नोएडा। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के स्वास्थ्य और जागरूकता को केंद्र में रखते हुए वाईएसएस फाउंडेशन और मेदांता हॉस्पिटल, सेक्टर-50 नोएडा के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम “आओ करें – महिलाओं की बात” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मेदांता हॉस्पिटल के परिसर में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं, छात्रों और स्वयंसेवकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, समय पर जांच और उपचार के महत्व को समझाना तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
इस अवसर पर आयोजित संवाद सत्र में महिलाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता, वेलनेस, प्रिवेंटिव केयर और जीवनशैली से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों ने महिलाओं को विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जानकारी दी और उनसे जुड़े मिथकों को भी दूर किया। साथ ही उन्होंने महिलाओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए नियमित स्वास्थ्य जांच और संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी।
कार्यक्रम में मेदांता हॉस्पिटल की विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक पैनल मौजूद रहा, जिसमें डॉ. ईशा कौल (निदेशक, हीमैटो-ऑन्कोलॉजी), डॉ. नमिता कौल (निदेशक, न्यूरोलॉजी) और डॉ. प्रिया बंसल (सीनियर कंसल्टेंट, स्त्री रोग एवं स्त्री रोग कैंसर विशेषज्ञ) शामिल रहीं। विशेषज्ञों ने महिलाओं को कैंसर जागरूकता, न्यूरोलॉजिकल समस्याओं और स्त्री रोग से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी।
डॉ. ईशा कौल ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं में कैंसर के मामलों में जागरूकता की कमी एक बड़ी समस्या है। उन्होंने बताया कि स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारियों की समय पर पहचान होने पर उनका सफल इलाज संभव है। इसलिए महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग करवानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि स्वस्थ खान-पान, नियमित व्यायाम और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाकर कई गंभीर बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
वहीं डॉ. नमिता कौल ने महिलाओं में बढ़ती न्यूरोलॉजिकल समस्याओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में तनाव, अनियमित दिनचर्या और पर्याप्त आराम न मिल पाने के कारण महिलाओं में माइग्रेन, नींद की समस्या और मानसिक थकान जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने महिलाओं को मानसिक स्वास्थ्य पर भी उतना ही ध्यान देने की सलाह दी जितना वे शारीरिक स्वास्थ्य पर देती हैं।
डॉ. प्रिया बंसल ने महिलाओं को स्त्री रोग संबंधी समस्याओं और प्रिवेंटिव केयर के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं सामाजिक झिझक या जानकारी की कमी के कारण अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज कर देती हैं, जो आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती हैं। इसलिए महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए और किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
कार्यक्रम में वाईएसएस फाउंडेशन की ओर से भी बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों और छात्रों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। संस्था की ओर से सुमेक्षा कौल, गीता भन्या, दुर्गा प्रसाद दुबे, अनीता आहुजा और कीर्ति डेकाटे सहित लगभग 100 से अधिक छात्रों और स्वयंसेवकों की टीम ने कार्यक्रम के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम का संचालन और समन्वय सुनील नेहरा, मुस्कान चौहान और युवाक्षी धौंडियाल के नेतृत्व में किया गया। इन सभी ने मिलकर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की और इसे सफल बनाने के लिए समर्पित प्रयास किए। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के लिए इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किए गए, जिसमें उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और स्वास्थ्य से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
इस अवसर पर वाईएसएस फाउंडेशन की प्रतिनिधि सुमेक्षा कौल ने कहा कि संस्था लंबे समय से महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य जागरूकता, शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना समाज के समग्र विकास के लिए बेहद आवश्यक है। इस प्रकार के कार्यक्रम महिलाओं को सही जानकारी प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग बनने के लिए प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी महिलाओं से अपील की गई कि वे अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच कराते रहें। साथ ही उन्हें संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम महिलाओं के स्वास्थ्य और जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जब महिलाएं स्वस्थ और जागरूक होंगी, तभी वे अपने परिवार और समाज के विकास में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगी।





