केजरीवाल ने पीएम से किया निवेदन आप अपना काम करें और हमें दिल्ली की जनता के काम करने दें सहयोग कीजिए लड़िए मत

एक दिन के लिए दिल्ली का बजट रोक कर किसी का कोई फ़ायदा नहीं हुआ
EROS TIMES:  केंद्र सरकार ने बजट पर कभी कोई ऑब्जर्वेशन नहीं किया सालों से चली आ रही परंपरा को पहली बार तोड़ा गया यह संविधान पर हमला है
केंद्र ने 17 मार्च को मुख्य सचिव को ऑब्जर्वेशन भेजा और गृह मंत्रालय के आदेश पर वे तीन दिन तक इसे लेकर बैठे रहे
21 मार्च को बजट पेश होना है, 20 मार्च को दोपहर दो बजे ऑब्जर्वेशन के बारे में बताया गया और वित्त मंत्री को शाम 6 बजे फाइल भेजी गई
 चार ऑब्जर्वेशन थे हमने बजट में बिना फिगर बदले जवाब देकर हाथ जोड़ लिए और वो खुश हो गए कि केजरीवाल को झुका दिया
 विज्ञापन का बजट इंफ्रास्ट्रक्चर से ज्यादा बताया जा रहा है जबकि इंफ्रास्ट्रक्टर का 20 हजार करोड़ और विज्ञापन का 500 करोड़ का बजट है
 दिल्ली के आर्थिक सर्वे बताते हैं कि दिल्ली ने कितनी तरक्की की है अगर ये रोज-रोज के झगड़े न होते तो कितनी तरक्की होती
 प्रधानमंत्री को दिल्ली में बार-बार ‘‘आप’’ की जीत से तकलीफ है, दिल्ली को जीतने के लिए उनको दिल्लीवालों का दिल जीतना होगा
 प्रधानमंत्री से प्रार्थना है कि हम राजनीति में लड़ने नहीं काम करने के लिए आए हैं  हमें काम करने दिया जाए
मुख्य सचिव और वित्त सचिव के भूमिका की जांच करेगी विशेषाधिकार समिति
केंद्र सरकार की रोक के कारण मंगलवार को विधानसभा में दिल्ली का बजट पेश नहीं हो सका। बजट में देरी पर सदन में संकल्प पत्र पेश किया गया, जिसमें मुख्य सचिव और वित्त सचिव के भूमिका की जांच की मांग हुई। सदन ने संकल्प पत्र पास कर उसे विशेषाधिकार समिति को भेज दिया। इस दौरान सीएम अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री से निवेदन करते हुए कहा कि आप अपना काम करें और हमें दिल्ली की जनता के काम करने दें। हमसे लड़ने के बजाय हमारा सहयोग कीजिए। एक दिन के लिए दिल्ली का बजट रोक कर किसी का कोई फ़ायदा नहीं हुआ। आज तक दिल्ली के इतिहास में कभी कोई ऑब्जर्वेशन नहीं किया गया  लेकिन इस बार परंपराओं को तोड़ा गया। यह देश के संविधान पर हमला किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 17 मार्च को मुख्य सचिव को ऑब्जर्वेशन भेजा। गृह मंत्रालय के आदेश पर मुख्य सचिव तीन दिन तक इसे लेकर बैठे रहे। 21 मार्च को दिल्ली का बजट पेश होना है और 20 मार्च को दोपहर दो बजे इसके बारे में बताया गया और वित्त मंत्री को शाम 6 बजे फाइल भेजी गई। केंद्रीय गृह मंत्रालय के चार ऑब्जर्वेशन थे। हमने बजट में बिना फिगर बदले जवाब देकर हाथ जोड़ लिए और और वो खुश हो गए कि केजरीवाल को झुका दिया। हम तो सदा झुके हैं।
सदन में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज सदन में दिल्ली का बजट पेश होना था मगर केंद्र सरकार ने कल शाम को उस पर रोक लगा दी। इसलिए आज विधानसभा में बजट पेश नहीं हो पाया। संविधान कई तरह की स्थितियों का सामना करता हैं। मैं समझता हूं कि डॉ. बाबा साहब अंबेडकर जब संविधान लिख रहे थे  तब शायद उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि ऐसी कोई स्थिति भी देश के अंदर आ सकती है कि केंद्र सरकार किसी राज्य सरकार के बजट को