प्रगति मैदान में रिंग रोड पर पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाया जा रहा अंडरपास आधुनिक इंजीनियरिंग का शानदार नमूना
व्यस्त रेलवे लाइन के नीचे इस अंडरपास का निर्माण करना मुश्किल भरा काम लेकिन हमारे पीडब्ल्यूडी इंजिनियरों ने साबित कर दिया वो हर चुनौतियों से लड़ने के लिए तैयार
EROS TIMES: केजरीवाल सरकार की पीडब्ल्यूडी बाधाओ और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद दिल्ली को जाम मुक्त बनाने और ट्रैफ़िक को सुगम बनाने के लिए बेहतरीन काम कर रही है रेलवे ट्रैक से रोजाना गुजरती है 120 से ज्यादा ट्रेनें, पीडब्ल्यूडी को काम करने के लिए मिलते है सिर्फ 4 घंटे जिसमें 1 घंटे में होती है बॉक्स पुशिंग बाकी समय में रेलवे लाइन को किया जाता है फिक्स काम के लिए निर्धारित समय में 1400 टन वजनी कंक्रीट ब्लॉक को हाइड्रोलिक के माध्यम से रोजाना 30 सेमी खिसकाया जाता है 6000 हॉर्सपॉवर की मशीनों का किया जाता है इस्तेमाल पीडब्ल्यूडी द्वारा इस अंडरपास को बनाने का तरीका खुद में अनूठा देश में पहली बार इतने बड़े स्तर पर इस इंजीनियरिंग तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है

अंडरपास बनने के बाद दिल्ली के 2 इंटरस्टेट बस टर्मिनल- कश्मीरी गेट और सराय काले खां के बीच की सड़क हो जाएगी सिग्नल फ्री रिंग रोड रोड को जाममुक्त बनाने की दिशा में केजरीवाल सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा भैरों मार्ग से रिंग रोड पर सराय काले खाँअक्षरधाम नोएडा की दिशा में जाने वाले ट्रैफिक के लिए अंडरपास का निर्माण किया जा रहा है। गुरुवार की मंत्री आतिशी ने अधिकारियों के साथ इसका निरीक्षण किया।

इस मौक़े पर पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि प्रगति मैदान में रिंग रोड पर पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाया जा रहा अंडरपास आधुनिक इंजीनियरिंग का शानदार नमूना है। उन्होंने कहा कि व्यस्त रेलवे लाइन के नीचे इस अंडरपास का निर्माण करना मुश्किल भरा काम है। लेकिन हमारे पीडब्ल्यूडी इंजिनियरों ने साबित कर दिया वो हर चुनौतियों से लड़ने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोजैक्ट्स इस बात का उदाहरण है कि केजरीवाल सरकार की पीडब्ल्यूडी बाधाओ और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद, दिल्ली को जाम मुक्त बनाने और ट्रैफ़िक को सुगम बनाने के लिए बेहतरीन काम कर रही है।
पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि, इस अंडरपास के तैयार होने के बाद दिल्ली के 2 इंटरस्टेट बस टर्मिनल- कश्मीरी गेट और सराय काले खाँ के बीच की रोड़ पूरी तरह से सिग्नल फ्री हो जाएगी और यहाँ से गुजरने वाले लाखों वाहनों को जाम की समस्या का सामना नहीं करना होगा। साथ ही अभी भैरों मार्ग से जिन वाहनों को सराय काले खाँ,अक्षरधाम, नोएडा की ओर जाना होता है उन्हें ट्रैफिक की समस्या का सामना नहीं करना होगा और अंडरपास का इस्तेमाल करते हुए वो सीधे रिंग रोड पर निकल सकेंगे।

पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि पीडब्ल्यूडी द्वारा इस अंडरपास को बनाने का तरीका खुद में अनूठा है और देश में पहली बार इतने बड़े स्तर पर बॉक्स पुशिंग के इस इंजीनियरिंग तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। जो दिखाता है कि हमारा पीडब्ल्यूडी विभाग हमेशा नई चुनौतियों का सामना करने और उसका अनूठा हल निकालने के लिए तैयार है।
कैसे पीडब्ल्यूडी ने इस मुश्किल प्रोजेक्ट को बनाया संभव

बता दें कि इस अंडरपास का निर्माण ख़ुद में इंजीनियरिंग की एक बड़ी चुनौती है। अंडरपास का एक हिस्सा एक बेहद ही व्यस्त रेलवे लाइन के नीचे है, जहां से प्रतिदिन लगभग 120 ट्रेनें गुजरती है। ट्रेन की आवाजाही के लिए सक्रिय रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले रेलवे कॉरिडोर के साथ निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है, ऐसे में पीडब्ल्यूडी को यहाँ काम करने के लिए रोज़ाना केवल 4 घंटे ही मिल पाते है। जिसमें 3 घंटे रेलवे लाइन को हटाने और फिक्स करने में लग जाते है और बचे हुए समय में पीडब्ल्यूडी रेलवे लाइन के नीचे 1400 टन वज़नी कंक्रीट ब्लॉक को खिसकाने का काम करती है।
6000 हॉर्सपॉवर के हाइड्रोलिक के साथ रोज़ाना केवल 30 सेमी ही खिसक पाता है कंक्रीट ब्लॉक
रेलवे लाइन ज़मीन से 9 मीटर की ऊँचाई पर है। काम के दौरान रेलवे लाइन न धँसे इसके लिए यहाँ 6000 हॉर्सपॉवर की हाइड्रोलिक मशीनों द्वारा कंक्रीट ब्लॉक को प्रतिदिन 30 सेंटीमीटर खिसकाया जाता है। कंक्रीट ब्लॉक को खिसकाने के बाद वहाँ मौजूद मिट्टी को हटाया जाता है। इसके बाद ही अगले दिन दोबारा बॉक्स पुशिंग का काम शुरू हो पाता है। यहाँ इंजिनियरों ने साझा किया कि बॉक्स पुशिंग की तकनीक को पहले भी इस्तेमाल किया जाता था लेकिन इतने बड़े स्तर पर पहली बार ये काम हो रहा है|

यहाँ एक और बड़ी चुनौती ये है कि अंडरपास के नज़दीक ही यमुना नदी है जिस कारण वाटर टेबल के अधिक होने की वजह से यहाँ काम करना और मुश्किल बन जाता है। लेकिन फिर भी चुनौतियों का सामना करते हुए पीडब्ल्यूडी के इंजिनियरों ने इसे संभव कर दिखाया|






