नई दिल्ली।
विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राजस्थान तथा हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल पंडित कलराज मिश्रा ने University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे भारतीय संविधान की मूल भावना, न्याय और सामाजिक समरसता के विपरीत बताया है।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और न्याय सुनिश्चित करना निस्संदेह आवश्यक है, लेकिन किसी एक वर्ग को निरंतर संदेह के दायरे में रखकर उसके विरुद्ध निगरानी एवं अनुशासनात्मक तंत्र खड़ा करना असंवैधानिक होने के साथ-साथ समाज के लिए भी घातक सिद्ध हो सकता है।
2012 के UGC नियमों से तुलना, निष्पक्षता पर सवाल
पंडित कलराज मिश्रा ने स्मरण कराया कि वर्ष 2012 में UGC द्वारा बनाए गए नियमों में शिकायत निवारण की व्यवस्था सभी वर्गों के लिए समान, निष्पक्ष और संतुलित थी। उस व्यवस्था में किसी भी छात्र, शिक्षक या कर्मचारी को पूर्वाग्रह के आधार पर दोषी मानने की प्रवृत्ति नहीं थी।
उन्होंने कहा कि नए प्रस्तावित विनियमों में शिकायत और जांच प्रक्रिया एकतरफा प्रतीत होती है, जिससे निष्पक्ष न्याय की अवधारणा कमजोर होती है।
सुप्रीम कोर्ट के 2019 के निर्णय का हवाला
कलराज मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2019 के एक ऐतिहासिक निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि कोई भी जांच प्रक्रिया निष्पक्ष, संतुलित और पूर्वाग्रह-रहित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय का एक अनिवार्य पक्ष यह है कि झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों से निर्दोष व्यक्तियों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा की जाए।
सामाजिक समरसता के विरुद्ध नियम: परिषद
विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के उद्देश्य को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा,
“परिषद का मूल ध्येय ब्राह्मण समाज को धुरी बनाकर समाज में सामाजिक समरसता स्थापित करना है, जबकि UGC के ये नए विनियम समाज में विभाजन की खाई पैदा करने का कार्य करते हैं।”
उन्होंने चेतावनी दी कि न्याय की आड़ में किसी भी वर्ग का दमन स्वीकार्य नहीं हो सकता।
संविधान के मूल अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
कलराज मिश्रा ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 सभी नागरिकों को समानता, भेदभाव से मुक्ति और सम्मानजनक जीवन का अधिकार प्रदान करते हैं। उनके अनुसार, प्रस्तावित विनियम इन मूल अधिकारों का प्रत्यक्ष उल्लंघन करते हैं।
विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद की प्रमुख मांगें
परिषद ने UGC और भारत सरकार के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
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इक्विटी प्रमोशन विनियम 2026 को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए,
अथवा -
जाति-आधारित एकतरफा दंडात्मक प्रावधानों को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
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सभी वर्गों के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं स्टाफ को शिकायत करने का समान अधिकार दिया जाए।
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शिकायत निवारण प्रणाली को निष्पक्ष, पारदर्शी और सभी वर्गों के लिए समान बनाया जाए।
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झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत करने वालों के विरुद्ध दंड का स्पष्ट प्रावधान हो।
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शिकायत निवारण समितियों में सभी वर्गों का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
शिक्षा मंत्री से प्रतिनिधिमंडल की भेंट
इस विषय को लेकर परिषद के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री सतीश शर्मा, अंतर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री के.के. शर्मा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री माधव शर्मा, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्री शरद शर्मा, राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख श्री अरविंद भारद्वाज, दिल्ली प्रदेश युवा अध्यक्ष श्री हरीश शर्मा एवं श्री मुकेश शर्मा उपस्थित रहे।
वक्तव्य के अंत में पंडित कलराज मिश्रा ने भारत सरकार से इन विनियमों की शीघ्र समीक्षा कर आवश्यक संशोधन करने की मांग की और स्पष्ट किया कि न्याय, समानता और सामाजिक समरसता से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।






