नोएडा/जयपुर : जीवन में मुश्किलें आती हैं, लेकिन उनसे जूझकर आगे बढ़ना ही असली सफलता है। इसी संदेश को आत्मसात करते हुए फेलिक्स हॉस्पिटल्स के चेयरमैन डॉ. डी.के. गुप्ता ने शनिवार को जयपुर स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित डॉक्टर कॉन्क्लेव में अपनी संघर्षपूर्ण यात्रा साझा की।
गांव से डॉक्टर बनने तक का सफर
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले डॉ. गुप्ता का बचपन साधारण और संघर्षों से भरा रहा। पिता जिला पंचायत में कर्मचारी और मां प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका थीं। आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के बीच पढ़ाई करना आसान नहीं था। स्ट्रीट लाइट की रोशनी में पढ़ाई, पॉपकॉर्न बेचकर खर्च निकालना और बरामदों में सोकर दिन गुजारना उनकी जिंदगी का हिस्सा रहा।
सिर्फ 49 साल की उम्र में पिता की बीमारी और गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के चलते निधन ने डॉ. गुप्ता को भीतर तक झकझोर दिया। तभी उन्होंने प्रण लिया कि “वे उन लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाएंगे, जिन्हें इनकी सबसे अधिक जरूरत है।”
कठिनाइयों से जीत तक
हिंदी माध्यम की पृष्ठभूमि के चलते उन्हें अच्छे स्कूलों ने प्रवेश नहीं दिया। एमबीबीएस प्रवेश के समय भी किस्मत ने कठिन परीक्षा ली, जब उनका फॉर्म गायब हो गया और सीट रुक गई। लेकिन हार न मानते हुए उन्होंने हाई कोर्ट तक लड़ाई लड़ी और मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से मेरठ स्थित एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाया। वहीं से उन्होंने एमबीबीएस और एमडी (पीडियाट्रिक्स) पूरी की और गोल्ड मेडल हासिल किया।

छोटे क्लीनिक से अस्पतालों की चेन तक
2008 में उन्होंने 15 बेड वाले आस्था क्लीनिक से शुरुआत की। मेहनत और सेवा भाव से मरीजों का विश्वास जीता। 2015 में पत्नी डॉ. रश्मि गुप्ता के साथ मिलकर फेलिक्स हॉस्पिटल की स्थापना की। यह सफर 50 बेड से शुरू होकर आज 200 से अधिक ऑपरेशनल बेड तक पहुंच चुका है।
फेलिक्स हॉस्पिटल्स ने एनएबीएच और एनएबीएल जैसे बड़े सर्टिफिकेशन हासिल किए हैं और आज कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और ऑन्कोलॉजी जैसी सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं उपलब्ध कराता है। आने वाले वर्षों में इसे 850 से अधिक बेड तक विस्तारित करने का लक्ष्य है।
डॉ. गुप्ता का विजन है – “गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं हर आम और गरीब परिवार तक पहुंचें। सपना सिर्फ अस्पताल चलाना नहीं, बल्कि एक ऐसा स्वास्थ्य तंत्र खड़ा करना है जहां हर किसी को समय पर उचित इलाज मिले।”
150 डॉक्टरों की भागीदारी और पुस्तक विमोचन
कॉन्क्लेव का विषय रहा – “फ्रॉम क्लीनिक टू हॉस्पिटल्स: द जर्नी स्टार्ट्स हियर”। इसमें राजस्थान के विभिन्न जिलों से 150 से अधिक युवा डॉक्टर शामिल हुए। आयोजन का मकसद था युवाओं को मार्गदर्शन देना कि कैसे वे क्लीनिक से शुरुआत कर धीरे-धीरे अस्पताल मालिक बनने तक का सफर तय कर सकते हैं।
पैनल चर्चा में ‘हाउ टू ग्रो योर प्रैक्टिस एंड एनेबल योर जर्नी टू बी अ हॉस्पिटल ओनर’ विषय पर विचार रखे गए। कार्यक्रम के दौरान एक विशेष पुस्तक का विमोचन भी किया गया और डेंगू जागरूकता अभियान की घोषणा की गई।
युवाओं के लिए प्रेरणा
युवा डॉक्टरों ने इंटरैक्टिव सत्र में प्रश्न पूछकर अपने संदेह दूर किए। रूंगटा हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक राश बिहारी रूंगटा ने कहा – “इस आयोजन का उद्देश्य युवा चिकित्सकों को प्रेरित करना और चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार करना है।”
संदेश
कार्यक्रम के अंत में डॉ. डी.के. गुप्ता ने कहा –
“जिंदगी जिंदादिली का नाम है, बुजदिल खाक जिया करते हैं। संघर्ष से भागना नहीं, बल्कि उनका सामना करना ही असली सफलता है।”