रोक सकती है। एक ऐसा संवैधानिक संकट खड़ा कर दिया गया है। यह देश के संविधान के ऊपर हमला किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 मार्च को दिल्ली सरकार ने केंद्र को बजट भेजा और 17 मार्च को केंद्र सरकार ने कुछ आपत्तियां लगाकर बजट वापस भेज दिया। विपक्ष के नेता कह रहे थे कि एलजी ने बजट पर कुछ ऑब्जर्वेशन लगाए। संविधान के अंदर एलजी को चुनी हुई सरकार के बजट के ऊपर कोई भी ऑब्जर्वेशन लगाने का अधिकार नहीं है। एलजी मंत्री परिषद की सहायता और सलाह से बधे हैं। सुप्रीम कोर्ट का 2018 का आदेश और संविधान का आर्टिकल 239एए4 साफ है कि दिल्ली के उपराज्यपाल मंत्री परिषद की सहायता और सलाह से बधे हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल तीन विषयों को छोड़कर चुनी हुई सरकार के निर्णय पर केवल ठप्पा लगाएंगे। एलजी अपनी ऑब्जर्वेशन भी नहीं दे सकते और फाइल पर कुछ भी नहीं लिख सकते हैं। अगर एलजी सरकार से आई फाइल पर कुछ भी लिखते हैं तो यह संविधान के खिलाफ है और पूरे सदन का अपमान है। कुछ कहना है तो सदन कहेगा। हम सभी को जनता ने चुनकर सदन में भेजा है। अगर एलजी को ही दिल्ली चलानी थी तो जनता ने हमें चुनकर क्यों भेजा है?
  अरविंद केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार के पास बजट भेजा गया था। केंद्र सरकार को इसमें ऑब्जेक्शन करने का कोई अधिकार नहीं है। यह भारत के संविधान और लोकतंत्र की मूल संरचना के खिलाफ है कि किसी राज्य का बजट केंद्र सरकार को भेजा जा रहा है। जिस दिन सुप्रीम कोर्ट के अंदर इसे चौलेंज किया गया कि केंद्र सरकार को दिल्ली सरकार का बजट भेजा जा रहा है तो कोर्ट में 2 मिनट भी यह नहीं टिक पाएगा। बस कई सालों से यह एक परंपरा चली आ रही है और हम भी उस परंपरा का पालन कर रहे थे। आज तक दिल्ली के इतिहास में कभी केंद्र सरकार ने कोई ऑब्जेक्शन या ऑब्जर्वेशन नहीं किया। पहली बार इस परंपरा को तोड़ा गया। केंद्र सरकार ने दिल्ली के बजट पर ऑब्जर्वेशन लगाकर भेजें और यही अपने आप में असंवैधानिक बात है। मगर हमें लड़ना नहीं है। हम लड़ना नहीं चाहते हैं। हम लड़ने नहीं काम करने के लिए आए हैं।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 17 मार्च को केंद्र सरकार ने मुख्य सचिव और वित्त सचिव को ऑब्जर्वेशन भेजा और वो 3 दिन तक इसे लेकर बैठे रहे। सारा देश जानता है कि इन अधिकारियों की गर्दन केंद्र सरकार और एलजी के अंडर में है। रोज किसी को भी सस्पेंड कर देते हैं। सभी अधिकारी डरे बैठे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय से आदेश आया कि 3 दिन तक फाइल लेकर बैठे रहो। 21 मार्च को बजट पेश होना था और 20 मार्च को दोपहर 2 बजे वित्त मंत्री को एमएचए से आए ऑब्जर्वेशन के बारे में बताया गया। इन अधिकारियों के खिलाफ तो कार्रवाई होनी चाहिए। फाइल के संबंध में मंत्री ने बार-बार फोन किया लेकिन उनके पास शाम 6 बजे फाइल पहुंचाई गई। इसके बाद अफरा-तफरी में वित्त मंत्री ने नोट बनाया। हमारे पास कोर्ट जाने का विकल्प था कि आपने आब्जर्वेशन कैसे लिखें? पर मैंने मंत्री से कहा कि हमें लड़ना नहीं है। हमने उनके चारों ऑब्जर्वेशन का जवाब लिखा। बजट में कोई बदलाव नहीं किया। ये केवल उनका अहंकार था कि हमारा जवाब दो। हमने उनका जवाब दे दिया। खुश हो गए कि हमने केजरीवाल को झुका दिया। हम हमेशा ही झुके हुए हैं। जनता और सबके सामने झुकना चाहिए। इससे उनको क्या मिला। यह सिर्फ उनका अहंकार और राजनीति है। अहंकार को संतुष्ट करने के अलावा कुछ नहीं हुआ।
 अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कल मीडिया में चल रहा था कि दिल्ली सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर से ज्यादा विज्ञापन का बजट कर दिया और हमने इसे ठीक करने को बोला है। बजट में 20 हजार करोड़ इंफ्रास्ट्रक्चर और 500 करोड़ विज्ञापनों पर हैं। मैंने कभी नहीं सुना कि 20 हजार करोड़ से 500 करोड़ ज्यादा होता है। उन्होंने ऊपर से लेकर नीचे तक अनपढ़ों की जमात बैठा रखी है। अनपढ़ों की जमात बिठाने की जगह वहां पर पढ़े लिखे लोगों को बैठाना चाहिए ताकि वो बजट पढ़ सकें। बजट वही है  हमने इसे बढ़ाया भी नहीं है। लेकिन फिर भी मीडिया से चला रखा है कि विज्ञापनों का बजट इंफ्रास्ट्रक्चर से ज्यादा है। हमने बजट में कोई बदलाव करके नहीं भेजा। जो बजट में लिखा था उसी में से चार लाइने कोट करके भेज दी। एलजी ने भी कल रात 10ः30 बजे स्वीकृत कर दिया। वो पहले ही स्वीकृत कर देते। मगर वो कह रहे थे कि मेरे सामने झुको और मेरे पैर पकड़ो। मैं आपके सामने झुक गया हूं। आप ही प्रभु और सब कुछ हो।
सीएम ने कहा कि मेरी प्रधानमंत्री से प्रार्थना है कि हम काम करना चाहते हैं, लड़ना नहीं चाहते। हम बहुत छोटे लोग हैं। हम राजनीति में लड़ने के लिए नहीं आए। हमें राजनीति करनी नहीं आते। इस रोज-रोज की लड़ाई से कुछ नहीं निकलता। जिस घर में लड़ाई होती है  वो घर बर्बाद हो जाते हैं। जिस राज्य में लड़ाई होती है वो राज्य बर्बाद हो जाते हैं। जिस देश में लड़ाई होती है, वो देश बर्बाद हो जाते हैं। लड़ाई से कहां किसी का भला हुआ है। सब मिलजुल-कर काम करेंगे तो तरक्की होगी। कल हमारे वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वे पेश किया। इससे पता चलता है कि दिल्ली ने कितनी तरक्की की है। देश के औसत से ज्यादा आगे जाकर दिल्ली तरक्की कर रही है। अगर ये रोज-रोज के झगड़े नहीं होते तो दिल्ली की 10 गुना तरक्की हो चुकी होती।
सीएम केजरीवाल ने पूछा दिल्ली के इन कामों को रोक कर प्रधानमंत्री को क्या मिला?
डोर-स्टेप-डिलीवरी राशन-  हम डोर-स्टेप-डिलीवरी राशन करना चाहते थे। प्रधानमंत्री ने उसे रोक दिया। इससे केवल राशन चोरी करने वाले राशन माफियाओं का फायदा हुआ। इससे जनता का कोई फायदा नहीं हुआ।
योगा क्लासेज- दिल्ली के अंदर दिल्ली सरकार रोजाना 17 हजार लोगों को फ्री में योगा कराती थी। प्रधानमंत्री ने योगा क्लासेज बंद करा दी। इससे किसका फायदा हुआ? किसी का नहीं हुआ।
टीचर्स की फिनलैंड ट्रेनिंग- दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था की तारीफ पूरे देश और दुनिया में होती है। इसका एक बहुत बड़ा कारण है कि हमारे 60 हजार टीचर्स और प्रिंसिपल्स हैं। इन्होंने चमत्कार करके दिखाया है। हम उन्हें ट्रेनिंग के लिए विदेश भेजते हैं। प्रधानमंत्री ने उनकी फिनलैंड की ट्रेनिंग रोक दी। इससे भी किसी का फायदा नहीं हुआ। 75 साल के बाद गरीबों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलनी चालू हुई थी। हमारे साथ क्यों लड़ रहे हैं?
