 कारें 1 बस के बराबर हैं।

2- कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों के मामले में यात्री वाहन के इस्तेमाल के संबंध में सभी लागू शर्तों का पालन करना होगा।

ए- सीएनजी होने पर बसें 3 वर्ष से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए

बी- 1 जनवरी 2025 के बाद शामिल होने वाली नई बसें केवल इलेक्ट्रिक होंगी।

सी- एनसीआर के भीतर कॉर्पाेरेट/शाखा कार्यालय होना चाहिए

शुल्क और इटरेस्ट फ्री सिक्योरिटी डिपोसिट

(1) लाइसेंस की मंजूरी के लिए एप्लीकेशन के साथ निम्नलिखित शुल्क और इटरेस्ट फ्री सिक्योरिटी डिपोसिट भी देना होगा

लाइसेंस के लिए जमा कराए जाने वाले शुल्क

1.लाइसेंस की मंजूरी के लिए पांच लाख रुपये की राशि देनी होगी। 

2.लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए 2500 रुपए देने होंगे

3.डुप्लीकेट लाइसेंस जारी करने के लिए 2500 रुपए देने होंगे। 

4.लाइसेंसधारी को अपना पता बदलने के लिए 2500 रुपए देने होंगे। 

लाइसेंस के लिए सिक्योरिटी डिपोजिट

1. सौ प्रीमियम बसों के लिए एक लाख रुपये का सिक्योरिटी डिपोजिट करना होगा।

2. एक हजार प्रीमियम बसों के लिए सिक्योरिटी डिपोजिट 2.5 लाख रुपए होगा।

3. एक हजार से ज्यादा प्रीमियम बसों के लिए पांच लाख का सिक्योरिटी डिपोजिट करना होगा।

2- स्वच्छ परिवहन के विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक बसों पर कोई लाइसेंस शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

3- दिल्ली ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट द्वारा समय-समय पर बताए जाने पर बस क्यू शेल्टर्स के इस्तेमाल के लिए एडिशनल स्टैंड शुल्क का देना होगा।

किराया और टिकटिंग

(1) लाइसेंस धारक किसी भी रूट/डेस्टीनेशन के लिए उचित फेयर स्ट्रक्चर तय करने के लिए स्वतंत्र होगा। आम जनता की जानकारी के लिए किराया मोबाइल और वेब-बेस्ड एप्लिकेशन पर उप्लब्ध होगा।

(2) दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की एसी बसों के टिकट के दामों में बदलाव की पूरी गुंजाइश होगी, लेकिन इसकी बेसिक कीमत अधिकतम किराए से कम नहीं होगी

(3) केवल पहले से बुक किए गए डिजिटल टिकट की अनुमति होगी। बस के अंदर टिकट जारी नहीं किया जाएगा।

(4) यात्रियों से पेमेंट इलेक्ट्रॉनिक/डिजिटल मोड से ही लिया जाएगा।

बस क्यू शेल्टर्स

(1) इस योजना में शामिल बसों को चिंहित बस क्यू शेल्टर्स से यात्रियों को लेने और छोड़ने की अनुमति है। जिसके लिए उन्हें दिल्ली परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास निगम लिमिटेड को समय-समय पर अलग से शुल्क देना होगा।

इसके अलावा प्रीमियम बसों को नोटिफाइड बस स्टॉप्स के साथ-साथ अन्य जगहों से भी यात्रियों को ले जाने और छोड़ने की अनुमति है, लेकिन इसके लिए इस योजना में अथॉरिटी से पहले अनुमति लेना जरूरी है। इस मामले में जुड़े सभी मुद्दों के लिए परिवहन विभाग द्वारा जारी की गई एनओसी के बावजूद भी इंचार्ज अथॉरिटी का आदेश ही मान्य होगा।

ब्रांडिंग और विज्ञापन

(1) लाइसेंस धारक को प्रीमियम बस के अंदर और बाहर ब्रांडिंग करने और विज्ञापन स्थान बेचने का अधिकार होगा, लेकिन इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है जैसे-

(ए) प्रीमियम बस के बाहरी हिस्से के आगे और पीछे का इस्तेमाल ब्रांडिंग और विज्ञापन के लिए नहीं किया जाएगा। क्योंकि वह जगह दिल्ली प्रीमियम बस सेवा की पहचान आसानी से हो सके, इसके लिए परिवहन विभाग द्वारा लगाए गए वह लोगो/पैटर्न डिसप्ले के लिए पहले से आरक्षित है।

(बी) प्रीमियम बस के बाहर बाएं और दाएं हिस्से को सिविक एजेंसियों द्वारा बताए गए संबंधित नियमों के तहत ही विज्ञापन और ब्रांडिंग के लिए अनुमति दी जाएगी। साथ ही इसपर लागू होने वाला जीएसटी शुल्क देना भी जरूरी है।

(सी) इसके साथ ही विज्ञापन के आकार और इसकी प्रकृति के बारे में इंचार्ज अथॉरिटी से पहले से अनुमति लेना जरूरी है।

(2) मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के अनुसार किसी भी परिस्थिति में लाइसेंस धारक द्वारा इसे सरकारी घोषित नहीं किया जाएगा।

लाइसेंस का निलंबन एवं रद्द होना

(1) लाइसेंस धारक को सुनवाई का मौका देने के बाद इंचार्ज अथॉरिटी लाइसेंस को 6 महीने से कम समय के लिए रद्द या निलंबित कर सकता है, यदि उसे लगता है कि-

(ए) मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के तहत अगर लाइसेंस धारक से जुड़ी किसी भी प्रीमियम बस में कोई डिफॉल्ट या कानूनी रूप से चूक पाई जाती है।

(बी) कोई भी प्रीमियम बस लेन ड्राइविंग नियमों का उल्लंघन करते हुए पाई जाती है. जैसे कि तेज़ गति और लापरवाही से गाड़ी चलाना।

(सी) यदि लाइसेंस धारक मोटर व्हीकल एक्ट 1988 और उसके तहत बनाए गए नियम, इस योजना में बताए गए या निर्धारित दायित्वों को पूरा करने में विफल रहता है।

(डी) कोई भी प्रीमियम बस चालक महिलाओं/विकलांगों/वरिष्ठों नागरिकों या अन्य यात्री के साथ किसी भी दुर्व्यवहार का दोषी पाया जाता है। 

(ई) किसी भी प्रीमियम बस चालक का नशे और नशीली दवाओं के प्रभाव में चालान पाया जाता है।

उक्त शर्तों के अलावा मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के अध्याय 13 के प्रावधान , दिल्ली मोटर व्हीकल नियम 1993 के कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा इस पर कार्रवाई शुरू करने के लिए लागू रहेंगे।

(2) कोई परमिट रद्द या निलंबित करने की किसी स्थिति में इंचार्ज अथॉरिटी के पास यह अधिकार होता है कि पह परमिट को रद्द करने या निलंबित करने की जगह लाइसेंस धारक से सिक्योरिटी डिपोजिट के आधे के बराबर राशि वसूल कर सकता है। यह धारा 5(बी) में बताए गए लाइसेंस धारक द्वारा सिक्योरिटी मनी डिपोजिट करके लगाई गई प्रीमियम बसों की संख्या से अलग है।

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