Eros Times: गाजियाबाद ‘कथा रंग’ द्वारा आयोजित कहानी महोत्सव एवं अलंकरण समारोह भव्य ‘लिटरेरी फेस्टिवल’ के रूप में संपन्न हुआ। देश के विभिन्न हिस्सों से आए रचनाकारों ने विभिन्न सत्रों में अपने विचार प्रकट किए। उद्घाटन सत्र का शुभारंभ करते हुए विधायक व पूर्व मंत्री अतुल गर्ग ने कहा कि एक समय था जब इलाहाबाद की पहचान साहित्य की राजधानी के रूप में होती थी। गाजियाबाद आज साहित्य की कुंभ नगरी बन गया है। द्वितीय सत्र के अध्यक्ष सुप्रसिद्ध लेखक अब्दुल बिस्मिल्लाह ने कहा कि जब सदी बदलती है तो कईं बदलाव लाती है।

वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक अभिषेक उपाध्याय ने कहा कि जीवन में आ रहे बदलाव पर ध्यान देकर किया गया लेखन ही दूर तक जाता है। अंतिम सत्र की मुख्य अतिथि मैत्रेई पुष्पा ने कहा कि ऐसे समारोह नए रचनाकारों को साहस व आगे बढ़ने का हौसला प्रदान करते हैं। सुप्रसिद्ध समीक्षक राहुल देव ने कहा कि जीवंत भाषा शुद्धता का आग्रह करती है। विराट स्वरूप के बावजूद अंग्रेजी मिश्रित हिंदी भाषा के वजूद के लिए खतरा पैदा कर रही है।कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज मोहन नगर के प्रेक्षागृह में अद्विक प्रकाशन के सहयोग से संपन्न भव्य कहानी महोत्सव में ‘कहानी का वर्तमान’ विषय पर विमर्श में लेखक व आलोचक हरियश राय ने कहा कि देश में कहानी का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है।

रचनाकारों को अपने कथ्य एवं शिल्प को परिदृश्य में हो रहे बदलाव के अनुरूप गढ़ना होगा। वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक यतेंद्र यादव ने कहा कि साहित्य की यात्रा तब पूर्ण व सार्थक होती है जब वह आम आदमी से जुड़ती है। सुप्रसिद्ध पत्रकार एवं लेखक प्रियदर्शन ने कहा कि 21वीं सदी की कहानी का वर्तमान चुनौतियों से भरा है।आज की रचनात्मकता सोशल मीडिया पर निर्भर हो गई है। उन्होंने कहा कि रूसी साहित्यकार मानते थे कि वह कथाकार गोगोल के कोट से निकले हैं। हम कह सकते हैं कि हम प्रेमचंद की कर्मभूमि से निकलते हैं। वरिष्ठ कलमकार कमलेश भट्ट कमल ने कहा कि साहित्य में मनुष्यता जिंदा रहनी चाहिए। प्रो. असलम जमशेदपुरी ने उर्दू कहानी के इतिहास एवं वर्तमान के अंतर का विश्लेषण किया। चर्चित युवा लेखिका एवं कवयित्री रेणु हुसैन ने कहा कि कहानी हमारे समाज का वह दस्तावेज होती है जो आने वाली पीढ़ियों को हमारे वर्तमान का बोध करवाती है।
वरिष्ठ साहित्यकार अशोक मैत्रेय ने कहा की कथा रंग के कथा संवाद कार्यशाला से लिटरेरी फेस्टिवल की यात्रा कहानी का आंदोलन बन गई है। डॉ. नवीन चंद्र लोनी ने कहा कि कथा रंग देश भर के रचनाकारों को नई पहचान देने का काम कर रहा है। सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार आलोक पौराणिक व अभिनेता मनु कौशल मंचित ‘लेखक से मिलिए’ प्रस्तुति बेहद रोचक रही। प्रसिद्ध रंगकर्मी जे. पी. सिंह की नाट्य प्रस्तुति ‘छोड़ो कल की बातें’ भी सराहनीय रही।
कहानी महोत्सव में देश भर से आए रचनाकारों शोभनाथ शुक्ल, आशा पांडे, सिनीवाली, अखिलेश श्रीवास्तव ‘चमन’, डॉ. निधि अग्रवाल, डॉ. अजय गोयल, डॉ. रख्शंदा रूही मेहंदी, महावीर उत्तरांचली, चंद्रकांता, आशीष दशौत्तर, मलय जैन, नीलम राकेश, रिंकल शर्मा, डॉ. अमिता दुबे, सुभाष अखिल, संजय सिसोदिया आदि को कथा रंग साहित्य अलंकरण प्रदान किया गया।
इस अवसर पर सुभाष चंदर, आलोक यात्री, जितेन ठाकुर, नवीन कुमार भास्कर, द्विजेंद्र कुमार, जवाहर चौधरी, कविता शर्मा व शोभनाथ शुक्ल की पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। सुभाष चंदर, आलोक यात्री, सुरेश मीणा, शिवराज सिंह ने भी विचार प्रकट किए। मंच संचालन सुप्रसिद्ध व्यंगकार एवं कवि पंकज प्रसून, मनु लक्ष्मी मिश्रा, दीपाली जैन, वागीश शर्मा व डॉ. प्रीति कौशिक ने किया। मंच व्यवस्था पराग कौशिक, डॉ. बीना शर्मा, अभिषेक कौशिक, विकास, टेकचंद, तनु, गायत्री, जोया, सिमरन व तन्मय यात्री आदि ने संभाली।

कहानी महोत्सव में अद्विक प्रकाशन के स्वामी अशोक गुप्ता सुप्रसिद्ध कवि गोविन्द गुलशन प्रमिला भारती अतुल सिन्हा राकेश चंद्रा, ओंकार सिंह, विनीत गोयल डॉ. रमा सिंह, डॉ. वीना मित्तल राजेश श्रीवास्तव राजीव पांडेय गार्गी कौशिक राजेश श्रीवास्तव राज उषा श्रीवास्तव, रोजी श्रीवास्तव अलका वशिष्ठ कात्यायनी सिंह ज्योत्स्ना शर्मा आलोक अविरल बलराम अग्रवाल अनिल मीत अंशुल अग्रवाल कुमार सुबोध रणमत सिंह देवेन्द्र हितकारी अमित शर्मा सोमेश अरोड़ा अर्जुन शर्मा डॉ. जकी तारिक महकार सिंह, ईश्वर सिंह तेवतिया मोहम्मद इकबाल प्रभात कुमार संजीव मलिक डॉ. अतुल जैन अंजू जैन तिलक राज अरोड़ा मनीषा गुप्ता तुलिका सेठ सी. पी. त्रिपाठी आलोक रंजन अजीत कुमार सिंह विनय विक्रम सिंह सुरेश अखिल भारत भूषण बरारा साक्षी बरारा अशोक अरोड़ा सुरेंद्र अरोड़ा श्रद्धा पांडेय भूमिका अखिल रघुवीर शर्मा योगेंद्र दत्त शर्मा विपिन जैन नंदनी शेखर अनिमेष शर्मा सुरेंद्र शर्मा श्रद्धा पांडेय कुमार अनुपम संजीता शुक्ला जोया राजीव शर्मा देवव्रत चौधरी नवीन चौधरी सुब्रत भट्टाचार्य राम जोशी प्रताप सिंह व कथा रंग के सभी सदस्यों सहित बड़ी संख्या में साहित्य अनुरागी मौजूद थे।