मोहल्ला क्लीनिक की पेमेंट– पिछले साल कई महीनों तक मोहल्ला क्लीनिक में टेस्ट उनका रेंट बिजली के बिल और दवाइयों की पेमेंट रोक दी। मोहल्ला क्लीनिक और अस्पतालों में न जाने कितने मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी है। इससे किसीका फायदा हुआ?
फरिश्ते स्कीम- किसी का एक्सीडेंट होने पर हम फरिश्ते स्कीम के तहत उसका मुफ्त में इलाज करवाया करते थे। उस स्कीम के अंदर हम 13 हजार से ज्यादा लोगों की जान बचा चुके हैं। उस स्कीम की पेमेंट भी बंद करवा दी। मरते हुए आदमी की हम जान बचाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन उसकी पेमेंट बंद करा दी। प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि इससे किसका फायदा हुआ?
मेयर चुनाव बजट रोकने के अलावा मेयर के चुनाव बंद करा दिए थे।
मैं प्रधानमंत्री से कहना चाहूंगा कि आप बहुत बड़े हैं हम बहुत छोटे हैं। हम छोटी सी दिल्ली को चला रहे हैं। हमें अपनी दिल्ली चलाने दें। आप बहुत बड़े हैं आप पूरे देश के अंदर बहुत बड़ा काम कर रहे हैं। आप अपना काम कीजिए और हमें अपना काम करने दीजिए।
प्रधानमंत्री अगर दिल्ली जीतना चाहते हैं तो पहले दिल्ली के लोगों का दिल जीतना पड़ेगा
  अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री की तकलीफ यह है कि दिल्ली में बार-बार आम आदमी पार्टी क्यों जीत रही है और भाजपा बार-बार क्यों हार रही है? मैं प्रधानमंत्री को दिल्ली को जीतने का मंत्र बताता हूं कि अगर आप दिल्ली जीतना चाहते हैं तो पहले दिल्ली के लोगों का दिल जीतना पड़ेगा। इस तरह रोज-रोज लड़ाई-झगड़े से दिल्ली के लोग वोट नहीं देने वाले हैं। आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली में हजार स्कूल ठीक कर दिए। प्रधानमंत्री के पास बहुत पैसा है। आप हजार नए स्कूल बना दीजिए। इसके बाद लोग केजरीवाल को वोट देना बंद कर देंगे। मैंने दिल्ली में 550 मोहल्ला क्लीनिक बना दिए, आप 5.5 हजार मोहल्ला क्लीनिक बनवा दो। मगर आज आप केजरीवाल के 550 मोहल्ला क्लीनिक और स्कूलों को रोकने की कोशिश करेंगे और फिर सोचेंगे कि मैं दिल्ली जीत लूंगा, आप इस जन्म में दिल्ली नहीं जीत पाएंगे। प्रधानमंत्री को हमसे लंबी लाइन खीचनी चाहिए। हमने जो काम किए, उससे ज्यादा काम करके दिखाएं।
हम प्रधानमंत्री से लड़ना नहीं उनके साथ मिलकर काम करना चाहते हैं
अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि हम आपके साथ मिलकर काम करना चाहते हैं आपसे सहयोग चाहते हैं। हम आपसे लड़ना नहीं चाहते हैं। हमें लड़ाई और राजनीति करनी नहीं आता। हम बहुत छोटे हैं। जैसे एक परिवार में होता है। दिल्ली के लोग आपके सामने छोटे भाई की तरह हैं। अगर एक बड़ा भाई रोजाना आकर छोटे भाई को थप्पड़ मारेगा उसे डांटेगा तो छोटा भाई भी बेचारा कब तक बर्दाश्त करेगा? इसलिए अगर आपको छोटे भाई का दिल जीतना है तो छोटे भाई को प्यार करो उसके साथ चलो तभी छोटा भाई भी आपका साथ देगा।
मुख्य सचिव और वित्त सचिव के भूमिका की जांच करेगी विशेषाधिकार समिति
मंगलवार को सदन में दिल्ली का बजट पेश होना था लेकिन केंद्र सरकार की ओर से रोक लगाए जाने के बाद पेश नहीं किया जा सका। मंगलवार सुबह जब विधानसभा के सदन शुरू हुआ तो बजट नहीं होने को लेकर चर्चा शुरू हुई। इस दौरान आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा ने सदन के समक्ष एक संकल्प पत्र पेश किया। जिसमें दिल्ली के बजट में देरी को लेकर मुख्य सचिव और वित्त सचिव की जांच विशेषाधिकार समिति को भेजने की मांग की गई। इस संकल्प पत्र को सदन ने ध्वनि मत से पास कर दिया और जांच के लिए विशेषाधिकार समिति को भेज दिया गया।
