EROS TIMES: भारत में रेलवे और रक्षा मंत्रालय के बाद सबसे ज्यादा जमीन वक्फ बोर्ड के पास बताई जाती है। जबकि मुस्लिम समाज का साफ़ कहना है
पता नही ये झूठ किसने फैलाया है?कि वक़्फ़ के पास रेलवे और डिफेन्स के बाद सबसे ज़्यादा ज़मीन है!
जबकि सिर्फ़ तमिलनाडु के हिन्दू बोर्ड के पास 3.5 लाख एकड़, आंध्र प्रदेश में 4 लाख 65 हज़ार एकड़ और वक़्फ़ की पूरे भारत मे सच्चर कमेटी के मुताबिक कुल संपत्ति 6 लाख एकड़ है, 9.5 लाख एकड़ का आंकड़ा कहाँ से आया किस आधार पर आया किसी को इसके बारे में ठीक से नहीं है
इसी वक्फ बोर्ड से जुड़े एक्ट में बदलाव के लिए केंद्र सरकार आज संसद में बिल पेश करेगी। विपक्ष के नेता और मुसलमानों का एक बड़ा तबका इसके विरोध में हैं।
वक्फ कानून में सरकार क्या-क्या बदलने जा रही, मुस्लिमों का एक बड़ा तबका इसके खिलाफ क्यों है और इसके पीछे की राजनीति क्या है; इस सभी पहलुओं जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: वक्फ संशोधन बिल पर अब तक क्या-क्या हुआ है?
जवाब: 8 अगस्त 2024 को लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश किया गया। देश भर में इसके खिलाफ प्रदर्शन हुए। इसके बाद बिल के ड्राफ्ट को संसद की जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) को भेज दिया गया। 27 जनवरी 2025 को JPC ने बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी देकर JPC में शामिल NDA सांसदों के सुझाए 14 संशोधनों (बदलाव) को स्वीकार किया, विपक्षी सांसदों के संशोधनों को खारिज कर दिया।
13 फरवरी 2025 को JPC की रिपोर्ट संसद में पेश की गई। 19 फरवरी 2025 को कैबिनेट की बैठक में बिल को मंजूरी मिल गई और अब 2 अप्रैल को संसद में पेश होगा। 8 घंटे की बहस के बाद इस पर वोटिंग होगी।
सवाल-2: वक्फ आखिर होता क्या है?
जवाब: ‘वक्फ’ अरबी भाषा के ‘वकुफा’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है- ठहरना, रोकना या निषिद्ध करना। 27 देशों के वक्फ की संपत्तियों पर काम करने वाली संस्था ‘औकाफ प्रॉपर्टीज इन्वेस्टमेंट फंड’ (AIPF) के मुताबिक, कानूनी शब्दों में ‘इस्लाम में कोई व्यक्ति जब धार्मिक वजहों से या ईश्वर के नाम पर अपनी प्रॉपर्टी दान करता है तो इसे प्रॉपर्टी वक्फ कर देना कहते हैं।’ फिर वो चाहे कुछ रुपए की रकम हो या बेशकीमती हीरे-जवाहरात से भरी हुई एक पूरी इमारत।
अमूमन ऐसी प्रॉपर्टीज को ‘अल्लाह की संपत्ति’ कहा जाता है। अपनी प्रॉपर्टी वक्फ को देने वाला इंसान ‘वकिफा’ कहलाता है। वकिफा ये शर्त रख सकता है कि उसकी संपत्ति से होने वाली आमदनी सिर्फ पढ़ाई पर या अस्पतालों पर ही खर्च हो।
इन संपत्तियों को बेचा या धर्म के अलावा किसी और मकसद के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। पैगंबर मोहम्मद साहब के समय खजूर के 600 पेड़ों का एक बाग वक्फ का सबसे पहला उदाहरण माना जाता है। इससे होने वाली कमाई से मदीना के गरीबों की मदद की जाती थी।
सवाल-3: भारत में वक्फ की कितनी प्रॉपर्टीज हैं?
जवाब: भारत में वक्फ की परंपरा का इतिहास 12वीं सदी
में दिल्ली सल्तनत के समय से माना जाता है। भारत में ज्यादातर वक्फ की प्रॉपर्टीज पर मस्जिदें, मदरसे, कब्रिस्तान और यतीमखाने यानी मुस्लिम बच्चों के लिए अनाथालय खुले हैं। कई प्रॉपर्टीज खाली पड़ी हैं या फिर उन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। जिसको खाली कराने के लिए वक़्फ कमेंटी अपना दावा करती है तो देश भर में वक्क को इसका विरोध झेलना पड़ता है।
सवाल-4: वक्फ की संपत्तियों का कामकाज कैसे और किस कानून के तहत चलता है?
