नई दिल्ली/देहरादून।
गुमनाम वनयोद्धाओं की सच्ची घटनाओं पर आधारित एपिसोडिक फिल्म “डीएफओ डायरी फायर वॉरियर्स” नेशनल वाइल्डलाइफ वीक के अवसर पर देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। यह रोमांचक एडवेंचर-ड्रामा फिल्म उन असली नायकों की गाथा कहती है, जो प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर देते हैं।
फिल्म का कॉन्सेप्ट और स्टोरी आईएफएस अधिकारी टी. आर. बीजुलाल के 20 साल के अनुभवों से प्रेरित है। इससे पहले उनकी फिल्म “मिशन टाइगर” देश-विदेश में प्रदर्शित होकर चर्चित रही थी। इस फिल्म में भी बीजुलाल खुद वन अधिकारी विजय की भूमिका निभा रहे हैं और दमदार नरेशन भी उनकी ही आवाज़ में है।
फिल्म की कहानी
फिल्म में डीएफओ विजय की डायरी के तीन अध्याय प्रस्तुत किए गए हैं। मुख्य रूप से इसमें 2024 में अल्मोड़ा के बिन्सर वाइल्डलाइफ सेंचुरी में लगी भीषण आग और उसमें शहीद हुए वनकर्मियों व ग्रामीणों के संघर्ष को दिखाया गया है। कहानी बताती है कि किस तरह शिकारी, जंगल की आग और लापरवाही, हरे-भरे हिमालय को संकट में डाल देती है।
लोकेशन और सिनेमैटोग्राफी
फिल्म को उत्तराखंड के कुमाऊं हिमालय में फिल्माया गया है। नैनीताल, भवाली, पंगोट, रामगढ़ और मुक्तेश्वर जैसे स्थानों की वादियों को कैमरा मैन मनोज सती और संतोष पाल ने बड़े परदे पर शानदार तरीके से उतारा है। ओक-पाइन के जंगल, झीलें, धुंध से ढकी घाटियां और पारंपरिक गांव फिल्म में हिमालय को एक जीवित पात्र बना देते हैं।
संगीत और गीत
फिल्म का संगीत इसकी आत्मा है। संगीतकार अमित वी कपूर, विनय कोचर और मन चौहान ने उत्तराखंड की लोकधुनों और आधुनिक संगीत का सुंदर संगम रचा है।
-
प्रमुख गीत “राही ओ राही” को पद्मश्री कैलाश खेर ने गाया है।
-
दूसरा गीत “भागीरथों पुनः उठो” स्वयं टी.आर. बीजुलाल की आवाज़ में है, जो प्रकृति की रक्षा का आह्वान करता है।
टीम और निर्देशन
-
लेखक-निर्देशक: महेश भट्ट
-
स्क्रीनप्ले और डायलॉग: ऋतुराज व महेश भट्ट
-
क्रिएटिव डायरेक्टर/एडिटर: आयुष्मान भट्ट एवं आलोक सिंह
“डीएफओ डायरी फायर वॉरियर्स” सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि प्रकृति रक्षकों की सच्ची गाथा है, जो दर्शकों को भावुक और प्रेरित दोनों करेगी।






