नोएडा के सेक्टर 5 स्थित हरौला गांव के रहने वाले नेम चंद ने समाज सेवा की ऐसी मिसाल पेश की है, जो हर किसी के लिए प्रेरणा बन गई है। उन्होंने अब तक 96 बार रक्तदान करके एक अनोखा इतिहास रच दिया है। यह उपलब्धि सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि उनके जज्बे, मानवता और दूसरों की मदद करने की भावना का प्रतीक है। इस प्रेरणादायक कार्य का केंद्र बिंदु नोएडा है।
नेम चंद का कहना है कि उन्होंने पहली बार रक्तदान तब किया था, जब उनके एक परिचित को अचानक खून की जरूरत पड़ी। उस समय उन्हें महसूस हुआ कि समय पर खून मिलना किसी की जिंदगी बचा सकता है। उसी दिन उन्होंने यह संकल्प लिया कि वे नियमित रूप से रक्तदान करेंगे और जरूरतमंदों की मदद करेंगे। धीरे-धीरे यह एक आदत बन गई और फिर उनका मिशन, नोएडा में रक्तदान करने का।
आज 96 बार रक्तदान करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इसके लिए न सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना जरूरी है, बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत और प्रतिबद्ध होना पड़ता है। नेम चंद हर बार रक्तदान से पहले अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखते हैं और डॉक्टरों की सलाह का पालन करते हैं। यही कारण है कि वे इतने लंबे समय तक लगातार इस सेवा को जारी रख पाए हैं, विशेषकर नोएडा में।

नेम चंद का मानना है कि रक्तदान करने से न सिर्फ दूसरों की जान बचती है, बल्कि इससे खुद के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। वे अक्सर लोगों को जागरूक करते हैं कि रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है और इससे किसी तरह का नुकसान नहीं होता। उन्होंने अपने आसपास के कई लोगों को भी प्रेरित किया है, जो अब नियमित रूप से रक्तदान कर रहे हैं।
हरौला गांव और नोएडा क्षेत्र में नेम चंद की पहचान अब एक समाजसेवी के रूप में हो चुकी है। स्थानीय लोग उनकी इस सेवा भावना की सराहना करते हैं और उन्हें सम्मान की नजर से देखते हैं। कई सामाजिक संगठनों ने भी उन्हें सम्मानित किया है, लेकिन नेम चंद के लिए सबसे बड़ा सम्मान वह मुस्कान है, जो किसी जरूरतमंद की मदद करने के बाद उनके चेहरे पर आती है।
नेम चंद की कहानी यह साबित करती है कि अगर किसी के भीतर सच्ची सेवा भावना हो, तो वह बिना किसी बड़े संसाधन के भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने यह दिखा दिया कि एक आम व्यक्ति भी असाधारण काम कर सकता है। उनका लक्ष्य है कि वे जल्द ही 100 बार रक्तदान का आंकड़ा पूरा करें और अधिक से अधिक लोगों को इस नेक काम के लिए प्रेरित करें।
आज जब समाज में कई तरह की चुनौतियां हैं, ऐसे में नेम चंद जैसे लोग उम्मीद की किरण बनकर सामने आते हैं। उनकी यह पहल न सिर्फ लोगों की जान बचा रही है, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी फैला रही है कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है।