जवाब: आजादी के बाद 1954 में वक्फ एक्ट बना, 1995 में कुछ संशोधनों के साथ नया वक्फ एक्ट बना। 2013 में भी कई बदलाव हुए। इसके तहत…
1.वक्फ बोर्ड नाम का एक ट्रस्ट बनाया गया। इसी के साथ इस्लाम से जुड़ी सभी धार्मिक संपत्ति वक्फ बोर्ड के हिस्से आ गईं।
2.लगभग सभी मुस्लिम धर्मस्थल वक्फ बोर्ड एक्ट के तहत आते हैं, लेकिन कुछ अपवाद भी हैं। मसलन, ये कानून अजमेर शरीफ दरगाह पर लागू नहीं होता। इसके मैनेजमेंट के लिए दरगाह ख्वाजा साहिब एक्ट 1955 बना हुआ है।
3.मौजूदा वक्फ एक्ट के तहत वक्फ संपत्तियों का कामकाज देखने के लिए बनी सेंट्रल वक्फ काउंसिल भारत सरकार को वक्फ से जुड़े मुद्दों पर सलाह देती है। इसके अलावा राज्यों में दो 2 बोर्ड्स होते हैं- सुन्नी वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड।
4.इन बोर्डों का एक चेयरमैन होता है, दो सदस्य राज्य सरकार तय करती है। इसमें मुस्लिम विधायक, मुस्लिम सांसद, मुस्लिम टाउन प्लानर, मुस्लिम एडवोकेट और मुस्लिम विद्वान शामिल होते हैं। प्रॉपर्टीज का लेखा-जोखा रखने के लिए बोर्ड का एक सर्वे कमिश्नर भी होता है। सभी मेंबर्स का कार्यकाल 5 साल का होता है। राज्य सरकार डिप्टी सेक्रेटरी रैंक के IAS ऑफिसर को बोर्ड का CEO बनाती है। ये बोर्ड के फैसलों को लागू करता है।
5.वक्फ से जुड़े मामलों के लिए जो कोर्ट बना है, उसे वक्फ बोर्ड ट्रिब्यूनल कहते हैं।
सवाल-5: वक्फ एक्ट में अब क्या बदलाव किए जा रहे हैं?
जवाब: वक्फ संशोधन बिल में 14 बदलाव प्रस्तावित हैं…
वक्फ एक्ट में 3 कैटेगरी में होंगे कुल 14 बड़े बदलाव
1. वक्फ बोर्ड के स्ट्रक्चर में बदलाव
। आर्टिकल 9 और 14 में बदलाव कर 2 महिला मेंबर शामिल होंगी।
॥ 2 गैर-मुस्लिम मेंबर शामिल होंगे।
III शिया, सुन्नी सहित पिछड़े मुस्लिम समुदायों से भी मेंबर होंगे।
IV बोहरा और अगखानी मुस्लिम समुदायों के लिए अलग वक्फ बोर्ड बनेगा।
v केंद्र सरकार सेंट्रल वक्फ काउंसिल में 3 सांसदों (लोकसभा से 2, राज्यसभा से 1) को रख सकेगी, जरूरी नहीं कि वे मुस्लिम हों। अब तक तीनों सांसद मुस्लिम होते थे।
2. वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी पर नियंत्रण
VI CAG या सरकार की तरफ से नियुक्त ऑडिटर वक्फ प्रॉपर्टी का ऑडिट करेंगे।
VII राज्य सरकार, प्रॉपर्टीज के सर्वे के लिए सर्वे कमिश्नर की जगह जिला कलेक्टर को नियुक्त करेगी।
VIII बोर्ड को अपनी प्रॉपर्टी जिला कलेक्टर के ऑफिस में रजिस्टर करानी होगी।
IX कलेक्टर किसी वक्फ प्रॉपर्टी को सरकारी संपत्ति मानता है, तो उसे राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव करवा कर राज्य सरकार को इसकी रिपोर्ट देनी होगी।
X जब तक कलेक्टर किसी विवादित प्रॉपर्टी पर रिपोर्ट नहीं देते, उसे वक्फ प्रॉपर्टी नहीं माना जाएगा। यानी सरकार के फैसला न लेने तक प्रॉपर्टी को वक्फ बोर्ड कंट्रोल नहीं कर सकेगा।
XI बिना कागजात के कोई संपत्ति वक्फ नहीं मानी जाएगी। मसलन, मस्जिदें वक्फनामे के बिना भी वक्फ की संपत्ति होती थीं, अब ऐसा नहीं होगा।
3. वक्फ की विवादित प्रॉपर्टी का निपटारा
XII धारा-40 खत्म होगी। इसके तहत वक्फ को किसी संपत्ति को अपनी संपत्ति घोषित करने का अधिकार था।
XIII वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी। अभी तक वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले को सिविल, राजस्व या दूसरी अदालतों में चुनौती नहीं दी जा सकती थी।
XIV नए कानून के बनने से पहले या बाद में, किसी सरकारी संपत्ति को वक्फ की प्रॉपर्टी घोषित किया गया है, तो अब वह वक्फ प्रॉपर्टी नहीं होगी।