विधायक संजीव झा ने संकल्प पत्र को सदन में पढ़कर सुनाया। जिसमें लिख गया है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधान सभा दिनांक 21 मार्च 2023 को दिल्ली में आयोजित अपनी बैठक में वार्षिक वित्तीय विवरण की प्रस्तुति एकमात्र एजेंडा बिंदु था। जो संकल्प करती है कि
इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य जन-समर्थक कार्यों के लिए बजटीय आवंटन को पटरी से उतारकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की निर्वाचित सरकार के कल्याणकारी एजेंडे को विफल करने की साजिश की गई है।
इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि मुख्य सचिव, वित्त सचिव और अन्य संबंधित अधिकारियों ने माननीय उप राज्यपाल के कार्यालय और भारत सरकार की मिलीभगत से तत्संबंधी संवाद को स्वेच्छा से दबा दिया है ताकि राष्ट्रीय राजधानी में वित्तीय संकट पैदा हो सके और इसे निर्वाचित सरकार की विफलता के रूप में चित्रित किया जा सके।
इस बारे में गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कि जिस तरह भारत सरकार दिल्ली के 2 करोड़ से अधिक लोगों के खिलाफ इसलिए प्रतिशोध की कारवाई का सहारा ले रही है क्योंकि उन्होंने एक जन-समर्थक सरकार चुनने का फैसला किया।
कार्य संचालन नियमों में असंगतता के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए, जो मौजूदा कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों के साथ-साथ भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ द्वारा दिल्ली सरकार बनाम भारत संघ एवं अन्य के मामले में दिनाक 04 जुलाई 2018 को दिए गए फैसले के विपरीत है।
इस तथ्य से निराशा जताते हुए कि वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट), जिसे सार्वभौमिक रूप से एक गुप्त दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाता है जब तक इसे विधानमंडल के सदस्यों की जांच और अनुमोदन के लिए सदन के पटल पर प्रस्तुत नहीं किया जाता वह भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निम्नतम अधिकारियों की पूर्व जांच के अधीन हैजो पूरी तरह असंवैधानिक और गैरकानूनी परम्परा है।
दिल्ली और देश के प्रत्येक नागरिक का आह्वान करती है कि केंद्र सरकार के तहत सक्रिय जनविरोधी ताकतों की साजिश को समझे।
दिल्ली के 2 करोड़ लोगों के खिलाफ भारत सरकार द्वारा की जा रही असंवैधानिक अवैध और अलोकतात्रिक मनमानी की निंदा करती है।
अनुशंसा करती है कि निर्वाचित सरकार पर भारी अवैधतापूर्ण ढंग से लगाए गए असंवैधानिक और गैरकानूनी प्रतिबंधों को हटाने के लिए और निर्वाचित सरकार को सशक्त बनाने वाले संवैधानिक प्रावधानों का पालन करने के लिए कार्य संचालन नियमों में संशोधन किया जाना चाहिए जैसा कि भारत के माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा सही ठहराया गया है और संकल्प करती है कि मुख्य सचिव (दिल्ली), प्रधान सचिव (वित्त) और अन्य द्वारा विधान सभा में बजट की निर्धारित प्रस्तुति में देरी में उनके आचरण और भूमिका को विस्तृत जांच और रिपोर्ट के लिए विशेषाधिकार समिति को सौंपा जाए।
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