WildLife फोटोग्राफर योगेश ने रवि सरीन फिल्म इंस्टीट्यूट के छात्रों को सीखाए फोटोग्राफी के गुण

 

Eros Times: नोएडा प्रसिद्ध वन्यजीव फोटोग्राफर योगेश भाटिया आज नोएडा फिल्म सिटी स्थित रवि सरीन फिल्म इंस्टीट्यूट में छात्रों से मिलने पहुंचे। इस अवसर पर उनका स्वागत फिल्म इंस्टीट्यूट के निदेशक रवि सरीन और उनकी पत्नी दीपाली सरीन ने किया। रवि सरीन स्वयं वन्यजीवों के प्रति विशेष रुचि रखते है और योगेश भाटिया के साथ जंगल जाकर वास्तविकता का अंदाजा लेना चाहते है। बताते चले कि 23 अक्टूबर को प्रत्येक वर्ष वर्ल्ड स्नो लेपर्ड दिवस यानी विश्व हिम तेंदुआ दिवस मनाया जाता है, उसी सिलसिले में योगेश भाटिया का लैक्चर था।

योगेश भाटिया उन खुशकिस्मत वन्यजीव फोटोग्राफरों में एक है जिन्हे हिम तेंदुए की फ़ोटो खींचने का अवसर मिला है हिम तेंदुए के फ़ोटो खींचना आसान नही था क्योंकि बर्फ में पता ही नही चलता कि हिम तेंदुआ कहां है वो बर्फ में घुलमिल जाता है।

योगेश भाटिया ने विद्यार्थियों को बताया स्नो लेपर्ड की संख्या भारत में करीब 6/700 है और विश्व में ये संख्या 5/6000 है। हिम तेंदुआ 18000 फिट की ऊंचाई पर हिमालय क्षेत्र में पाया जाता है,योगेश भाटिया के अनुसार विश्व के करीब 200 देशों में से हिम तेंदुआ सिर्फ 12 देशों में पाया जाता है। जिसमें भारत चीन भूटान नेपाल पाकिस्तान रूस और मंगोलिया मुख्य देश है।

हिम तेंदुआ दिवस में विश्वभर के जीव जन्तु प्रेमी और हम वन्यजीव फोटोग्राफर खुद से वायदा करते है  जीव जन्तु के जीवन को बचाने की कोशिश लगातार होते रहनी चाहिए।एक छात्र के प्रश्न कि आए दिन सुनने पढ़ने में आता है किसी जंगली जानवर ने हमला कर दिया जवाब में भाटिया ने कहा गांव कस्बों में कस्बे शहर में और शहर कंक्रीट के जंगलों में तब्दील होते जा रहे है। वन्यजीव फोटोग्राफर योगेश भाटिया कहते है हम उनकी दुनियां में दखल देते है उनकी जगहों पर रिहाईश बनाते है और जब कोई चीता किसी जानवर या इंसान पर आक्रमण करता है तो हम कहते जानवर खूंखार हो गया।

हम किसी के घर को अपना घर बना लेते है फिर शिकायत भी करते है आधुनिकता बुरी नही है लेकिन इंसानी सहूलियत के लिए बेजुबान जानवरों को उनकी जगह से बेदखल करने वालो को कुछ जिम्मेदारी तो लेनी पड़ेगी। यह लड़ाई चलती रहेगी। इसमें सामंजस्य बनाना पड़ेगा। वन्यजीव फोटोग्राफी की दुनिया में योगेश भाटिया का नाम काफ़ी प्रसिद्ध है। उन्होंने 60 वर्ष की उम्र के बाद इस क्षेत्र में कदम रखा, लोग रिटायरमेंट की तैयारी करते है इस उम्र में,

बचपन से ही फ़ोटोग्राफी का शौक तो था लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारी और व्यापार में व्यस्तता के चलते शौक को असल जामा नही पहना पाया ।जब दोनो बच्चे जर्मनी में अपने अपने कामों में व्यवस्थित हो गए तो वाइल्डलाइफ फ़ोटोग्राफी के शौक को व्यवसायिक पहचान दी और विश्व में पहचान बनाई न केवल  साथी फोटोग्राफरों को प्रेरित किया, बल्कि युवा पीढ़ी को भी अपने दृष्टिकोण से प्रेरित किया। 

उन्होंने 14000 फीट की ऊँचाई पर हिम तेंदुआ की शानदार तस्वीरे कैद की, इस खुबसूरत हिम तेंदुआ की फोटो खींचने के लिए मुझे 8 घण्टे तक एक ही स्थान पर इंतजार करना पड़ा लेकिन कठिन धैर्य के बाद जो परिणाम आया वो फोटो के माध्यम से आपके सामने है। भाटिया की फ़ोटोग्राफी वन्यजीवों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। उनकी मेहनत और समर्पण का परिणाम है यह शानदार फ़ोटो जिसे सिर्फ धैर्य और दृढ़ता के चलते पाया जा सकता है।

भाटिया कहते है फ़ोटो खींचने के लिए उपकरण जरूरी है लेकिन पहले आप जंगल जीव जंतुओं से प्यार तो करिए फ़ोटो तो आप मोबाइल से भी खींच सकते है । सोनी आल्फा 1 कैमरे के साथ जुड़े 400 मिमी जी मास्टर एफ 2.8 लेंस के साथ योगेश भाटिया ने उपकरणों का उपयोग करके अद्वितीय तस्वीरें बनाई। उनके एक फ़ोटो हाथियों के परिवार को मुंबई की तमाम होर्डिंग में देखा जा सकता है।

भाटिया वन्यजीवों के प्राकृतिक सौंदर्य को उज्जवल और कठिन दृश्यों के साथ मिलाकर प्रस्तुत करते हैं। 

उनके कैमरे ने अफ्रीकी सवानों और भारतीय जंगलों की जटिलता को प्रकट किया है प्रत्येक फ़ोटो वन्यजीवों की खासियत और सहनशीलता की प्रशंसा करती है। योगेश भाटिया की कहानी वन्यजीवों के प्रति आकर्षित करने वाली नई पीढ़ी को प्रेरित करती है, उनके काम ने अफ्रीकी और भारतीय दिलों में वन्यजीवों के प्रति आकर्षण को बढ़ावा दिया है उन्होने फिल्म इंस्टीट्यूट के छात्रों को अपने साथ जंगल में चलने और फ़ोटोग्राफी सिखाने की प्रतिबद्धता दिखाई। बहुत से छात्रों ने जंगल जाने में रुचि दिखाई है । 

भाटिया की प्रेरणास्त्रोत की भूमिका सीमाओं को पार करती है, संस्कृतियों को जोड़ती है, और प्रकृति की महानता की प्रतिष्ठा को उच्च स्थान पर लाने में मदद करती है। जैसे-जैसे उनका काम आगे बढ़ता है, योगेश भाटिया की दिलचस्प छवियाँ वन्यजीवों और उनके आवासियों के प्रति गहरी प्रशंसा को बढ़ावा देती है, 

हमें कला, प्राकृति, और मानव आत्मा के बीच के गहरे संबंध की महत्वपूर्ण बातों की याद दिलाती है। योगेश भाटिया का मानना है आज सबके हाथ में स्मार्ट फ़ोन है मैं बच्चो से अपनी युवा  साथियों से कहना चाहता हूं प्रतिदिन कुछ फोटो प्रकृति के अवश्य खींचे इससे आपका प्रकृति से लगाव बढ़ेगा उसको बचाने की चाह बढ़ेगी।

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