South Asian University में 2026-27 सत्र के लिए 1610 सीटों पर प्रवेश शुरू, कई नए शैक्षणिक कार्यक्रमों की घोषणा

नई दिल्ली। सार्क देशों की सरकारों द्वारा स्थापित और “नॉलेज विदाउट बॉर्डर्स” की अवधारणा पर आधारित South Asian University (एसएयू) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अपने अकादमिक कार्यक्रमों का विस्तार करते हुए कई नए पाठ्यक्रमों की घोषणा की है। विश्वविद्यालय ने इस वर्ष कुल 1610 सीटों पर प्रवेश खोले हैं। इनमें 50 पीएचडी छात्रवृत्ति सीटें, 780 स्नातक (यूजी) और 780 स्नातकोत्तर (पीजी) कार्यक्रमों की सीटें शामिल हैं।

यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष प्रो. के. के. अग्रवाल ने कैंपस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एसएयू अपने 16वें शैक्षणिक वर्ष में प्रवेश कर रही है और क्षेत्रीय सहयोग, उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा तथा शोध उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य दक्षिण एशियाई देशों के विद्यार्थियों को वैश्विक मानकों की शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने-अपने देशों के विकास में प्रभावी योगदान दे सकें।

यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष प्रो. के. के. अग्रवाल मीडिया में यूनिवर्सिटी जानकारी देते हुए।
यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष प्रो. के. के. अग्रवाल मीडिया में यूनिवर्सिटी जानकारी देते हुए।

स्नातक स्तर पर इस वर्ष विश्वविद्यालय ने विधि शिक्षा के क्षेत्र में दो नए एकीकृत कार्यक्रम — बीए एलएलबी (ऑनर्स) और बीबीए एलएलबी (ऑनर्स) — प्रारंभ किए हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विधिक शिक्षा को बहुआयामी दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि छात्र कानून के साथ-साथ सामाजिक, प्रशासनिक और व्यावसायिक पहलुओं को भी समझ सकें। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इन कार्यक्रमों से विधि शिक्षा के क्षेत्र में एसएयू की सशक्त उपस्थिति और मजबूत होगी।

इसके अतिरिक्त, रचनात्मक और संचार आधारित क्षेत्रों में बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए बीए (ऑनर्स) इन मीडिया, आर्ट्स एंड डिजाइन कार्यक्रम भी शुरू किया गया है। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और आधुनिक संचार तकनीकों की समझ विकसित करने पर केंद्रित है।

स्नातकोत्तर स्तर पर विश्वविद्यालय ने दो महत्वपूर्ण कार्यक्रम — एमए इन जर्नलिज्म एंड डिजिटल मीडिया तथा एमएस इन बिजनेस एनालिटिक्स — लॉन्च किए हैं। डिजिटल युग में मीडिया और डेटा विश्लेषण की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए इन पाठ्यक्रमों को डिजाइन किया गया है। जहां जर्नलिज्म और डिजिटल मीडिया कार्यक्रम छात्रों को आधुनिक मीडिया परिदृश्य, डेटा जर्नलिज्म और मल्टीमीडिया प्रोडक्शन की गहन समझ देगा, वहीं बिजनेस एनालिटिक्स कार्यक्रम उद्योग जगत में डेटा-आधारित निर्णय क्षमता को सशक्त बनाएगा।

शोध को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए विश्वविद्यालय ने प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, अंग्रेज़ी तथा रसायन विज्ञान में नए पीएचडी कार्यक्रमों की भी शुरुआत की है। इन शोध कार्यक्रमों का उद्देश्य क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों से जुड़े विषयों पर उच्च स्तरीय अनुसंधान को बढ़ावा देना है।

तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में भी एसएयू ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बीटेक (कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग) कार्यक्रम के अंतर्गत क्वांटम कंप्यूटिंग में एक अत्याधुनिक विशेषज्ञता की शुरुआत की गई है। यह विशेषज्ञता छात्रों को भविष्य की उभरती प्रौद्योगिकियों में दक्ष बनाएगी और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में सहायक होगी।

एसएयू के अकादमिक उपाध्यक्ष प्रो. पंकज जैन ने बताया कि विश्वविद्यालय में उन्नत प्रौद्योगिकी, अंतर्विषयक अध्ययन, प्रबंधन शिक्षा, सामाजिक विज्ञान, जलवायु परिवर्तन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) पर केंद्रित पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। हाल ही में यहां सेंटर फॉर एंटरप्रेन्योरशिप, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट्स (CETP) की स्थापना की गई है, जिसका उद्देश्य उद्योग सहयोग को बढ़ावा देना और विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता में वृद्धि करना है।

प्रवेश निदेशक प्रो. कविता खन्ना के अनुसार, आवेदन की अंतिम तिथि 10 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है, जबकि प्रवेश परीक्षा 25 और 26 अप्रैल 2026 को आयोजित होगी। इच्छुक अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

विश्वविद्यालय का यह शैक्षणिक विस्तार दक्षिण एशिया में उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम न केवल क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करेगा, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों के लिए तैयार करने में भी सहायक सिद्ध होगा।

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