Eros Times: छात्रों को विजुअल आर्ट्स के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम प्रगति की जानकारी प्रदान करने के लिए एमिटी स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स द्वारा विजुअल आर्ट्स में नवाचार पर एक दिवसीय अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन एफ ब्लाक सभागार, एमिटी विश्वविद्यालय में किया गया। इस सम्मेलन का उददेश्य कला और जीवन – पर्यावरण के लिए जीवनशैली था। इस सम्मेलन का उद्घाटन प्रख्यात कला समालोचक और कलाकार प्रयाग शुक्ला, जेयूएक्सटी कंसलटेंट के सीईओ संजय तिवारी, यूएसए के वेस्टर्न कैरोलिना विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ आर्ट एंड डिजाइन के प्रो जॉन जिचा, एमिटी स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स और एमिटी स्कूल ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी की चेयरपरसन श्रीमती दिव्या चौहान और एमिटी विश्वविद्यालय के गु्रप एडिशनल प्रो वाइस चांसलर डा प्रदीप जोशी द्वारा किया गया।

इस अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन में अनुभव साझा करते हुए प्रख्यात कला समालोचक और कलाकार प्रयाग शुक्ला ने कहा कि छात्रों और युवाओं के मध्य आकर एक नये उत्साह का संचार होता है। कोविड के उपरांत मैने कई यात्रायें की और जीवन में लगभग भारत के हर प्रदेश में जा चुका हूं। शुक्ला ने कहा कि 1963 में जब 23 साल का था तो हुसैन साहब ने मुझे हर वस्तु में कला को देखना सीखाया। जब मै 15 वर्ष का था तो अखबारों में रंगीन तस्वीरें नही हुआ करती थी और आज का वक्त मुझे चकित कर देता है जहां मोबाइल में ही 100 से 1000 के मध्य रंगीन तस्वीरें होती है, अखबारों, बाजारों और मॉल सहित सडकों रंगीन इमेज मिल जाती है यह एक बहुत बडा़ परिवर्तन है। विजुअल के क्षेत्र में पिछले 100 में इतनी बड़ी आजादी हमें वर्तमान में मिली है जो पहले केवल थियेटर तक सीमीत थी। उन्होनें कहा कि नवाचार द्वारा ही विकास संभव है, हमारा देश विश्व में कला सबसे बड़ी धरोहर रहा है जिसके निशान आज भी एजेंता एलोरा, सांची आदि स्थानों पर दिखते हैं। कला व्यक्ति के अदंर होती है और आपके द्वारा किया गया कार्य उसे अभिव्यक्त करने का माध्यम है।
जेयूएक्सटी कंसलटेंट के सीईओ संजय तिवारी ने छात्रो को संबोधित करते हुए कहा कि कला, जीवनशैली और पर्यावरण आपस में जुड़े है। कला के माध्यम से विकसित जीवनशैली स्थायी पर्यावरण को बनाती है। कला सदैव से हमारे जीवन एवं पर्यावरण से जुड़ा रहा है इसलिए हमें कला, जीवनशैली और पर्यावरण के आपसी संबंधों का समझना होगा और उस पर कार्य करना चाहिए। आप कला के माध्यम से लोगों को स्थायी पर्यावरण के प्रति जागरूक करें।
यूएसए के वेस्टर्न कैरोलिना विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ आर्ट एंड डिजाइन के प्रो जॉन जिचा ने महामारी के उपरांत पर्यावरण में कला व डिजाइन के अनुभव पर बताते हुए स्थान, माध्यम, भाषा, सामग्री और दर्शक के संर्दभ में बताते हुए नॉन फंजीबल टोकन के काटूर्न, संगीत, फिल्म और वीडियों क्लिप सहित पोस्टकार्ड, स्पोर्टस ट्रेडिंग कार्ड में उपयोग के बारे में जानकारी दी।
एमिटी स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स और एमिटी स्कूल ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी की चेयरपरसन श्रीमती दिव्या चौहान ने कहा कि वर्तमान समय में आधुनिक तकनीकें जैसे एआई आदि का उपयोग हर क्षेत्र में हो रहा है और हमें भी विजुअल आर्ट्स के क्षेत्र में एआई को बढ़ावा देना चाहिए। एमिटी मे हम छात्रों को नये विचार और नवाचार के लिए प्रेरित करते है और इसी क्रम में इस अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया है जिससे छात्रों को विजुअल आर्ट्स के क्षेत्र में हो रहे अनुसंधानों की जानकारी छात्रों को प्राप्त हो सके।
एमिटी विश्वविद्यालय के गु्रप एडिशनल प्रो वाइस चांसलर डा प्रदीप जोशी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस एक दिवसीय सम्मेलन में विश्वभारती, एमआईटी पूणे, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय आदि से शोधार्थी अपने पेपर प्रस्तुत करेगें। आज वैश्विक कला बाजार लगभग 68 बिलियन डॉलर का है जिसमें 12 प्रतिशत दर से बढ़ोत्तरी हो रही है। डा जोशी ने कहा कि यह सम्मेलन छात्रों को व्यवसायिक जीवन में आगे बढ़ने में सहायक होगा।
सम्मेलन के अंर्तगत आधारित प्रथम तकनीक सत्र में मुनीर ब्रांड की संस्थापक सुश्री मुनीरा अकलोवा, कांसेप्ट कम्यूनिकेशन लिमिटेड की वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुश्री ईशा गुहा ने ‘‘अपरंपरागत कला रूझान – नई मीडिया कलाए’’ पर अपने विचार रखे। द्वितीय तकनीक सत्र में वरिष्ठ कलाकार श्री प्रकाश चंादवाडकर, वाकॉम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के वरिष्ठ निदेशक राजीव मलिक ने ‘‘कला सौंदर्यशास्त्र और दर्शन’’ पर अपने विचार व्यक्त किये।






