Eros Times: एमिटी विश्वविद्यालय ने ‘‘डीकार्बोनाइजेशन’’ विषय पर 15 से 17 फरवरी 2024 तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपों मार्ट में आयोजित एसीआरईएक्स इंडिया 2024 एक्सपों में अपने अभूतपूर्व नवाचार ‘‘अपशिष्ट जल से बिजली उत्पादन’’ का प्रदर्शन किया गया। विदित हो कि जलवायु, उर्जा और सतत प्रौद्योगिकी (सीईएसटी) डीएसटी को नेतृत्व डीएसटी में सीईएसटी विभाग की प्रमुख डा अनिता गुप्ता किया जा रहा है और एक्सपो के दौरान एक समर्पित स्टॉल पर डीकार्बेनाइजेशन के लिए पहल और योजनाओं का प्रदर्शन हेतु किया गया है।
इस नवचार को एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ एडवंास रिसर्च एंड स्टडीज (सामग्री और उपकरण) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा वी के जैन द्वारा विकसित किया गया है। डीएसटी ने इस प्रतिष्ठित अंतराष्ट्रीय प्रदर्शनी में डीएसटी – सीईएसटी प्रभाग का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रौद्योगिकियों का चयन किया है जिसमें दो प्रोजेक्ट आईआईटी दिल्ली से, एक आईआईटी रूड़की और एक एमिटी विश्वविद्यालय से है।

डीएसटी में सीईएसटी विभाग की प्रमुख डा अनीता गुप्ता ने एमिटी स्टॉल का भ्रमण करते हुए कहा कि एमिटी विश्वविद्यालय के डा वी के जैन द्वारा विकसित की गई नवचार प्रौद्योगिकी बेहद प्रभावी है और इसका व्यवसायिकरण करके आमजन के लाभ के लिए उपयोग होना चाहिए। इस प्रौद्योगिकी का उपयोग जलवायु परिवर्तन, जल गुणवत्ता, प्रदूषण उन्मूलन के क्षेत्र में आ रही चुनौतियों से निपटने में सहायक होगा।
अभूतपूर्व नवाचार ‘‘अपशिष्ट जल से बिजली उत्पादन’’ के बारे में बताते हुए एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ एडवांस रिसर्च एंड स्टडीज के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा वी के जैन ने कहा कि यह प्रौद्योगिकी एक अभिनव प्रणाली है जिसके माध्यम से औद्योगिक अपशिष्ट जल को कुशलतापूर्वक साफ किया जाता है और बाहरी स़्त्रोतों या सामग्रियों पर भरोसा किए बिना उसी पानी का उपयोग करके विद्युत उर्जा का उत्पादन किया जाता है। इस प्रणाली में दो औद्योगिक अपशिष्ट जल में डूबे विभिन्न सामग्रियों से बने दो विशिष्ट रूप से डिजाइन किए गए इलेक्ट्रोड शामिल है। एक इलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रिया के माध्यम से ये इलेक्ट्रोड विद्युत शक्ती उत्पन्न करते है और साथ ही पानी की स्वंय सफाई की सुविधा भी प्रदान करते है। साफ किया गया पानी जो अब पुनः प्रयोज्य है सिंचाई और सफाई उददेश्यों के लिए नियोजित किया जा सकता है।
इस अवसर पर एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ एडवांस रिसर्च एंड स्टडीज के एसोसिएट प्रोफेसर डा अभिषेक वर्मा भी उपस्थित थे।






