Eros Times: नोएडा डीजल जनरेटरों पर आश्रित उद्योगों की चिंता फिर से बढ़ रही है। एक अक्टूबर से डीजी सेट पर फिर से पाबंदी लगने जा रही है। अधूरी तैयारियों के बीच 50 दिन में लगभग 10 हजार से ज्यादा उद्योगों के लिए दोहरे ईंधन के जनरेटर सेट का बंदोबस्त कर पाना मुश्किल साबित होगा। उद्यमी संगठन को इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड से मिली जानकारी के अनुसार अब तक जिले में 1450 उद्योगों को ही पीएनजी कनेक्शन मिल पाए हैं। इनमें नोएडा के 950 और ग्रेटर नोएडा के 500 उद्योगों को ही पीएनजी कनेक्शन मिल पाए हैं। दस हजार से ज्यादा उद्योगों को पीएनजी कनेक्शन से वंचित हैं। एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन नोएडा ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को पत्र लिखकर डीजी सेट पर पाबंदी की समयसीमा 31 मार्च 2024 तक बढ़ाने की मांग की है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के आदेश पर 15 मई 2023 से दिल्ली-एनसीआर में डीजल से चलने वाले डीजी सेट चलाने पर पाबंदी लगाई गई थी। उद्यमी संगठनों की मांग पर इस समयसीमा को 30 सितंबर तक बढ़ाया गया है। एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुरेद्र सिंह नाहटा ने बताया कि एक अक्टूबर तक भी जनपद की सभी औद्योगिक इकाइयों में दोहरे ईंधन से संचालित होने वाले डीजी सेट स्थापित कर पाना संभव नहीं हो पाएगा। डीजी सेट पर प्रतिबंध लगाए जाने से औद्योगिक उत्पादन पर प्रभाव पड़ेगा। जनपद में 24 घंटे बिजली आपूर्ति की व्यवस्था नहीं है। साथ ही, पीएनजी गैस आधारित ईंधन के लिए भी पाइप लाइनें नहीं बिछाई गई हैं। बिना विकल्प तैयार किए प्रतिबंध लगाना लाखों कारीगरों की आजीविका को प्रभावित कर सकता है।
इन समस्याओं से जूझ रहे उद्यमी
बड़ी संख्या में उद्यमियों ने पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन किया हुआ है। कई सेक्टरों में गैस पाइपलाइन नहीं डाली गई है। हजारों की संख्या में औद्योगिक इकाइयों से पाइपलाइन की दूरी ज्यादा है। ऐसी स्थिति में आवेदन के बाद भी गैस कनेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं। गैस जनरेटर और डीजी सेट को गैस में बदलने वाली किट आदि की बाजार में उपलब्धता कम है।
औद्योगिक सेक्टरों में कई कई बार को जोड़ कर दिन में 2 से 4 घंटे की बिजली कटौती के बीच जनरेटर बंद होने से औद्योगिक इकाइयों का उत्पादन भी बंद करना पड़ता है। इससे ना केवल उद्यमियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है बल्कि औद्योगिक उत्पादन प्रभावित होने राज्य और देश की अर्थव्यवस्था पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है।
जिले में 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जाए तो उद्योगों को जनरेटर चलाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। गर्मी बढ़ते ही बिजली कटौती का सिलसिला शुरू हो गया है। ऐसी स्थिति में डीजी सेट पर पाबंदी लगने से जिले के हजारों उद्योगों की समस्या को देखते हुए निर्बाध बिजली आपूर्ति के बंदोबस्त किए जाएं।
गैस आधारित 20 केवीए के नए जनरेटर सेट की कीमत पांच से छह लाख, 25 केवीए का छह से आठ लाख,80 केवीए का 10 से 12 लाख और 100 केवीए का 12 से 14 लाख रुपये है। डीजी सेट को दोहरे ईंधन में बदलने का खर्च भी पांच लाख से ऊपर है। दोहरे ईंधन के जनरेटर के लिए उद्योगों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इससे निपटने के लिए शासन-प्रशासन की तरफ से गैस आधारित जनरेटर पर सब्सिडी व अन्य रियायतें दिलवाई जाएं।
गैस की आपूर्ति करने वाली एजेंसी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड कनेक्शन के लिए आवेदन के बाद 45 दिन के सिक्योरिटी चार्ज के साथ शुल्क जमा करा रही है, जिसका न्यूनतम खर्च 1.5 लाख से अधिक है। कनेक्शन के लिए आवेदन करने वाले उद्यमियों को सिक्योरिटी चार्ज से राहत दी जानी चाहिए।
गैस पाइपलाइन से वंचित औद्योगिक सेक्टरों में जब तक गैस की आपूर्ति और पीएनजी जेनरेटर किल्लत दूर नही हो जाती तब तक किसी तरह की सख्ती से काम न लिया जाए।






