“एआई का मानवीकरण – नैतिक बुद्धिमत्ता, उत्तरदायी नवाचार और लचीली प्रणालियों को बढ़ावा देना” विषय पर विशेषज्ञों की चर्चा
नोएडा, 15 अक्टूबर 2025।
एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी बिजनेस स्कूल द्वारा “एआई का मानवीकरण – नैतिक बुद्धिमत्ता, उत्तरदायी नवाचार और लचीली प्रणालियों को बढ़ावा देना” विषय पर आयोजित 8वें वार्षिक तकनीकी सम्मेलन ‘इनफिनिटी 2025’ का भव्य आयोजन किया गया।
इस सम्मेलन का उद्घाटन हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (HUDCO) के सीनियर एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्री शैलेष त्रिपाठी, एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डॉ. बलविंदर शुक्ला, संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र और भूमि युद्ध अध्ययन केंद्र के सीनियर रिसर्च फेलो मेजर जनरल पी.के. मलिक, एमिटी विश्वविद्यालय के एडिशनल प्रो वाइस चांसलर डॉ. संजीव बंसल और आनंद एंड आनंद के चीफ इन्फॉर्मेशन ऑफिसर डॉ. सुब्रोतो कुमार पांडा ने संयुक्त रूप से किया।
विशेषज्ञों के विचार
श्री शैलेष त्रिपाठी ने कहा कि आज एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) जीवन के हर क्षेत्र—स्वास्थ्य, वित्त, उद्योग और शिक्षा—में प्रभाव डाल रही है। उन्होंने कहा,
“एआई एक उपकरण है, कोई विकल्प नहीं। इसे अपनाने के साथ-साथ हमें इसकी नैतिक सीमाओं और निजता की रक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए।”
उन्होंने भारत सरकार द्वारा लागू डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 को डेटा सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।
डॉ. बलविंदर शुक्ला, वाइस चांसलर, एमिटी विश्वविद्यालय ने कहा कि एआई और चैटजीपीटी जैसे टूल्स ने मानव जीवन को प्रभावित किया है और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाला है।
“मानव मूल्य एआई से अधिक महत्वपूर्ण हैं। हमें एआई का उपयोग जिम्मेदारी और सामाजिक हित में करना चाहिए,” उन्होंने कहा।
मेजर जनरल पी.के. मलिक ने कहा कि एआई अब हमारे जीवन के हर पहलू में शामिल है।
“युवाओं पर दोहरी जिम्मेदारी है—पहली, मानवता के साथ नेतृत्व करना, और दूसरी, तकनीकी कौशल में दक्ष बनना। एआई आज का सबसे शक्तिशाली उपकरण है।”
डॉ. संजीव बंसल ने कहा कि एआई केवल एक तकनीक नहीं बल्कि सुधार का माध्यम है।
“यह सम्मेलन छात्रों को एआई के मानवीय और नैतिक पहलुओं को समझने का अवसर प्रदान करता है,” उन्होंने कहा।
डॉ. सुब्रोतो कुमार पांडा ने कहा कि भारत के विकास के सात स्तंभ हैं—कौशलता, नैतिकता, उत्पादन, कृषि, स्टार्टअप, संरचना और मानव संसाधन।
“एआई सहायता का उपकरण है, लेकिन इसका उपयोग मानवीय भावनाओं के साथ करना चाहिए,” उन्होंने कहा।
परिचर्चा सत्र
सम्मेलन के अंतर्गत दो परिचर्चा सत्र आयोजित किए गए —
1️⃣ “एआई में नैतिक बुद्धिमत्ता: मानवीय मूल्यों और मशीनी तर्क में संतुलन”
इस सत्र में ग्रोबायज़ पार्टनर्स के संस्थापक श्री अतुल कुलश्रेष्ठ, सीडिया कंसल्टिंग एलएलपी के एमडी श्री नवीन चोपड़ा, एचसीएल टेक के एसोसिएट डायरेक्टर श्री गिरिश कुमार सिंह और एओएन इंडिया के आईटी आर्किटेक्ट डॉ. नवीन गुप्ता ने अपने विचार रखे।
2️⃣ “लचीले भविष्य के लिए उत्तरदायी नवाचार: एआई में नीतियां, प्रथाएं और जवाबदेही”
विषय पर आयोजित दूसरे सत्र में भी विशेषज्ञों ने एआई के व्यावहारिक और नैतिक पक्षों पर गहन चर्चा की।
यह सम्मेलन छात्रों के लिए न केवल एक शैक्षणिक मंच साबित हुआ बल्कि एआई की नैतिकता, नवाचार और मानवीकरण के बीच संतुलन समझने का एक सशक्त अवसर भी बना।







